विश्वकर्मा पूजा पर मशीनों पर क्यों बनाया जाता है स्वस्तिक? जानिए इसका धार्मिक महत्व
स्वस्तिक के अलावा भी विश्वकर्मा पूजा के दौरान मशीनों और औजारों पर कई तरह के शुभ चिन्ह बनाए जाते हैं. इसमें से एक ॐ का निशान है. कई जगह मशीनों पर ॐ लिखा जाता है. ॐ को ब्रह्मांड की ध्वनि और सृष्टि की ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. इसे बनाने से मशीन में दैवीय शक्ति का वास होता है.
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इस साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा. विश्वकर्मा पूजा के दौरान सबसे खास होता है- मशीनों पर स्वस्तिक बनाना. क्या आप जानते हैं कि मशीनों पर स्वस्तिक क्यों बनाया जाता है और इसके अलावा और क्या-क्या बनाया जाता है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं और इसके महत्व पर भी प्रकाश डालते हैं.
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मशीनों पर क्यों बनाया जाता है स्वस्तिक?
विश्वकर्मा पूजन के दिन कारखानों, दुकानों, कार्यालयों और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों पर स्वस्तिक बनाने का धार्मिक महत्व है. हिंदू धर्म में स्वस्तिक को सबसे पवित्र और शुभ चिन्ह माना गया है. स्वस्तिक शब्द 'सु' और 'अस्ति' से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है 'शुभ होना' या 'कल्याण होना'. किसी भी शुभ काम की शुरुआत स्वस्तिक बनाकर ही की जाती है.
भगवान गणेश से जुड़ी है मान्यता
विश्वकर्मा पूजा के दिन मशीनों पर रोली, कुमकुम और सिंदूर से स्वस्तिक बनाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं हैं. पहला कारण यह है कि स्वस्तिक को भगवान श्री गणेश का प्रतीक माना जाता है. भगवान गणेश प्रथम पूज्य हैं और विघ्नहर्ता हैं. मशीन पर स्वस्तिक बनाने से मशीन के काम में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती है और काम बिना किसी रुकावट के चलता रहता है.
दूसरा कारण समृद्धि से जुड़ा है. स्वस्तिक को धन की देवी लक्ष्मी का भी प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि जहां स्वस्तिक होता है वहां नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. मशीन पर स्वस्तिक बनाने से कारोबार में वृद्धि होती है और आर्थिक समृद्धि आती है.
सुरक्षा के लिए भी की जाती है कामना
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण सुरक्षा है. कारीगर और मजदूर दिन भर मशीनों पर काम करते हैं. मशीन पर स्वस्तिक बनाकर वे अपनी सुरक्षा और मशीन की लंबी उम्र की कामना करते हैं ताकि पूरे साल कोई दुर्घटना न हो.
ॐ का चिन्ह
स्वस्तिक के अलावा भी विश्वकर्मा पूजा के दौरान मशीनों और औजारों पर कई तरह के शुभ चिन्ह बनाए जाते हैं. इसमें से एक ॐ का निशान है. कई जगह मशीनों पर ॐ लिखा जाता है. ॐ को ब्रह्मांड की ध्वनि और सृष्टि की ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. इसे बनाने से मशीन में दैवीय शक्ति का वास होता है.
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शुभ-लाभ
वहीं, दूसरी जगह शुभ-लाभ भी लिखा जाता है. ये मशीनों, लेथ मशीन, ड्रिल मशीन और मुख्य गेट पर शुभ और लाभ लिखा जाता है. इसका अर्थ होता है कि भगवान विश्वकर्मा की कृपा से काम शुभ हो और उसमें लाभ हो. यह व्यापार में बरकत के लिए लिखा जाता है.
विश्वकर्मा पूजन के दौरान कई लोग कलावा या मौली भी बांधते है और पूजा के बाद मशीनों के हैंडल, स्विच और औजारों पर लाल रंग का कलावा या रक्षा सूत्र बांधा जाता है. इसे रक्षा कवच के रूप में देखा जाता है. इसके साथ ही मान्यता है कि कलावा बांधने से मशीन बुरी नजर से बची रहती है.
मशीनों पर लगाया जाता है तिलक और चढ़ाई जाती है फूल-माला
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विश्वकर्मा पूजन के दौरान मशीनों पर तिलक और फूल-माला चढ़ाया जाता है. कारीगर सभी मशीनों को अच्छे से साफ करके उन पर हल्दी, कुमकुम और चंदन का तिलक लगाया जाता है. इसके बाद गेंदे या अन्य के फूलों की माला पहनाई जाती है. कई फैक्ट्रियों में मशीनों को नए कपड़े की तरह सजाया भी जाता है. साथ ही कुछ जगहों पर मशीनों पर हाथ की पांचों उंगलियों से रोली और चावल के छापे भी लगाए जाते हैं, जो मां लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक होता है.