जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

पितृपक्ष में कद्दू की सब्जी बनाना क्यों है जरूरी? जानिए पितरों से जुड़ी सदियों पुरानी मान्यता

कद्दू की एक खास बात यह भी है कि इसे बिना प्याज और लहसुन के आसानी से स्वादिष्ट बनाया जा सकता है. पितृपक्ष में तामसिक भोजन से परहेज किया जाता है, इसलिए कद्दू की साधारण, सात्विक और हल्की सब्जी श्राद्ध की थाली का हिस्सा बन जाती है.

पितृपक्ष में कद्दू की सब्जी बनाना क्यों है जरूरी? जानिए पितरों से जुड़ी सदियों पुरानी मान्यता
Image Credits:AI/IANS
Advertisement

हर साल 29 सितंबर को 'विश्व कद्दू दिवस' मनाया जाता है. अमेरिका में जन्मा कद्दू आज भारतीय रसोई की शान है. इसे काशीफल, कुम्हड़ा और पेठा भी कहते हैं. इसे आयुर्वेद में औषधीय फल माना गया है. वहीं, पितृपक्ष में कद्दू का महत्व कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि इस दौरान कई घरों में खास तौर पर बिना प्याज-लहसुन के कद्दू की खट्टी-मीठी सब्जी बनाई जाती है. 

पितृपक्ष में कद्दू की सब्जी बनाना क्यों है जरूरी?

दरअसल, पितृपक्ष में अपने पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने के साथ ही, ब्राह्मण भोज और पितरों के निमित्त सात्विक भोजन तैयार करने की भी परंपरा है. इस भोजन में कई ऐसी चीजें शामिल की जाती हैं, जिनका धार्मिक और पारंपरिक महत्व माना गया है. इन्हीं में से एक है कद्दू की सब्जी.

कद्दू को भी सात्विक सब्जियों में गिना जाता है

धार्मिक और लोक मान्यताओं के अनुसार, पितरों के लिए तैयार किया जाने वाला भोजन सात्विक और शुद्ध होना चाहिए. कद्दू को भी सात्विक सब्जियों में गिना जाता है. यही वजह है कि श्राद्ध के भोजन में इसका इस्तेमाल कई जगहों पर विशेष रूप से किया जाता है.

Advertisement

मान्यता है कि पितरों के निमित्त तैयार किए गए सात्विक भोजन से उन्हें तृप्ति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है.

 पितृपक्ष में तामसिक भोजन से परहेज किया जाता है

कद्दू की एक खास बात यह भी है कि इसे बिना प्याज और लहसुन के आसानी से स्वादिष्ट बनाया जा सकता है. पितृपक्ष में तामसिक भोजन से परहेज किया जाता है, इसलिए कद्दू की साधारण, सात्विक और हल्की सब्जी श्राद्ध की थाली का हिस्सा बन जाती है.

Advertisement

कद्दू को लेकर भारत के अलग-अलग हिस्सों में कई लोक मान्यताएं भी प्रचलित हैं

यह भी पढ़ें

कद्दू को लेकर भारत के अलग-अलग हिस्सों में कई लोक मान्यताएं भी प्रचलित हैं. कुछ क्षेत्रों में इसे परिवार के बड़े बेटे का प्रतीक तक माना जाता है. इसी कारण कुछ परिवारों में महिलाएं कद्दू को सीधे काटने से परहेज करती हैं. पहले घर का कोई पुरुष कद्दू को दो हिस्सों में काटता है और इसके बाद महिलाएं सब्जी बनाने के लिए उसके छोटे टुकड़े करती हैं.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें