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DRDO का कमाल... पाक-चीन जैसे दुश्मनों को हवा में तबाह करेगी ‘कुशा’ मिसाइल, सफल हुआ परीक्षण

जल थल और नभ, भारत जमीन से लेकर आसमान और समुद्र की तह तक अपने सुरक्षा कवच को हर दिन नई मजबूती दे रहा है. ‘कुशा’ मिसाइल का पहला सफल उड़ान परीक्षण भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.

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24 Jul 2026
( Updated: 24 Jul 2026
12:35 PM )
DRDO का कमाल... पाक-चीन जैसे दुश्मनों को हवा में तबाह करेगी ‘कुशा’ मिसाइल, सफल हुआ परीक्षण
Image Source- Screengrab/X/DRDO
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भारत ने लंबी दूरी की मिसाइल ‘कुशा’ का पहला सफल परीक्षण किया है. यह मिसाइल सिस्टम लंबी दूरी तक हवाई खतरों को बेअसर करने की क्षमता रखती है. इस परीक्षण के साथ ही भारत ने अपनी वायु रक्षा क्षमता को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की ओर से विकसित यह ‘कुशा’ मिसाइल प्रणाली, लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है. इसका पहला सफल उड़ान परीक्षण गुरुवार को ओडिशा तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया. 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्या कहा? 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर DRDO, सशस्त्र बलों और परियोजना से जुड़े सभी वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि ‘कुशा’ मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमानों, विभिन्न प्रकार की मिसाइलों, मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी) और दुश्मन के बड़े विमानों सहित अनेक प्रकार के हवाई खतरों को लंबी दूरी और विभिन्न ऊंचाइयों पर मार गिराने में सक्षम है. 

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रक्षा क्षेत्र में मील का पत्थर 

रक्षा विशेषज्ञों कहना है कि ‘कुशा’ मिसाइल का पहला सफल उड़ान परीक्षण भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. उन्होंने बताया कि इतनी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली विकसित करने की क्षमता दुनिया के केवल चुनिंदा देशों के पास है. यह इसलिए भी एक अहम उपलब्धि है क्योंकि ‘कुश’ के आने से ऐसी रक्षा प्रणालियों के आयात को लेकर भारत की निर्भरता कम होगी. 

यह मिसाइल सिस्टम देश की वायु रक्षा क्षमता को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ी छलांग साबित होगा. यह प्रणाली भारतीय सशस्त्र बलों को दूर से आने वाले हवाई खतरों का समय रहते पता लगाने और उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करने की क्षमता प्रदान करेगी. इसके जरिए देश के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, रणनीतिक परिसंपत्तियों और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी. 

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DRDO के वैज्ञानिकों ने परीक्षण के दौरान मिसाइल के सभी प्रमुख मानकों का सफलतापूर्वक मूल्यांकन किया. शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, 

आंकड़ों के अनुसार प्रणाली का प्रदर्शन निर्धारित मानकों के अनुरूप रहा. ‘कुशा’ परियोजना भारत की स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. इसके सफल विकास के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में और मजबूती से शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी की अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने की स्वदेशी क्षमता है. 

चीन और पाकिस्तान की टेढ़ी नजर से बचाएगा ‘कुशा’

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जल थल और नभ, भारत जमीन से लेकर आसमान और समुद्र की तह तक अपने सुरक्षा कवच को हर दिन नई मजबूती दे रहा है. ‘कुशा’ की टेस्टिंग के साथ ही भारत ने अपनी वायु रक्षा क्षमता को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. इस मिसाइल की टेस्टिंग से पाकिस्तान और चीन जैसे देशों से भारत की सुरक्षा मजबूत होगी. 

‘कुशा’ एक नई लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम (Long-Range Surface-to-Air Missile - LRSAM) है. इसे Extended Range Air Defence System (ERADS) या XRSAM भी कहा जाता है.

यह भी पढ़ें- समंदर में दुश्मनों का काल… नेवी को मिला INS मालवन, जानें साइलेंट वार से कैसे बढ़ाएगा चीन-पाक की टेंशन

यह लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों, UAVs/ड्रोन्स और हाइपरसोनिक खतरों (Mach 7 तक) को निशाना बनाने में सक्षम होगी. इसकी रेंज की बात करेंतो तीन तरह की इंटरसेप्टर मिसाइलें विकसित की जा रही हैं 

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M1: 150 किलोमीटर
M2: 250 किलोमीटर
M3: 350-400 किलोमीटर

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इसके जरिए भारत को आत्मनिर्भर भारत के तहत आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी. 

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