दुश्मन के टैंक पर कहीं से भी होगा अटैक… अमेरिका से ये खतरनाक हथियार खरीदेगा भारत, हो गई डील!
भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस से जुड़ी बड़ी पर अपडेट सामने आई है. भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर जैवलीन एंटी टैंक सिस्टम की जानकारी दी है.
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भारत और अमेरिका में ट्रेड डील से पहले दोनों के बीच एक बड़ी डील पर मुहर लग रही है. यह डील खतरनाक वेपन की खरीद से जुड़ी है. भारत अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने जा रहा है.
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी है. उन्होंने खुशी जताते हुए लिखा, ‘बड़ी खबर! भारत लड़ाई में परखा हुआ जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है. जैसा कि @secwar ने मई 2026 के शांगरी-ला डायलॉग में बताया था, यह अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम है और इससे मिलकर उत्पादन (co-production) की संभावनाओं के रास्ते खुलते हैं. हमारे दोनों देशों के बीच सहयोग अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है.’
BIG news! India plans to buy the battle-tested Javelin anti-tank system. Just as @secwar highlighted at the May 2026 Shangri-La Dialogue, this is a great step forward in the U.S.-India defense relationship and opens the door to co-production possibilities. The engagement between…
— Ambassador Sergio Gor (@USAmbIndia) August 28, 2026
सर्जियो गोर ने जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम की साथ मिलकर प्रोडक्शन करने की संभावना भी जताई है.
क्या है जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम?
जैसा की नाम से ही साफ हो रहा है यह एंटी टैंक डिफेंस सिस्टम है. जिसके लिए किसी टैंक या वाहन की जरुरत नहीं पड़ती है. यानी एक पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम जिसे सैनिक कंधे पर लॉन्च कर सकते हैं ये ही इसकी बड़ी खासियत है.
जैवलिन (FGM-148 Javelin) अमेरिका का एक मैन-पोर्टेबल (कंधे से दागा जाने वाला) फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) सिस्टम है. इसे Raytheon (अब RTX) और Lockheed Martin के जॉइंट वेंचर ने विकसित और बनाया है. यह 1996 से अमेरिकी सेना और मरीन कॉर्प्स में सेवा में है और पुराने M47 Dragon सिस्टम की जगह लिया.
इसमें फायर एंड फॉरगेट सिस्टम है ऑपरेटर लक्ष्य को लॉक करके मिसाइल दागता है, जिसके बाद मिसाइल खुद इन्फ्रारेड (थर्मल) सीकर से लक्ष्य तक जाती है. ऑपरेटर तुरंत छिप सकता है या जगह बदल सकता है, जिससे उसकी सुरक्षा बढ़ जाती है.
वहीं, इसमें दो अटैक मोड हैं टॉप अटैक जो डिफॉल्ट है. इसमें मिसाइल ऊपर चढ़कर (लगभग 150 मीटर तक) टैंक के ऊपर से हमला करती है, जहां कवच सबसे पतला होता है.
वॉरहेड की बात करें तो टैंडम-चार्ज HEAT (हाई-एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक) पहली चार्ज विस्फोटक रिएक्टिव आर्मर (ERA) को नष्ट करती है, दूसरी मुख्य कवच को भेदती है. यह 750–800 मिमी या उससे ज्यादा रोल्ड होमोजिनियस आर्मर (RHA) को भेदने में सक्षम मानी जाती है. इसकी सॉफ्ट लॉन्चिंग कम बैकब्लास्ट के कारण इमारतों या बंद जगहों से भी सुरक्षित रूप से दागी जा सकती है.
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इस सिस्टम के कुल वजन की बात करें तो लगभग 22-23 किलो है. इसमें मिसाइल का वजन लगभग 11.8 किलो है. वहीं, जैवलिन एंटी टैंक सिस्टम की लंबाई 1.1 मीटर है जबकि ट्यूब की लंबाई 1.2 मीटर है.
किन देशों में होता है इस्तेमाल?
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- अमेरिका
- यूके
- ऑस्ट्रेलिया
- यूक्रेन
- पोलैंड
- सऊदी अरब
अब भारत भी इस लिस्ट में शामिल होने जा रहा है. हालांकि अभी भारत की ओर से डील पर अंतिम और ऑफिसियली मुहर लगनी बाकी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन-रूस युद्ध के शुरुआती चरण में यह एंटी टैंक सिस्टम रूस के घातक टैंकों के खिलाफ प्रभावी साबित हुआ. अगर ये हथियार भारत की सेना में शामिल होता है तो निश्चिंत रूप से सेना की ताकत में न केवल इजाफा होगा बल्कि दुश्मनों के टैंकों पर कहीं से भी प्रहार किया जा सकेगा.