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LOC पर सेना प्रमुख को मिला सरप्राइज, 20 साल पुराने कश्मीरी दोस्त परवेज से हुई मुलाकात, ऑपरेशन सिंदूर से ये कनेक्शन

यह मुलाकात इसलिए ख़ास थी कि क्योंकि साल 2002 से 2005 के बीच जनरल उपेंद्र द्विवेदी बटालियन के कमांड कर रहे थे, तो सूबेदार परवेज़ अहमद उनकी यूनिट में तैनात थे.

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07 Feb 2026
( Updated: 07 Feb 2026
02:08 PM )
LOC पर सेना प्रमुख को मिला सरप्राइज, 20 साल पुराने कश्मीरी दोस्त परवेज से हुई मुलाकात, ऑपरेशन सिंदूर से ये कनेक्शन
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भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर हैं. यहां वे सेनाधिकारियों के साथ सुरक्षा समीक्षा और बैठकें कर रहे हैं. इसी बीच ऐसा पल भी आया. जब 
आर्मी के अनुशासन और प्रोटोकॉल रिश्तों की गर्माहट से पिघल गए. पुंछ के कामसर गांव का दौरा जनरल द्विवेदी के लिए उस समय खास बन गया जब उनकी मुलाकात अपने 20 साल पुराने दोस्त से हुई. 

पुंछ के कामसर गांव में जनरल उपेंद्र द्विवेदी और 18 जम्मू-कश्मीर राइफल्स के सेवानिवृत्त सूबेदार (मानद कैप्टन) परवेज अहमद की मुलाकात हुई. यह मुलाकात इसलिए ख़ास थी कि क्योंकि साल 2002 से 2005 के बीच जनरल उपेंद्र द्विवेदी बटालियन के कमांड कर रहे थे, तो सूबेदार परवेज़ अहमद उनकी यूनिट में तैनात थे. 

दो दशक पुरानी यादों का मिलन 

आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी और सूबेदार परवेज़ अहमद की मुलाकात कई मायनों में खास थी. जो दो फौलादी फौजियों की वर्दी के पीछे के मानवीय पहलू को दर्शा रही थी. यह दो दशक पुरानी यादों का पुनर्मिलन था. सरहद की रक्षा करते हुए बिताए गए वो साल मानों फिर से जीवंत हो उठे हों. 

सूबेदार परवेज ने ऑपरेशन सिंदूर में निभाई थी अहम भूमिका

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सूबेदार परवेज़ अहमद मार्च 1991 में सेना में भर्ती हुए थे और 25 साल की सर्विस के बाद उन्होंने मार्च 2019 में रिटायरमेंट ले लिया था. हालांकि इसके बाद भी देश सेवा में वह अहम योगदान देते रहे. कहते हैं ना एक सैनिक कभी रिटायर नहीं होता. वैसे ही सूबेदार परवेज अहमद अपनी ड्य़ूटी पर डटे रहे. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान परवेज अहमद ने स्थानीय स्तर पर सेना की जो मदद की, वह मिसाल बन गई. उन्होंने न केवल जवानों तक जरूरी सामान पहुंचाया बल्कि स्थानीय खुफिया जानकारी साझा कर सेना के ऑपरेशनों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके इस योगदान के लिए सेना प्रमुख ने उन्हें ‘वेटरन अचीवर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया. 

गौरतलब है कि सेना के रिटायर्ड अधिकारी और जवान हमेशा सेना की आंख और कान होते हैं साथ ही स्थानीय स्तर पर अपनी भागीदारी निभाते हैं. पिछले कुछ साल में आतंकियों के खिलाफ सफल ऑपरेशनों के पीछे सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल के साथ-साथ तेजी से लोकल इंटेलिजेंस का मिलना है. 

आर्मी चीफ के दौरे की खास बातें 

दो दिन के जम्मू कश्मीर दौरे में पहले दिन थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जम्मू स्थित सेना के व्हाइट नाइट कोर में सुरक्षा हालात और भारतीय सेना की तैनाती की समीक्षा की. नगरोटा में सेना प्रमुख को कमांडरों ने काउंटर टेररिज्म ग्रिड और डिप्लॉयमेंट की विस्तृत जानकारी दी. 

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सेना की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, सेना प्रमुख ने जम्मू में तैनात अन्य सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों से भी मुलाकात की. दूसरे दिन सेना की तैयारियों की समीक्षा के लिए खुद वो ग्राउंड जीरो पर पहुंचे. उन्होंने पुंछ के फॉरवर्ड इलाकों में सेना के जवानों से मुलाकात की. सेना प्रमुख ने जवानों के अच्छे मनोबल और सतर्कता की सराहना की. 

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