क्या सच में रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा भारत? ट्रंप के दावे के बीच मोदी सरकार का प्लान ये है, जानें INSIDE STORY
भारत-अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद तेल और सैन्य व्यापार की पूरी तस्वीर बदल गई है. ट्रंप दावा कर रहे हैं कि भारत रूस से तेल की पूरी तरह बंद कर देगा. क्या सच में ऐसा होगा? अगर नहीं तो इंडिया रसियन ऑयल के साथ क्या करेगा.
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भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर ऐलान हो गया है. वाशिंगटन की ओर से टैरिफ को घटाकर 25% कर दिया गया है. इस संबंध में ट्रंप की पीएम मोदी को कॉल और हुई बातचीत के बाद ऐलान किया गया. पीएम मोदी ने भी टैरिफ घटने को लेकर पुष्टि की. जहां तक ट्रंप की ओर से लगाई गई 25% पेनाल्टी हटाने का सवाल है तो उस पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. वहीं व्हाइट हाउस और खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वो इसे भी हटा देंगे क्योंकि दिल्ली ने रूस से तेल की खरीद को समाप्त करने के लिए हामी भर दी है.
क्या भारत सच में रूस से तेल खरीद बंद कर देगा?
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा, “भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद समाप्त करने के समझौते के तहत रूसी तेल से जुड़ा 25 प्रतिशत टैरिफ हटा लिया जाएगा.” ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या सच में भारत अपने लॉन्ग टर्म पार्टनर और ऑलवेदर फ्रेंड रूस के साथ ऑयल ट्रेड की तिलांजलि दे देगा. क्या सच में भारत, अमेरिका के कहने पर रूस से अपने संबंधों और संप्रभु व्यापारिक और विदेश नीति से पीछे हट जाएगा?
भारत रूसी तेल के साथ क्या करेगा?
आपको बताएं कि भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि रूस के साथ तेल खरीद उसके राष्ट्रीय हित से जुड़ा हुआ मुद्दा है. उसकी अपनी उर्जा जरूरतें हैं और वो इससे समझौता नहीं करेगा. ऐसे में ट्रंप के नए दावे ने नई बहस छेड़ दी है. राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक विस्तृत पोस्ट में कहा कि इस समझौते के तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर लगाए जाने वाले पारस्परिक टैरिफ को तुरंत 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा. ट्रंप ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच “व्यापार और रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने सहित कई विषयों पर चर्चा हुई.”
इस दौरान उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका से, तथा संभवतः वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने पर सहमति जताई है. हालांकि ट्रंप के इस दावे को भारत ने ना फौरी तौर पर खारिज किया है और ना ही उसकी पुष्टि की है. इसको लेकर भारत की तरफ से फिलहाल कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है. विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है.
रूस से तेल आयात जारी रखेगा भारत!
इस दौरान जो विदेश मंत्रालय और सरकारी सूत्रों की मानें तो भारत इस पर फूंक-फूंक कर कदम रखेगा. वो किसी कीमत पर, पूरी तरह रूस के साथ तेल व्यापार को ना खत्म करेगा ना ही शून्य करेगा. हां, वो ये कर सकता है कि इसमें बढ़ोतरी नहीं करेगा. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भारत रूस से खरीदे गए कच्चे तेल को देश में इस्तेमाल करेगा यानी कि इसे घरेलू लेवल पर ही खपा देगा. वहीं अमेरिका या वेनेजुएला से खरीदे गए कच्चे तेल को ही प्रॉसेस करके यूरोप को बेचेगा.
आपको बता दें कि फरवरी 2026 के ताजा घटनाक्रमों मसलन अमेरिका से ट्रेड डील के ऐलान के बाद तेल और सैन्य व्यापार की पूरी तस्वीर बदल सकती है.
1. भारत-रूस (Russia): ट्रेड
2025 के अंत तक रूस भारत का नंबर 1 तेल आपूर्तिकर्ता था, लेकिन फरवरी 2026 में इसमें एक बड़ा मोड़ आया है.
ऑयल ट्रेड (Oil Trade):
नया घटनाक्रम (फरवरी 2026): भारत ने अमेरिका के साथ हुए नए द्विपक्षीय समझौते के तहत रूस से कच्चे तेल के आयात में बड़ी कटौती करने का निर्णय लिया है. इसका उद्देश्य वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन बनाना है.
हिस्सेदारी: 2025 में जो हिस्सेदारी 35% थी, उसके 2026 के मध्य तक गिरकर 20-22% पर आने का अनुमान है.
सैन्य ट्रेड (Military Trade):
S-400 अपडेट: रूस ने वादा किया है कि शेष 2 S-400 मिसाइल रेजिमेंट की डिलीवरी अगस्त 2026 तक पूरी कर ली जाएगी. भारत अब रूस पर निर्भरता कम करते हुए स्वदेशी (Make in India) और पश्चिमी देशों के साथ संयुक्त उपक्रमों पर अधिक ध्यान दे रहा है.
2. भारत-अमेरिका (USA): नया 'सुपर' पार्टनर
फरवरी 2026 में हुए समझौते ने अमेरिका को भारत का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और व्यापारिक साझेदार बना दिया है.
ऐतिहासिक समझौता (Feb 2026): भारत और अमेरिका ने $500 बिलियन से अधिक के ऊर्जा और कृषि सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं.
ऑयल ट्रेड (Oil Trade):
हिस्सेदारी: 2025 के 13% से बढ़कर अमेरिका की तेल हिस्सेदारी 2026 के अंत तक 25% से ऊपर जाने की संभावना है.
टैरिफ में राहत: अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क (Taxes) को 50% से घटाकर 18% कर दिया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है.
सैन्य ट्रेड (Military Trade):
अब ध्यान केवल 'खरीदने' पर नहीं, बल्कि 'सह-उत्पादन' पर है. GE F414 जेट इंजन का भारत में निर्माण इस साल (2026) गति पकड़ चुका है.
3. भारत-वेनेजुएला (Venezuela):
वेनेजुएला अभी भी अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में है. भारत ने बहुत ही सीमित मात्रा में तेल आयात जारी रखा है (कुल आयात का 1%). फरवरी 2026 के समझौते के बाद, भारत अब वेनेजुएला के बजाय अमेरिकी शेल ऑयल और खाड़ी देशों (Middle East) को प्राथमिकता दे रहा है.
ट्रंप के अनुसार, इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने काफी बड़े स्तर पर अमेरिकी उत्पादों को खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है. उन्होंने कहा कि इसमें 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य उत्पादों की खरीद शामिल है.
युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका अपने सहयोगी देशों से रूसी ऊर्जा खरीद कम करने या पूरी तरह समाप्त करने का आग्रह करता रहा है. वहीं, भारत ने घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की थी. भारतीय अधिकारियों का कहना रहा है कि ऊर्जा संबंधी फैसले राष्ट्रीय हित और बाजार परिस्थितियों के आधार पर लिए जाते हैं. भारत ने साथ ही संवाद और कूटनीति के जरिए संघर्ष समाप्त करने की वकालत की है और रूस तथा पश्चिमी देशों- दोनों के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं.
भारत का रूस को लेकर स्टैंड क्लियर रहा है!
भारतीय अधिकारियों का कहना रहा है कि ऊर्जा संबंधी फैसले राष्ट्रीय हित और बाजार परिस्थितियों के आधार पर लिए जाते हैं. भारत ने साथ ही संवाद और कूटनीति के जरिए संघर्ष समाप्त करने की वकालत की है और रूस तथा पश्चिमी देशों- दोनों के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं.
आपको बताएं कि भारत ने अमेरिका की टैरिफ धमकियों के बीच अपने पुराने और हर कसौटी पर खरा उतरने वाले सहयोगी रूस से तेल की खरीद जारी रखी. भारत ने ऑयल ट्रेड पर लगातार कहा कि तेल आपूर्ति संबंधी निर्णय तेल की कीमत, कच्चे तेल की गुणवत्ता, भंडार, रसद और अन्य आर्थिक कारकों पर निर्भर होते हैं.
आपको बता दें कि मार्च 2022 में जब रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल मची थी, तब ब्रेंट क्रूड की कीमत 137 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. इसी समय भारत ने एक रणनीतिक निर्णय लेते हुए रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदना शुरू किया. इससे न सिर्फ भारत को महंगाई से राहत मिली, बल्कि वैश्विक बाजार में भी स्थिरता बनी रही.
भारत ने रूस से तेल खरीदकर किया दुनिया पर एहसान
भारत ने ये भी दलील दी कि रूसी तेल पर कभी कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. अगस्त 2025 में ही छपी NMF News की एक खबर के मुताबिक G7 देशों और यूरोपीय संघ (EU) ने रूस की कमाई को सीमित करने और वैश्विक तेल आपूर्ति को बनाए रखने के लिए एक मूल्य सीमा नीति लागू की थी. इसी के तहत, भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने रूसी कच्चे तेल की खरीद 60 डॉलर प्रति बैरल की अधिकतम सीमा में की. इसके बाद EU ने इस सीमा को घटाकर 47.6 डॉलर प्रति बैरल करने की सिफारिश की है, जिसे सितंबर से लागू हो गया था.
सूत्रों के अनुसार, अगर भारत ने रूसी तेल नहीं खरीदा होता और साथ ही OPEC+ देशों की ओर से 5.86 मिलियन बैरल प्रति दिन की कटौती जारी रहती, तो तेल की कीमतें 137 डॉलर से भी अधिक हो सकती थीं. इससे पूरी दुनिया में महंगाई और ऊर्जा संकट और भी गंभीर हो जाता.
भारत ने केवल अपने हितों की रक्षा नहीं की, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके साथ ही, भारत ने ईरान और वेनेज़ुएला जैसे उन देशों से तेल नहीं खरीदा, जिन पर अमेरिका के वास्तविक प्रतिबंध लागू हैं.
रूस से तेल खरीदने पर भारत का रुख!
वहीं ट्रेड वार के शुरू होने के वक्त बीते अगस्त में रूस के साथ सैन्य और ऑयल खरीद को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ब्रीफिंग में साफ-साफ शब्दों में कहा था कि अलग-अलग देशों के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंध हमारी शर्तों पर आधारित हैं और इसे किसी तीसरे देश के चश्मे से न देखा जाए और न ही इस कारण रिश्ते प्रभावित होने देना चाहिए." ऐसे में अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता है तो ये देश की विदेश नीति में बदलाव, ऐतिहासिक स्टैंड से पीछे हटना और अमेरिकी दबाव में झुकने के समान करार दिया जा सकता है.
विदेश मंत्रालय ने पेश किए थे आंकड़े
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और जहां तक भारत के रूस के साथ तेल व्यापार का संबंध है तो विदेश मंत्रालय ने अगस्त 2025 में आंकड़े पेश किए थे. इसमें बताया गया था कि '2024 में यूरोपीय संघ और रूस के बीच 67.5 अरब यूरो का वस्तु व्यापार हुआ. इसके अलावा साल 2023 में सेवा व्यापार 17.2 अरब यूरो का था. यह भारत और रूस के बीच हुए कुल व्यापार से काफी अधिक था. इसके अलावा यूरोपीय देशों ने 2024 में रूस से रिकॉर्ड 16.5 मिलियन टन तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात की, जो 2022 के 15.21 मिलियन टन के पिछले रिकॉर्ड से अधिक था.'
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