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मोदी सरकार ने बढ़ाया नागरिक सम्मानों का 'मान', सियासी-वैचारिक विरोध के बावजूद इन धुर विरोधियों को दिए पद्म पुरस्कार और भारत रत्न

मोदी सरकार ने अपने 11 सालों के कार्यकाल में पद्म सम्मानों की शोभा बढ़ाई है. असली हकदारों और अपने विरोधियों को भी सम्मानित कर नई लकीर खींची है. सरकार ने सियासी-वैचारिक विरोध के बावजूद इन धुर विरोधियों को पद्म पुरस्कार और भारत रत्न से नवाजा है.

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26 Jan 2026
( Updated: 26 Jan 2026
03:53 AM )
मोदी सरकार ने बढ़ाया नागरिक सम्मानों का 'मान', सियासी-वैचारिक विरोध के बावजूद इन धुर विरोधियों को दिए पद्म पुरस्कार और भारत रत्न
Padma Awards 2025 (Screengrab)
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केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री विजेताओं के नामों की घोषणा की. गृह मंत्रालय द्वारा सूची जारी की गई है, जिसमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार पाने वालों के नाम शामिल हैं. मोदी सरकार ने अपनी पहचान के अनुसार ही अपने सियासी और वैचारिक विरोधियों को सम्मानित करने का फैसला किया है. सरकार की कोशिश रही है कि ये नागरिक सम्मान उन्हें मिलें जो इसके हकदार हैं, चाहे वो गरीब हों या अमीर, कश्मीर के हों या कन्याकुमारी के, या फिर राजनीतिक मुखालफत ही क्यों न करते रहे हों. इसके जरिए सरकार ने सम्मान का भी सम्मान बढ़ाया है.

धुर विरोधियों को भी मिला नागरिक सम्मान

इसी कड़ी में मोदी सरकार ने उन शख्सियतों को भी सम्मानित करने का फैसला किया है, जिनका सार्वजनिक जीवन में लंबा करियर रहा है, भले ही वे किसी दूसरे दल से क्यों न जुड़े हों. मसलन, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन (मरणोपरांत) और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन (मरणोपरांत) को भी सम्मानित करने का फैसला किया गया है.

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आपको बता दें कि वी.एस. अच्युतानंदन न सिर्फ केरल के पूर्व मुख्यमंत्री थे, बल्कि उन्हें देश में वामपंथी आंदोलन के सबसे बड़े चेहरों में से एक माना जाता है और वे देश में लेफ्ट के थिंक टैंक के अगुवा रहे हैं. उन्हें देश का दूसरा सर्वोच्च सम्मान ‘पद्म विभूषण’ देकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि भले ही वे जीवन भर बीजेपी और संघ की विचारधारा के दूसरे छोर पर खड़े रहे हों और लगातार विरोध का झंडा बुलंद करते रहे हों, लेकिन राष्ट्र निर्माण और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता.

वहीं, देश के दिग्गज आदिवासी नेताओं में से एक शिबू सोरेन को भी मरणोपरांत ‘पद्म भूषण’ से नवाजा गया है. वे लगातार बीजेपी विरोधी खेमे का हिस्सा रहे, लेकिन देश में आदिवासी समाज के लिए उनके संघर्ष को देखते हुए उन्हें सम्मान दिया गया है. बीते साल उम्र संबंधी दिक्कतों के कारण उनका निधन हो गया था.

मोदी सरकार ने अपने 11 सालों के कार्यकाल में पद्म सम्मानों की शोभा बढ़ाई है. असली हकदारों और अपने विरोधियों को भी सम्मानित कर नई लकीर खींची है.

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मुलायम सिंह यादव (2023): सपा संस्थापक, कांग्रेस के सहयोगी रहे और बीजेपी-संघ के धुर विरोधी रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व रक्षा मंत्री और बड़े समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत ‘पद्म विभूषण’ सम्मान से नवाजा गया. यादव आजीवन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर आलोचक रहे, हालांकि अपने अंतिम वर्षों में उन्होंने सदन में प्रधानमंत्री की तारीफ भी की थी.

तरुण गोगोई (2021): असम के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता तरुण गोगोई को भी मरणोपरांत ‘पद्म भूषण’ दिया गया.

गुलाम नबी आजाद (2022): कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद को भी ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया.

शरद पवार (2017): एनसीपी प्रमुख शरद पवार को ‘पद्म विभूषण’ दिया गया.

पी.ए. संगमा (2017): पूर्वोत्तर के दिग्गज नेता और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी.ए. संगमा को मरणोपरांत सम्मान मिला.

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इतना ही नहीं, नागालैंड के पूर्व मुख्यमंत्री एस.सी. जमीर, कांग्रेस नेता तोखेहो सेमा, पीडीपी नेता मुजफ्फर बेग और अकाली दल के तरलोचन सिंह जैसे नाम भी शामिल हैं, जिन्हें मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में सम्मानित किया है, जिससे इस सम्मान की स्वीकार्यता बढ़ी है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और बड़े वामपंथी नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य को भी पद्म भूषण देने की घोषणा की गई थी, हालांकि उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया था.

दलगत राजनीति से ऊपर उठकर दिया गया नागरिक सम्मान

पद्म पुरस्कारों के अलावा देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ के मामले में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है. मोदी सरकार ने दलगत और वैचारिक विरोध की राजनीति से ऊपर उठकर फैसले लिए हैं. 2014 से अब तक 10 महान हस्तियों को भारत रत्न दिया गया है, जिनका राजनीति और समाज के विभिन्न क्षेत्रों से वास्ता रहा है. आपको बता दें कि सरकार द्वारा दिए गए भारत रत्न लगभग निर्विवाद रहे हैं.

प्रणब मुखर्जी, कांग्रेस (भारत रत्न)

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2019 में आजीवन कांग्रेसी रहे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न दिया गया. उनके साथ संघ विचारक और समाज सुधारक नानाजी देशमुख और पूर्वोत्तर के दिग्गज गायक और सांस्कृतिक प्रतीक भूपेन हजारिका को भी भारत रत्न से नवाजा गया.

2024 में एक साथ 5 भारत रत्न का ऐलान

इसके अलावा 2024 में एक ही साल में 5 भारत रत्न की घोषणा हुई. इनमें बिहार के बड़े समाजवादी और पिछड़ों के नेता कर्पूरी ठाकुर, पूर्व प्रधानमंत्री और किसान नेता चौधरी चरण सिंह और सबसे चौंकाने वाला नाम कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव शामिल हैं, जिन्हें देश में आर्थिक उदारीकरण का श्रेय दिया जाता है. इनके साथ ही बीजेपी के पितामह लाल कृष्ण आडवाणी और कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को भी यह सम्मान मिला. इससे यह साबित हुआ कि सरकार इसकी व्यापकता को स्वीकार कर रही है.

पद्म सम्मान की बढ़ी स्वीकार्यता

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इस बार के पद्म सम्मान एक बड़ी कहानी कहते हैं. वे बताते हैं कि चुनावी राजनीति में भले ही कड़वाहट और प्रतिस्पर्धा चरम पर हो, लेकिन मोदी सरकार के तहत नागरिक सम्मानों ने समावेशिता और ऐतिहासिक स्वीकार्यता का परिचय दिया है.

सार्वजनिक क्षेत्र में पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री पाने वाली हस्तियों के नाम :-

पद्म विभूषण पाने वाली हस्तियों के नाम :-

के.टी. थॉमस - सार्वजनिक क्षेत्र - केरल

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वी.एस. अच्युतानंदन (मरणोपरांत) - सार्वजनिक क्षेत्र - केरल

पद्म भूषण पाने वाली हस्तियों के नाम :-

भगत सिंह कोश्यारी - सार्वजनिक क्षेत्र - उत्तराखंड

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शिबू सोरेन (मरणोपरांत) - सार्वजनिक क्षेत्र - झारखंड

वी.के. मल्होत्रा (मरणोपरांत) - सार्वजनिक क्षेत्र - दिल्ली

वेल्लापल्ली नटेसन - सार्वजनिक क्षेत्र - केरल

पद्मश्री पाने वाली हस्तियों के नाम :-

कबिंद्र पुरकायस्थ (मरणोपरांत) - सार्वजनिक क्षेत्र - असम

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इसके साथ ही सामाजिक कार्य क्षेत्र से जुड़े एस.के.एम. माइलानंदन को पद्म भूषण और 12 अन्य लोगों को पद्मश्री दिया गया है.

यहां देखें सामाजिक क्षेत्रों में काम करने वाले पद्म भूषण और पद्मश्री

पद्म भूषण पाने वाली हस्तियों के नाम :-

एस.के.एम. माइलानंदन - सामाजिक कार्य - तमिलनाडु

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पद्मश्री पाने वाली हस्तियों के नाम :-

अंक गौड़ा एम. - सामाजिक कार्य - कर्नाटक

बृज लाल भट्ट - सामाजिक कार्य - जम्मू और कश्मीर

डॉ. बुधरी टाटी - सामाजिक कार्य - छत्तीसगढ़

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हैली वार - सामाजिक कार्य - मेघालय

इंदरजीत सिंह सिद्धू - सामाजिक कार्य - चंडीगढ़

जनार्दन बापूराव बोथे - सामाजिक कार्य - महाराष्ट्र

कोल्लाकल देवकी अम्मा जी - सामाजिक कार्य - केरल

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मोहन नागर - सामाजिक कार्य - मध्य प्रदेश

निलेश विनोदचंद्र मंडलेवाला - सामाजिक कार्य - गुजरात

एस.जी. सुशीला अम्मा - सामाजिक कार्य - कर्नाटक

स्वामी ब्रह्मदेव जी महाराज - सामाजिक कार्य - राजस्थान

टेची गुबिन - सामाजिक कार्य - अरुणाचल प्रदेश

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इसके साथ ही तीन हस्तियों को कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री के लिए चयनित किया गया है. इसमें महाराष्ट्र के श्रीयंग देवाबा लाड, उत्तर प्रदेश के रघुपत सिंह और असम के जोगेश देउरी का नाम शामिल है.

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