सेना ने कर ली दुश्मनों की नींद उड़ाने की बड़ी तैयारी... 100 से ज्यादा राफेल खरीदेगा भारत, जानें कब होगी डील
रक्षा बजट में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी के बाद भारतीय वायुसेना 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पर चर्चा कर रही है. प्रस्ताव को रक्षा खरीद बोर्ड से शुरुआती मंजूरी मिल चुकी है और इसे वायुसेना की ऑपरेशनल जरूरतों के लिए अहम माना जा रहा है.
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भारतीय वायुसेना अब अपने बेड़े को और भी मजबूत बनाने की तैयारी में जुट गई है. हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. यह पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत अधिक है और मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद रक्षा बजट में लगातार बढ़ोतरी का हिस्सा है. इस बढ़ोतरी के साथ ही भारतीय वायुसेना अब 100 से ज्यादा राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पर गंभीर चर्चा करने जा रही है.
बड़ी डील का हो सकता है ऐलान
सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायुसेना 114 राफेल लड़ाकू विमानों के प्रस्ताव पर चर्चा कर सकती है, जिसकी अनुमानित लागत 3.25 लाख करोड़ रुपये है. यह बैठक फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 18 फरवरी को दिल्ली आने से पहले हो सकती है. रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह डील क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और वायुसेना की ऑपरेशनल जरूरतों को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण है. रक्षा खरीद बोर्ड ने भी इस प्रस्ताव को पहले ही प्रारंभिक मंजूरी दे दी है.
सेना की वर्तमान स्थिति
भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में लगभग 30 लड़ाकू विमान स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है. पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ सीमा पर तल्ख रिश्तों और चीन-पाकिस्तान गठजोड़ के चलते खतरे की आशंका बढ़ गई है. इस नई डील के बाद भारतीय वायुसेना के पास लंबे समय तक 4.5-जेनरेशन-प्लस मल्टीरोल लड़ाकू विमान की जरूरत पूरी होगी. डील के तहत 114 राफेल विमानों में से लगभग 80 प्रतिशत भारत में निर्मित किए जाएंगे. इनमें 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर विमान शामिल होंगे, जिनका निर्माण डसॉल्ट और भारतीय निजी कंपनियों के सहयोग से होगा. डील पूरी होने पर वायुसेना के पास कुल 150 राफेल होंगे, जबकि भारतीय नौसेना के लिए 26 एयरक्राफ्ट कैरियर-कंपैटिबल राफेल विमान मिलेंगे.
रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
जानकारी देते चलें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि यह पहली बार है जब रक्षा बजट में रिकॉर्ड 1.03 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है. पिछले साल केवल नौ प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. हालांकि, रक्षा बजट अब भी जीडीपी का केवल दो प्रतिशत है, जो चीन के मुकाबले समान है, लेकिन चीन की कुल जीडीपी आकार में बड़ी है. जानकारों का मानना है कि यह बढ़ोतरी और नए राफेल विमानों की डील भारतीय वायुसेना को क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के लिए सक्षम बनाने के साथ ही भारत की हवाई ताकत को नई ऊँचाई पर ले जाएगी. यह कदम सीमा पर सुरक्षा सुनिश्चित करने और पड़ोसी देशों के बढ़ते दबाव के बीच भारत की रणनीतिक मजबूती को भी दिखाता है.
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बताते चलें कि कि रक्षा मंत्रालय के इस प्लान को देखते हुए कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि रक्षा बजट में हुई यह बड़ी बढ़ोतरी और राफेल विमानों की प्रस्तावित डील भारत की सुरक्षा नीति में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है. इससे न सिर्फ भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता मजबूत होगी, बल्कि बदलते क्षेत्रीय हालात में देश की रणनीतिक तैयारी को भी नई मजबूती मिलेगी. आने वाले समय में यह फैसला भारत की हवाई शक्ति की दिशा और दशा दोनों तय करने वाला साबित हो सकता है.
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