‘इस Shaadi.com का क्या करें’ सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तलाक का केस, जज ने मैट्रिमोनियल साइट पर क्यों पीटा माथा?
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मैट्रिमोनियल साइट Shaadi.com के फाउंडर अनुपम मित्तल पर कानूनी कार्रवाई से बड़ी राहत दी थी. अब उन्होंने इस प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाली शादियों पर चिंता जताई है.
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जब बात शादी की आती है तो बड़े बूढ़े एक बात जरूर कहते हैं, जोड़ियां तो ऊपर से बनकर आती हैं. बस जमीन पर हम इन्हें आपस में मिलाते हैं, लेकिन जमाना डिजिटल हो चुका है तो अब मेट्रिमॉनियल साइट पर भी रिश्ते तय हो रहे हैं, लेकिन ये साइट कितनी विश्वसनीय हैं ये सवाल हमेशा बना रहा है. अब सुप्रीम कोर्ट के जज ने भी मेट्रिमॉनियल प्लेटफॉर्म शादी.कॉम (Shaadi.com) पर चिंता जताते हुए अहम टिप्पणी की है.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में तलाक के एक मामले पर सुनवाई हो रही थी. कोर्ट में बताया गया कि पति-पत्नी के बीच अब सुलह की कोई गुंजाइश नहीं बची. दोनों के रिश्ते इस कदर बिगड़ चुके हैं कि पति ने दो साल से पत्नी को देखा भी नहीं. इस दौरान मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस जेबी पारदीवाला ने दोनों से रिश्तों के जुड़ने का माध्यम पूछा. जिसमें बताया गया कि दोनों शादी.कॉम के जरिए एक दूसरे से मिले थे.
मेट्रिमॉनियल प्लेटफॉर्म के टिकाऊपन पर उठाए सवाल
जब जस्टिस जेबी पारदीवाला ने इस शादी का जरिया बने प्लेटफॉर्म Shaadi.com पर सवाल उठाए. उन्होंने चौंकते हुए कपल से कहा, शादी डॉट कॉम? आप शादी डॉट कॉम पर मिले थे? इस शादी डॉट कॉम का हम क्या करें?
जस्टिस पारदीवाला ने सीधे तो नहीं लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से ऑनलाइन मैट्रिमोनियल साइट पर शादियों की विश्वसनीयता और टिकने की अवधि को हाईलाइट किया. साथ ही साथ साफ किया कि पति-पत्नी के बीच होने वाले विवादों में मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी कितनी बनती है इस पर भी ध्यान दिलाया. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कपल को एक बार फिर सुलह की कोशिश करने को कहा. दोनों के तलाक पर जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कोई फैसला नहीं सुनाया. कोर्ट ने कपल से कहा कि तलाक अंतिम विकल्प होना चाहिए.
फाउंडर पर लटकी थी कानूनी कार्रवाई की तलवार
सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी ऐसे समय में आई जब शादी.कॉम के फाउंडर अनुपम मित्तल के खिलाफ तेलंगाना हाई कोर्ट ने कानूनी कार्रवाई का आदेश दिया था, हालांकि सुप्रीम कोर्ट से अनुपम मित्तल को राहत मिल गई.
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3 फरवरी को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अनुपम मित्तल को 8 हफ्ते की अंतरिम सुरक्षा दी. कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मित्तल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इंकार किया गया था. शीर्ष अदालत में दो जजों की बेंच जस्टिस पी के मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजानिया की हाई कोर्ट को दोबारा मामला पर विचार करने को कहा. जिसमें यह भी सुनिश्चित करने को कहा, यह जांच जरूरी है कि यूजर्स आपस में धोखाधड़ी करते हैं, तो मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी कितनी बनती है.
क्या था मामला?
दरअसल, हैदराबाद की एक महिला ने शादी.कॉम के जरिए धोखाधड़ी का आरोप लगाया था. महिला का कहना था कि शादी डॉट कॉम के जरिए एक शख्स से उसकी मुलाकात हुई थी. जिसने फर्जी प्रोफाइल बनाकर महिला के साथ 11 लाख की धोखाधड़ी की. महिला का आरोप था कि शादी.कॉम प्लेटफॉर्म ने यूजर की प्रोफाइल को सही से वेरिफाई नहीं किया. महिला ने सिक्योरिटी पॉलिसी पर सवाल उठाए.
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इस मामले को लेकर कोर्ट में अनुपम मित्तल की ओर से भी दलील रखी गई. जिसमें कहा गया कि डॉट कॉम केवल एक मैचमेकिंग प्लेटफॉर्म है. यूजर्स के बीच बाद में होने वाली बातचीत, खासकर जब वह व्हाट्सऐप जैसे निजी प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो जाती है, उसके लिए साइट को जिम्मेदार या दोषी नहीं ठहराया जा सकता.
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