3 दिन, 60 घंटे...पाकिस्तान में अचानक बढ़ी मिलिट्री एक्टिविटी, धड़ाधड़ उतरे तुर्की के सैन्य विमान, क्या प्लानिंग?
तीन दिन, 60 घंटे और ताबड़तोड़ ड्रोन और सैन्य विमानों की आवाजाही…पाकिस्तान में 19 अगस्त से 21 अगस्त के बीच भारी संख्या में तुर्की और चीन के विमान उतरे हैं. इसके बाद अटकलों का बाज़ार गर्म हो गया है कि क्या फिर कुछ बड़ा होने वाला है?
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पाकिस्तान में पिछले कुछ दिनों से बहुत कुछ घटित हो रहा है. Flight Radar 24 की डेटा के मुताबिक बीते दिनों पाकिस्तानी एयरस्पेस में चीनी फ्लाइट्स, मिलिट्री प्लेन के साथ-साथ तुर्की के ड्रोन भी देखे गए. यानी कि 72 घंटों में भारी मात्रा में सैन्य विमानों की आवाजाही और हलचल तेज हो गई है.
3 दिन में कई बार पाकिस्तान में उतरे तुर्की के सैन्य विमान!
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक़ 19 अगस्त से 21 अगस्त के बीच महज़ 60 घंटे के अंदर तुर्की एयरफोर्स के C-130 हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट विमानों ने कई बार तुर्की और पाकिस्तान के बीच उड़ानें भरीं, जिससे मिलिट्री सर्कल्स में अटकलों का बाज़ार गर्म हो गया है.
रिपोर्ट्स की मानें तो ये विमान उसी जगह उतरे जिसे भारत के ब्रह्मोस मिसाइलों ने हिट किया था. ये कोई और जगह नहीं बल्कि नूर खान एयरबेस है, जहां बीते कुछ दिनों से चीनी और तुर्की के मिलिट्री प्लेन उतरे.
खास बात यह रही कि ये विमान पाकिस्तान के दो अहम एयरबेस- रावलपिंडी के पास नूर खान एयरबेस और कराची के मसूर एयरबेस पर आते-जाते देखे गए. खुफिया इनपुट के मुताबिक, तीन दिनों में हुई इस लगातार आवाजाही का पैटर्न सामान्य नहीं था. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि तुर्की के मिलिट्री ट्रांसपोर्ट प्लेन बार-बार पाकिस्तान के चक्कर क्यों लगा रहे थे?
नूर खान एयरबेस और मसूर एयरबेस पर अचानक बढ़ी सैन्य गतिविधि!
वहीं न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक़ इन विमानों के पाकिस्तान के दो अहम एयरबेस-रावलपिंडी के पास नूर खान एयरबेस और कराची के मसूर एयरबेस पर लगातार मूवमेंट हुए. खुफिया सूत्रों की मानें तो इन विमानों की आवाजाही को सामान्य नहीं कहा जा सकता बल्कि इसका पैटर्न लीक से हटकर था, जैसा कि युद्ध के वक्त मिलिट्री मोबेलाइजेशन के वक्त होता है.
पाकिस्तान के चक्कर क्यों लगा रहे तुर्की के सैन्य विमान?
सवाल ये उठता है कि आख़िर तुर्की के मिलिट्री ट्रांसपोर्ट पाकिस्तान के चक्कर क्यों लगा रहे हैं, वो भी तब जब पीओजेके में प्रदर्शन चल रहा है, केपीके में पीटीआई के लॉन्ग मार्च की प्लानिंग है, बीएलए लगातार पाकिस्तानी फौज को पछाड़ रहा है, वहीं सीमा पार टीटीपी-तालिबान हुकूमत भी पाकिस्तान पर लगातार चढ़ाई कर रही है.
ऑपरेशन सिंदूर में भारत के हाथो पिटने वाला पाकिस्तान ईरान की तरह लगातार ड्रोन्स के ऑर्डर दे रहा है. उसमें ख़ुद से मिसाइल बनाने की हैसियत नहीं है. उसने ईरान-अमेरिका जंग में ड्रोन की अहमियत देखी है, ऐसे में वो अब लगातार ड्रोन स्क्वैड्रैन को बढ़ाना चाह रहा है. ऐसे में शक हो रहा है कि तुर्की से एक बार फिर बड़े पैमाने पर ड्रोन की बड़ी खेप पहुंचाई गई है. बीते साल भी सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की ओर से जो स्वैम ड्रोन अटैक हुआ था वो भी तुर्की की ओर से मुहैया कराया गया था.
पाकिस्तान के पास ड्रोन खरीदने का अचानक कहां से आ गया पैसा?
ऐसे में सऊदी के साथ हाल ही में हुए म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (MDA) के तहत द्विपक्षीय रक्षा समझौते और तुर्की-पाकिस्तान-सऊदी के बीच मक्का समझौते के बाद पाकिस्तान ने अपनी ड्रोन क्षमता को तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया गया है. कहा जा रहा है कि इसके लिए फंडिंग भी सऊदी अरब ही कर रहा है. जैसा कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के लिए भी सऊदी अरब ने कथित तौर पर पैसे दिए. ऐसे में सऊदी से पैसा मिलने के बाद नए ड्रोन, लॉन्ग-एंड्योरेंस UAV और लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम हासिल करने की प्रक्रिया चल रही है.
सूत्र ये भी बताते हैं कि इन सैन्य विमानों के जरिए पाकिस्तान में बड़ी संख्या में ड्रोन और उनसे जुड़े इक्विपमेंट्स की सप्लाई की गई है. ख़बर के मुताबिक पाकिस्तान को HQ सीरीज का एयर डिफेंस सिस्टम भी संभवतः दिया गया है. हालांकि, पाकिस्तान को इस दौरान क्या दिया गया इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है.
तुर्की ने पाकिस्तान को क्या दिया है?
इंडिया टुडे के मुताबिक़ पाकिस्तान को लेटेस्टे डिलिवरी में मीडियम एल्टीट्यूड और लॉन्ग एंड्योरेंस वाला टैक्टिकल ड्रोन Bayraktar TB2 भी दिया गया है. इसका इस्तेमाल निगरानी और हमला करने वाले अभियानों में किया जाता है.
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पाकिस्तान में आर्थिक तंगी का आलम है. यूएई ने अपने 3 बिलियन डॉलर पाकिस्तान से माँग लिए तो उसे चुकाने में पाकिस्तान को पसीना आ गया. उसकी भरपाई के लिए उसे सऊदी अरब के आगे भीख का कटोरा लेकर जाना पड़ा था और फिर पैसा लेने के बाद यूएई को वापस किया गया. ऐसे में महंगाई, कैश क्रंच से जूझ रहे, IMF के पास गिरवी पड़े मुल्क पाकिस्तान के लिए इस लेवल पर अपनी मिलिट्री को फंडिंग करना कैसे कर सकता है.
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ऐसे में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की भूमिका भी बताई जा रही है. पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलों के बावजूद इन रक्षा जरूरतों को उन्होंने सऊदी-तुर्की और दूसरे इस्लामी मुल्कों से अपने हित को जोड़कर इसे पूरा किया है. इस घटनाक्रम के बाद भारत में भी मिलिट्री और खुफिया अधिकारी इस पूरे मामले पर नज़र बनाए हुए हैं. भारत लगातार पूरी डेवलपमेंट को क़रीब से समझ रहा है.