114 राफेल, 6 P-8I एयरक्राफ्ट... भारत के रक्षा मंत्रालय ने बड़ी डिफेंस डील को दी मंजूरी, अब डबल होगी एयरफोर्स और नेवी की ताकत

Rafale Deal: भारत की सैन्य ताकत में बड़ा इजाफा होने जा रहा है. रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त P-8I टोही विमान की खरीद को भी हरी झंडी मिली है.

114 राफेल, 6 P-8I एयरक्राफ्ट... भारत के रक्षा मंत्रालय ने बड़ी डिफेंस डील को दी मंजूरी, अब डबल होगी एयरफोर्स और नेवी की ताकत
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Rafale Deal: भारत की सैन्य शक्ति में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होने जा रही है. रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त P-8I समुद्री टोही विमान खरीदने का रास्ता भी साफ हो गया है. यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की भारत यात्रा प्रस्तावित है. इससे दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.

दरअसल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल की बैठक में इस मेगा डील पर सहमति बनी. अब इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है. करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की यह डील भारत के इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा खरीद मानी जा रही है.

एयरफोर्स की जरूरत क्यों थी इतनी बड़ी खरीद

भारतीय वायुसेना के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्क्वाड्रन की कमी है. वर्तमान में वायुसेना के पास लगभग 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत आवश्यकता 42 स्क्वाड्रन की है. पुराने मिग और जगुआर जैसे विमान धीरे-धीरे सेवा से बाहर हो रहे हैं. ऐसे में आधुनिक और बहु-भूमिका निभाने वाले लड़ाकू विमानों की तत्काल जरूरत थी. 114 राफेल विमानों की यह डील इसी कमी को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम है. जानकारी के अनुसार 18 विमान सीधे तैयार हालत में फ्रांस से आएंगे. बाकी 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे. इनका निर्माण फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation और भारत की Tata Advanced Systems Limited के सहयोग से होगा. इससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूती मिलेगी और रक्षा क्षेत्र में हजारों रोजगार के अवसर बनेंगे.

कैसी है राफेल की ताकत?

राफेल एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है. यानी यह हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्र में लक्ष्य भेदने की क्षमता रखता है. यह विमान अत्याधुनिक रडार, स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस है. राफेल से दागी जाने वाली स्कैल्प मिसाइल 250 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक हमला कर सकती है. इसके अलावा मेटियोर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल इसे दुश्मन के विमान के लिए बेहद खतरनाक बनाती है. हैमर हथियार प्रणाली इसे हर मौसम में सटीक बमबारी की क्षमता देती है. भारतीय वायुसेना के बेड़े में पहले से 36 राफेल शामिल हैं, जो दो स्क्वाड्रनों में तैनात हैं. दिसंबर 2024 में अंतिम ‘सी’ वेरिएंट की डिलीवरी पूरी हुई थी. पिछले वर्ष मई में पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में राफेल विमानों ने अपनी सटीक मारक क्षमता का प्रदर्शन किया था. पाकिस्तान के ठिकानों पर सटीक हमलों ने दुनिया को इस विमान की ताकत का एहसास कराया.

P-8I से समुद्र में बढ़ेगी नजर

वायुसेना के साथ-साथ नौसेना को भी बड़ी मजबूती मिलने जा रही है. अमेरिकी कंपनी Boeing द्वारा निर्मित पी-8आई पॉसिडॉन विमान समुद्री निगरानी में माहिर हैं. भारतीय नौसेना के पास पहले से 12 पी-8आई हैं. अब 6 और जुड़ने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. ये विमान दुश्मन की पनडुब्बियों, युद्धपोतों और संदिग्ध गतिविधियों को दूर से पहचान सकते हैं. ऐसे समय में जब हिंद महासागर में चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं, यह खरीद सामरिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है.

फ्रांस के साथ गहराता रणनीतिक संबंध

यह सौदा सरकार-से-सरकार यानी गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट मॉडल पर आधारित है. इसी मॉडल के तहत 2016 में 36 राफेल की डील साइन हुई थी. इस व्यवस्था से पारदर्शिता और समयबद्ध डिलीवरी सुनिश्चित होती है. 114 नए राफेल शामिल होने के बाद वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या बढ़कर करीब 35 से 36 तक पहुंच सकती है. इससे उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर भारत की सामरिक स्थिति मजबूत होगी. चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के खिलाफ संतुलन बनाने में यह डील निर्णायक साबित हो सकती है.

भविष्य की सुरक्षा का मजबूत आधार

राफेल और पी-8आई की यह संयुक्त खरीद केवल एक रक्षा सौदा नहीं है. यह आने वाले दशकों की सुरक्षा रणनीति की नींव है. स्वदेश में उत्पादन से तकनीकी हस्तांतरण होगा. भारतीय कंपनियां अत्याधुनिक एयरोस्पेस तकनीक से जुड़ेंगी. जानकार मानते हैं कि यह कदम भारत को आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण की दिशा में तेज गति देगा. नई तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक हथियारों के साथ भारतीय सशस्त्र बल भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होंगे.

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बताते चलें कि 114 राफेल और 6 अतिरिक्त पी-8आई की मंजूरी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहता. यह फैसला केवल आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाले कल की सुरक्षा का भरोसा है. देश की वायु और समुद्री शक्ति में यह इजाफा भारत को वैश्विक मंच पर और मजबूत बनाएगा.

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