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मोदी सरकार ने की चीन-पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाली नियुक्ति, NSA डोभाल के राइट हैंड बनाए गए लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाले तत्कालीन DGMO और मौजूदा डिप्टी आर्मी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को NSA डोभाल के मातहत काम करने वाले NSCS में मिलिट्री एडवाइजर नियुक्त किया गया. इस नियुक्ति से पाक-चीन की नींद पक्के तौर पर उड़ सकती है.

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13 Jun 2026
( Updated: 13 Jun 2026
11:42 AM )
मोदी सरकार ने की चीन-पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाली नियुक्ति, NSA डोभाल के राइट हैंड बनाए गए लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई
Ajit Dobhal/ Rajeev Ghai/ Image: IANS
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मौजूदा सैन्य इतिहास और मॉडर्न वॉरफेयर के सबसे उत्कृष्ट उदाहरणों में से एक ऑपरेशन सिंदूर की कमान संभाने वाले भारत के तत्कालीन DGMO और वर्तमान में डिप्टी आर्मी चीफ  लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई और मोदी सरकार के जेम्स बॉन्ड कहे जाने वाले NSA अजित डोभाल की जोड़ी पाकिस्तान और चीन की नींद उड़ाने वाली है. जी हां, ख़बर है ही कुछ ऐसी ही. दरअसल लेफ्टिनेंट जनरल घई को मोदी सरकार ने एक और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. उन्हें NSA अजित डोभाल का दायां हाथ बनाया गया है. यानी कि डिप्‍टी आर्मी चीफ ले. जनरल राजीव घई को अजित डोभाल के अंतर्गत काम करने वाले राष्‍ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) का मिलिट्री एडवाइजर बनाया गया है. ये नियुक्ति अपने आप में इसलिए खास है कि किसी सर्विंग डिप्टी आर्मी चीफ, सैन्य जनरल और जिसका कार्यकाल एक साल से भी ज्यादा बचा हो, उसे इस अहम पद के लिए चुना गया है.

राजीव घई को बनाया गया NSA डोभाल का राइट हैंड

आपको बताएं कि लेफ्टिनेंट जनरल घई की प्रोफेशनलिज्म, मिलिट्री स्ट्रैटेजी, जज्बे और विरोधी पर भारी पड़ने वाले करिश्मे की पूरी दुनिया उस वक्त कायल हो गई थी, जब उन्होंने ना सिर्फ पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य अभियान का नेतृत्व किया था, बल्कि मीडिया, कम्युनिकेशन, टैक्टिस, और इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर में भी पाकिस्तान को उठने का मौका तक नहीं दिया था. उन्होंने हर दिन पाकिस्तान के अंदर की गई कार्रवाई का सबूत दुनिया के सामने रखा बल्कि पाकिस्तान को प्रोपेगेंडा करने का मौका तक नहीं दिया. वो जनरल घई ही थे जिनके सामने पाकिस्तानी डायरेक्‍टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन (DGMO) ने घुटने टेकने और सीजफायर की गुहार लगाई थी और उन्हें ही पहला फोन किया था.

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लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई बने NSCS में सैन्य सलाहकार

आपको बता दें कि भारतीय सेना के उप प्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के तौर पर इस नियुक्ति के साथ ही देश के पहले सेवारत वरिष्ठ सैन्य अधिकारी बन गए हैं. उनकी नियुक्ति को देश के राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई इससे पहले सैन्य संचालन महानिदेशक के पद पर कार्य कर चुके हैं.  राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के नेतृत्व में काम करने वाले NSCS में उनकी नियुक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र में सैन्य विशेषज्ञता को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. 

CDS एनएस राजा सुब्रमणी का स्थान लेंगे लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई

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उन्होंने इस पद पर जनरल एनएस राजा सुब्रमणी का स्थान लिया है. राजा सुब्रमणि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार रहने के बाद हाल ही में देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किए गए हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार का पद रक्षा और सुरक्षा मामलों में सरकार को रणनीतिक सलाह प्रदान करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. यह पद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को सैन्य मामलों से संबंधित विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराता है. विशेषज्ञों का मानना है कि लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश सैन्य आधुनिकीकरण, संयुक्त सैन्य संरचना और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. सक्रिय सेवा में रहते हुए उनके व्यापक परिचालन और रणनीतिक अनुभव का लाभ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को मिलेगा. 

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने संभाली थी ऑपरेशन सिंदूर की कमान

गौरतलब है कि पहलगाम अटैक के बाद भारत की तरफ से ऑपरेशन सिंदूर लॉन्‍च कर पाकिस्‍तान में मौजूद आतंकी ठिकानों के साथ ही पड़ोसी देश के एयरबेस को भी निशाना बनाया गया था. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. तब वह भारतीय सेना के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन थे. सेना द्वारा ऑपरेशन सिंदूर को सफलतापूर्वक अंजाम देने के बाद उन्हें सेना में नई जिम्मेदारी मिली. भारतीय सशस्त्र बलों के सफल अभियान के बाद उन्हें डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (रणनीति) के पद पर पदोन्नत किया गया था. 

मिलिट्री स्ट्रैटेजी के महारथी माने जाते हैं लेफ्टिनेंट जनरल घई

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को उनकी स्ट्रैटेजिक सोच, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और मिलिट्री डिप्लोमेसी में संतुलित दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है. ऑपरेशन सिंदूर पर दिए गए उनके कई भाषण और प्रेस कॉन्फ्रेंस काफी चर्चित रहे, जहां उन्होंने पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब किया और भारत की सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया था. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी डीजीएमओ ने राजीव घई से संपर्क कर सीजफायर की गुहार लगाई थी.

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लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ऑपरेशन सिंदूर के वक्त DGMO थे

राजीव घई की जम्मू-कश्मीर में लंबे समय तक काउंटर-इंसर्जेंसी और हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन्स में सक्रिय भूमिका रही. उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले जैसे मामलों में भी महत्वपूर्ण खुलासे किए थे. भारतीय सेना में सेवा के दौरान उन्होंने कई बड़े ऑपरेशन को लीड किया है. डीजीएमओ बनने से पहले वह चिनार कोर के जीओसी रह चुके हैं. खासकर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ कई मिशन में राजीव घई की अहम भूमिका रही है.

उग्रवाद से निपटने का अनुभव रखने वाले लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई पहले उधमपुर स्थित उत्तरी कमान में मेजर जनरल स्टाफ के रूप में तैनात थे. कश्मीर और जम्मू संभागों में सेवा देने के अलावा, लेफ्टिनेंट जनरल घई ने पूर्वोत्तर में 56 इन्फैंट्री डिवीजन जीओसी के रूप में कार्य किया है.

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को बीते साथ किया गया था प्रमोट

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आपको बता दें कि डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल घई को बीते साल 9 जून को प्रोमोट कर भारतीय सेना का उप सेना प्रमुख नियुक्त किया गया था. बतौर उप सेना प्रमुख वह रणनीति मामलों को देखेंगे. उप सेना प्रमुख बनने के बावजूद लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई पूर्व की भांति डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन यानी डीजीएमओ का कार्यभार भी संभाल रहे हैं.

आपको बता दें कि, भारतीय सेना में यह एक महत्वपूर्ण पद है. सेना के सभी ऑपरेशनल कार्यक्षेत्र, उप सेना प्रमुख (रणनीति) के कार्यालय को रिपोर्ट करते हैं. वहीं, भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य स्तर पर होने वाली बातचीत का नेतृत्व डीजीएमओ द्वारा किया जाता है. 

पाकिस्तानी सेना के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस ने भारतीय डीजीएमओ से संपर्क किया. दोनों के बीच यह वार्ता हॉटलाइन पर हुई थी. बीते महीने हुई इस वार्ता में पाकिस्तान ने कहा था कि वह सीमा पार से एक भी गोली नहीं चलाएगा. वार्ता में कहा गया कि दोनों पक्षों को एक भी गोली नहीं चलानी चाहिए. एक-दूसरे के खिलाफ कोई आक्रामक और शत्रुतापूर्ण कार्रवाई शुरू नहीं करनी चाहिए. 

ये भी पढ़ें: भारतीय सेना की प्रेस ब्रीफिंग में हुआ विराट कोहली का जिक्र, DGMO ने क्रिकेटिंग एंगल के जरिए पाकिस्तान को दिया सख़्त संदेश

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ये भी पढ़ें: आखिर कैसे हुआ भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर, DGMO के बीच क्या हुई बातचीत?

देश के अगले CDS हो सकते हैं लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई

सेना के मुताबिक, इस बात पर सहमति हुई कि दोनों पक्ष यानी भारत और पाकिस्तान सीमाओं और अग्रिम क्षेत्रों से सैनिकों की संख्या में कमी सुनिश्चित करने के लिए तत्काल उपायों पर विचार करें. भारत व पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच हुई अन्य बातचीत की पूरी जानकारी रक्षा मंत्री को दी गई थी. इससे स्पष्ट है कि भारतीय सेना में डीजीएमओ एक बेहद अहम पद है. वर्तमान में भारतीय सेना के डीजीएमओ यानी लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई इस पद पर बने रहेंगे. वह महत्वपूर्ण विषयों पर थलसेना प्रमुख को सीधे रिपोर्ट करते हैं. इसके साथ ही, डीजीएमओ सेना, नौसेना तथा वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. 

वहीं अब उनकी NCS में नियुक्ति से भारत की चीन और पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य रणनीति को और मजबूती मिलेगी और समन्वयता बढ़ेगी. इतना ही नहीं, जनरल घई की प्रोफाइल को देख कर कहा जा रहा है कि उन्हें आने वाले समय में देश का CDS भी नियुक्त किया जा सकता है. 

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