जिस यूरेनियम के लिए लड़ रहे US-ईरान, भारत के पास आ रहा है उसका भंडार, PM मोदी के एक मास्टरस्ट्रोक से गेम चेंज!
भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम डील काफी अहम है, लेकिन यह कोई अचानक मिला ब्रेकथ्रू नहीं है बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया, लंबी बातचीत और इंतजार का नतीजा है.
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India-Australia Sign Uranium Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन दिवसीय विदेश दौरे में सबसे बड़ी सफलता ऑस्ट्रेलिया के साथ हुई यूरेनियम डील को माना जा रहा है. भारत और ऑस्ट्रेलिया ने गुरुवार 9 जुलाई को ऊर्जा क्षेत्र में ये बड़ा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इससे ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम का शांति उद्देश्यों के लिए भारत में आयात करने का रास्ता खुल गया है.
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यह अहम समझौता भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को मजबूत करेगा और ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग को और गहरा करेगा. यह महज एक समझौता भर नहीं है ये डील भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम के लिए बड़ी जीत है जो कई साल के संघर्षों के बाद मिली है. वो भी ऐसे समय में जब अमेरिका परमाणु उर्जा को लेकर बाकी देशों के पर कतरने को तैयार बैठा रहता है. ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष अमेरिका की इसी इनसिक्योरिटी की देन है. भारत के लिए यह कितनी बड़ी बात है समझते हैं.
साल 2015 में हुआ था समझौता
साल 2012 तक ऑस्ट्रेलिया ने यूरेनियम निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखे थे. इसके बाद साल 2015 में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम निर्यात का रास्ता साफ़ हुआ और समझौते पर बात बनी लेकिन डील पर साइन 11 साल बाद किए गए. इस डील के जरिए भारत को एनर्जी और डिफेंस सेक्टर में बड़ी गारंटी मिली है.
भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम डील काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन यह कोई अचानक मिला ब्रेकथ्रू नहीं है बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया, लंबी बातचीत और इंतजार का नतीजा है. संयुक्त बयान के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया और भारत ने 'ऑस्ट्रेलिया-भारत परमाणु सहयोग समझौता (2015)' के तहत ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम के निर्यात के लिए जरूरी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है.
कितनी बड़ी है यह डील?
ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया के यूरेनियम रिजर्व्स का करीब 28% है जो कि बहुत बड़ा सोर्स है. भारत के लिए समझौता इसलिए अहम हो जाता है क्योंकि भारत का लक्ष्य 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर पावर कैपेसिटी पहुंचाना है.
ऑस्ट्रेलिया अपने यूरेनियम सप्लाई मानकों को लेकर बेहद सख्त नीति अपनाता है. वह केवल शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए ही यूरेनियम की सप्लाई करता है.
यह डील लंबे समय तक भारत को भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित करेगी, जिससे देश का क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन तेज होगा. वहीं, कोयला जैसे फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम होगी.
ऑस्ट्रेलिया से पहले कौन देता है भारत को यूरेनियम?
भारत पहले से रूस, कनाडा और कजाकिस्तान जैसे देशों से यूरेनियम लेता आ रहा है, लेकिन ये भारत की जरूरत को पूरा करने के लिए काफी नहीं था. ऐसे में यूरेनियम भंडार रखने वाले सबसे बड़े देश से सप्लाई इन देशों पर भारत की निर्भरता को काफी हद तक कम करेगी. ऑस्ट्रेलिया जैसे भरोसेमंद, विशाल सप्लायर का भारत से जुड़ना देश की एनर्जी सुरक्षा को मजबूत करेगा.
रणनीतिक लिहाज से कितनी अहम है ये डील?
वहीं, इस डील से ऑस्ट्रेलिया को भी नया मार्केट मिला है. यह डील रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करती है. चाहे बात डिफेंस की हो या हो क्रिटिकल मिनरल्स की, इसके साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन, स्पेस ट्रैकिंग को भी दम मिलेगा.
भारत की बिजली डिमांड तेजी से बढ़ रही है. ऊर्जा सुरक्षा और नेट जीरो का लक्ष्य है, इस डील के बाद संभव है कि भारत को अपने लक्ष्य के करीब पहुंचने में मदद मिलेगी.
यूरेनियम के लिए लड़ रहे ईरान-अमेरिका
हाल ही में हुए US और ईरान के बीच की जंग की वजह अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को बताया. दोनों के बीच एक एग्रीमेंट हुआ. जिसके बाद ईरान को अपना अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम ( highly enriched uranium stockpile) के भंडार को शिफ्ट करना पड़ा. दोनों के बीच ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम बड़ा मुद्दा था.
इस वॉर ने ग्लोबल अनिश्चितता, मिडिल ईस्ट में तनाव और दुनिया पर इसके असर को लेकर बड़ा डेमो दे दिया. ऐसे में भारत के लिए अपनी सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरतों को पूरी करना कितना जरूरी हो गया है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. ऑस्ट्रेलिया भारत के स्थिर और भरोसेमंद सप्लायर का पार्टनर है.
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ईरान वाले मामले ने दिखाया कि गलत हाथों में न्यूक्लियर कितना खतरनाक हो सकता है. भारत का प्रोग्राम IAEA नियमों के तहत शांतिपूर्ण है, इसलिए ऑस्ट्रेलिया जैसे देश आसानी से सप्लाई कर रहे हैं. इसके जरिए बड़ा जियो-पॉलिटिकल मैसेज भी दिया जा रहा है. अमेरिका-ईरान टेंशन और चीन की बढ़ती ताकत के बीच Quad (Quadrilateral Security Dialogue) देश एक-दूसरे के साथ मजबूत हो रहे हैं. यह डील उसी का हिस्सा है.
दोनों देशों के लीडर ने क्या कहा?
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ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बानीज के साथ इस समझौते का ऐलान करते हुए PM मोदी ने कहा कि दोनों देश ने न्यूक्लियर क्षेत्र में एक अहम समझौते को पूरा किया है. इससे ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति का रास्ता खुलेगा और हमारे स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों को नई मजबूती मिलेगी.’