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आसमान से बरसेगा काल! DRDO ने किया खतरनाक गाइडेड मिसाइल V-3 का सफल परीक्षण, कांप उठेंगे दुश्मन

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ड्रोन से चलने वाली आधुनिक ULPGM-V3 मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जो हवा और जमीन दोनों से दुश्मन के टैंकों, ड्रोनों और हेलीकॉप्टरों को सटीक निशाना बना सकती है.

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20 May 2026
( Updated: 20 May 2026
12:49 PM )
आसमान से बरसेगा काल! DRDO ने किया खतरनाक गाइडेड मिसाइल V-3 का सफल परीक्षण, कांप उठेंगे दुश्मन
Image Source: IANS
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल के पास स्थित डीआरडीओ परीक्षण रेंज में मानवरहित हवाई वाहन द्वारा प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल (ULPGM)-V3 के अंतिम परिशोधन विकास परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न कर लिए हैं. ये परीक्षण यूएलपीजीएम हथियार प्रणाली के संचालन और नियंत्रण के लिए एकीकृत ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम (GCS) का उपयोग करके किए गए. जीसीएस में अत्याधुनिक तकनीकें हैं जो तत्परता और प्रक्षेपण कार्यों को स्वचालित बनाती हैं. 

मिसाइल निर्माण के लिए DRDO की बड़ी साझेदारी

डीआरडीओ ने मिसाइलों के विकास और उत्पादन के लिए हैदराबाद स्थित भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और हैदराबाद स्थित अदाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड नामक दो उत्पादन एजेंसियों के साथ साझेदारी की है. वर्तमान परीक्षणों के लिए इस प्रणाली को बेंगलुरु स्थित न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित यूएवी में एकीकृत किया गया है.

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DRDO ने नई ULPGM मिसाइल विकसित की

यूएलपीजीएम मिसाइल को हैदराबाद स्थित इमारत अनुसंधान केंद्र द्वारा नोडल प्रयोगशाला के रूप में अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं जैसे कि हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल), चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला (टीबीआरएल), चंडीगढ़ स्थित और पुणे स्थित उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एचईएमआरएल) के साथ मिलकर विकसित किया गया है.

मिसाइल का पूरा निर्माण अब भारत में ही

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इस मिसाइल का उत्पादन पूरी तरह से भारतीय रक्षा तंत्र के माध्यम से किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में लघु एवं मध्यम उद्यम और अन्य उद्योग शामिल हैं. परीक्षणों से पूर्णतः विकसित घरेलू आपूर्ति श्रृंखला की पुष्टि हुई है, जो तत्काल बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए सुसज्जित है.

रक्षा मंत्री ने की स्वदेशी तकनीक की सराहना  

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, रक्षा और उत्पादन भागीदारों और उद्योग जगत को टैंक रोधी भूमिका के लिए वायु-से-भूमि मोड और ड्रोन, हेलीकॉप्टर और अन्य हवाई लक्ष्यों के लिए वायु-से-हवा मोड में यूएलपीजीएम-वी3 के सफल विकास परीक्षणों के लिए बधाई दी है. उन्होंने इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में हासिल की गई एक रणनीतिक उपलब्धि बताया. रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने परीक्षणों से जुड़ी सभी टीमों को इस सराहनीय उपलब्धि के लिए बधाई दी. 

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