भांजे के हत्यारे मामा को फांसी की सजा, फैसला सुनते ही अपराधी ने जो बोला सुनकर भड़के जज, कहा- मरते दम तक लटकाना
गाजीपुर कोर्ट ने हत्यारे मामा अमजद खान को फांसी की सजा सुनाई. इस दौरान जज ने अमजद खान से कुछ सवाल किए. जिनके जवाब सुन जज साहब हैरान रह गए.
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Ghazipur Court Verdict: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में एक हत्यारे की मानसिकता ने जज को भी चकरा दिया. जज इतना आग बबूला हो गए कि अपराधी को तब तक फांसी पर लटकाए रहने का आदेश दिया, जब तक उसकी मौत नहीं हो जाती.
ये मामला एक 4 साल के बच्चे की हत्या से जुड़ा है. मामा अमजद खान ने ही अपने भांजे की गला काटकर हत्या कर दी थी. इस मामले में गाजीपुर कोर्ट ने हत्यारे मामा को फांसी की सजा सुनाई. इस दौरान जज ने अमजद खान से कुछ सवाल किए. जिनके जवाब सुन जज साहब हैरान रह गए.
जज ने हत्यारे मामा अमजद खान से क्या पूछा?
पीड़ित पक्ष के वकील अखिलेश सिंह ने मीडिया को बताया कि सुनवाई के दौरान जज शक्ति सिंह ने अमजद खान से कुछ सवाल किए. उन्होंने पूछा, अगर तुमको (हत्यारा) छोड़ दिया गया तो क्या करोगे? इस पर दोषी अमजद खान ने जवाब दिया- ‘अगर कोई मुझसे उलझेगा तो मैं उसकी भी हत्या कर दूंगा.’
हत्यारे मामा का ये जवाब सुनकर जज शक्ति सिंह गुस्से से भर उठे. उन्होंने फिर पूछा- तुम्हें अपने किए पर कोई पछतावा है? अमजद खान ने फिर उसी अंदाज में जवाब दिया- बिल्कुल नहीं.
इतना सुनते ही जज शक्ति सिंह का पारा चढ़ गया. उन्होंने सख्त लहजे में कहा- इसे (हत्यारे अमजद खान) तब तक फांसी पर लटकाओ, जब तक इसकी मौत न हो जाए. ये फैसला सुनाने के बाद जज ने अपने पेन की निब तोड़ दी.
मामा ने 4 साल के भांजे को बेरहमी से क्यों मारा?
ये दर्दनाक और क्रूर मामला 21 अक्टूबर 2021 का है. जब 4 साल का दानियाल उर्फ अदनान खान अपनी मां शबाना नाज के साथ गहमर के बारा गांव में अपने नानी के घर आया था. इस दौरान शबाना की अपने भाई अमजद से बहस हो गई थी. जिस पर अमजद इतना भड़क गया कि बहन का बदला मासूम का बेरहमी से कत्ल करते हुए लिया. अमजद ने अदनान की गर्दन पर मांक के सामने चाकू से वार किया.
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इसके बाद धारा 302 के तहत FIR दर्ज कराई गई, एडीजीसी क्रिमिनल अखिलेश सिंह के मुताबिक, कोर्ट में चली लंबी सुनवाई में कुल 9 गवाह पेश हुए, इनमें आरोपी की ही तीन सगी बहने और एक भाई भी शामिल था. तमाम सबूत और गवाहों के आधार पर अमजद खान को अदालत ने दोषी करार दिया और फांसी की सजा सुनाई. आरोपी को क्रूरता पर कोई पछतावा भी नहीं था. इसे देखते हुए जज ने तब तक फांसी पर लटकाए रखने का आदेश दिया जब तक अमजद खान की मौत नहीं हो जाती.