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कर्नाटक: 2110 करोड़ के कथित पोंजी घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, शिवम एसोसिएट्स का प्रमुख शिवानंद नीलन्नावर गिरफ्तार

ईडी की जांच बेलगावी शहर के मालामारुति पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी. यह मामला अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम, 2019 और कर्नाटक निवेशकों के हितों की सुरक्षा अधिनियम, 2004 के तहत दर्ज किया गया था.

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14 Aug 2026
( Updated: 14 Aug 2026
07:06 PM )
कर्नाटक: 2110 करोड़ के कथित पोंजी घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, शिवम एसोसिएट्स का प्रमुख शिवानंद नीलन्नावर गिरफ्तार
Image Credit: IANS
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मंगलुरु सब-जोनल कार्यालय ने शिवम एसोसिएट्स द्वारा कथित रूप से चलाए जा रहे कई राज्यों में करोड़ों रुपए के पोंजी (चिटफंड जैसी) घोटाले के मामले में शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नावर को गिरफ्तार किया है.

शिवम एसोसिएट्स के प्रमुख शिवानंद नीलन्नावर गिरफ्तार


ईडी के अनुसार, नीलन्नावर को 13 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया. उन्हें विशेष पीएमएलए अदालत, मंगलुरु में पेश किया गया, जहां से 24 अगस्त तक 12 दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया गया.

जांच एजेंसी के मुताबिक, नीलन्नावर शिवम एसोसिएट्स में धन के प्रवाह का मुख्य प्रबंधन करने वाला था और फर्म के बहुमत हिस्सेदार होने के कारण उसका प्रमुख नियंत्रण भी उसके पास था.

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ईडी की जांच बेलगावी शहर के मालामारुति पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी. यह मामला अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम, 2019 और कर्नाटक निवेशकों के हितों की सुरक्षा अधिनियम, 2004 के तहत दर्ज किया गया था.

एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि लोगों को असामान्य रूप से अधिक और निश्चित रिटर्न का लालच देकर निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया.

3% मासिक रिटर्न का दिया जाता था लालच

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पीएमएलए के तहत जांच के दौरान ईडी को पता चला कि शिवम एसोसिएट्स कथित रूप से कई राज्यों में फैला एक संगठित पोंजी नेटवर्क चला रही थी. एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने निवेशकों को हर महीने 3 प्रतिशत रिटर्न का वादा कर लगभग 2,110.97 करोड़ रुपए जुटाए.

चार राज्यों तक फैला था नेटवर्क

ईडी का आरोप है कि निवेशकों को जोड़ने के लिए कंपनी ने डिजिटल नेटवर्क और बड़े रेफरल सिस्टम का इस्तेमाल किया, जो कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा और छत्तीसगढ़ तक फैला हुआ था. नए निवेशक लाने वाले स्वतंत्र सलाहकारों को 0.5 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था.

जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी को वर्ष 2019 से शेयर बाजार में लगातार भारी नुकसान हो रहा था. ईडी के मुताबिक, इन नुकसानों को छिपाने और बाजार में अपनी साख बनाए रखने के लिए नए निवेशकों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को ब्याज देने में किया जाता था.

एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि नकद राशि को विभिन्न निजी खातों, परिवार के सदस्यों और सहयोगी संस्थाओं जैसे शिवम सेवा (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड और शिवम प्रोडक्शंस के माध्यम से घुमाया गया.

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लग्जरी गाड़ियों, बंगलों और फिल्मों में लगाया गया पैसा

ईडी के अनुसार, कथित रूप से गबन की गई रकम का उपयोग लग्जरी गाड़ियां खरीदने, महंगे बंगले बनाने, अन्य लोगों के नाम पर संपत्तियां खरीदने और फिल्म निर्माण में निवेश करने के लिए किया गया.

जांच एजेंसी ने इन कथित रूप से हड़पी गई रकम को पीएमएलए के तहत "अपराध से अर्जित आय" (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) माना है.

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ईडी ने कहा कि मामले की आगे जांच जारी है ताकि बाकी देनदारियों का पता लगाया जा सके और धन के पूरे प्रवाह की जानकारी जुटाई जा सके.

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