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मुनीर के साथ पींगे बढ़ा रहे थे ट्रंप, अमेरिकियों ने पाकिस्तान को कहा 'आस्तीन का सांप', दिलाई दगाबाज इतिहास की याद

पाकिस्तान और आसिम मुनीर के साथ पींगे बढ़ा रहे ट्रंप को अमेरिकियों ने चेतावनी दी है. एक्सर्ट्स ने पाकिस्तान के दगाबाजी के इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि ट्रंप भूलें ना कि अफगानिस्तान युद्ध में पाक ने अमेरिका के साथ क्या किया था.

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19 Apr 2026
( Updated: 19 Apr 2026
12:26 PM )
मुनीर के साथ पींगे बढ़ा रहे थे ट्रंप, अमेरिकियों ने पाकिस्तान को कहा 'आस्तीन का सांप', दिलाई दगाबाज इतिहास की याद
Image:Asim Munir/ Donald Trump/ Image: IANS
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों पाकिस्तान, पाकिस्तानी फौज के चीफ आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं. इसी को लेकर अब अमेरिका में ही विरोध के स्वर सुनाई पड़ने लगे हैं. ट्रंप की आउट ऑफ द बॉक्स पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियों को लेकर एक्सपर्ट्स ने चेतानी दी है. यानी कि मुनीर और पाक फौज के संदिग्ध इतिहास को लेकर जो भारत लंबे समय से कह रहा है, वो अब अमेरिकी भी कहने लगे हैं. 

खासकर मुनीर के ईरान के दौरे के बाद और भी ज्यादा बातें होने लगी हैं कि कहीं मुनीर डबल एजेंट तो नहीं हैं. ऐसा कैसे हो सकता है कि ईरानी रिजीम और ट्रंप के साथ एक जैसे रिश्ते, वो भी गर्मजोशी वाली, थोड़ी मुश्किल है.

मुनीर के IRGC के साथ रहे सीक्रेट संबंध!

फॉक्स न्यूज ने मुनीर के IRGC के साथ संबंध औक खुफिया इतिहास का खुलासा करते हुए कहा कि मुनीर ने  2016 और 2017 के बीच बतौर ISI चीफ ईरानी सरकार, IRGC और हाई रैंकिंग ऑफिशियल के साथ संबंध स्थापित किए और नेक्सस स्थापित किए, संपर्कों का जाल बिछाया. 

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अमेरिका-ईरान; दोनों के साथ मुनीर के संबंध खतरे की घंटी!

इस संबंध में रिटायर्ड पाकिस्तानी जनरल अहमद सईद ने बताया कि मुनीर के ईरानी सरकार के साथ-साथ 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के साथ भी लगातार संपर्क में रहे. इस दौरान मुनीर ने ऑन एंड ऑफ अपने संबंध और संपर्क खामेनेई रिजीम में बनाए रखे. सईद ने आगे कहा कि मुनीर के संबंध ईरान की नियमित सेना और उनकी खुफिया एजेंसियों से भी बेहद गहरे हैं. आपको बता दें कि IRGC ईरानी सेना से अलग, खामेनेई या सुप्रीम लीडर की अपनी सेना है, जिसका काम ईरान में इस्लामी राज और अयातुल्लाह के शासन की रक्षा करना है.

अमेरिका के दुश्मनों से भी रहे मुनीर के गहरे रिश्ते

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इतना ही नहीं मुनीर के उन चेहरों के साथ भी व्यक्तिगत संबंध रहे हैं, जिन्हें इजरायल अपना दुश्मन मानता रहा है और जो अमेरिका के भी बड़े दुश्मन माने जाते हैं, उनकी लिस्ट में भी शामिल रहे हैं. रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मुनीर के पूर्व कुद्स फोर्स कमांडर कासिम सुलेमानी से भी करीबी संबंध थे. सुलेमानी को 2020 में अमेरिका ने एक हमले में ढेर कर दिया था. इसके अलावा 2025 जून में इजरायली हमले में मारे गए कमांडर हुसैन सलामी के साथ भी मुनीर के निजी रिश्ते रहे हैं.

ट्रंप प्रशासन को दिलाई गई पाकिस्तान के दगाबाज इतिहास की याद

कहा जा रहा कि मुनीर के ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के साथ यही निजी रिश्ता आने वाले समय में अमेरिका की परेशानी बढ़ाने वाला है. कहा जा रहा है कि ये ठीक वैसी ही स्थिति है जैसे सद्दाम हुसैन को CIA-अमेरिका ने तैयार, ट्रेन किया, तारीफ की और बात में उसी ने उसके लिए परेशानी खड़ी कर दी, जिसके बाद उसका और ईराक का क्या हाल हुआ ये सब जानते हैं.

मुनीर के साथ संबंध बढ़ाना खतरे की घंटी के संकेत

आपको बता दें कि फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज' के सीनियर फेलो बिल रोगियो ने सीधे-सीधे ट्रंप प्रशासन को चेतावनी दी और आगाह किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए. इतना ही नहीं उन्होंने मुनीर के IRGC से संबंधों को मौजूदा प्रशासन के लिए एक 'बड़ा रेड फ्लैग' यानी कि खतरे की घंटी करार दिया.

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अमेरिका ना भूले पाकिस्तान ने अमेपिका को धोखा दिया था: रोगियो

रोगियो ने पाकिस्तान का इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि ये नहीं भूलना चाहिए कि अफगानिस्तान युद्ध के दौरान कैसे पाकिस्तान एक 'दगाबाज' सहयोगी साबित हुआ था. उन्होंने बताया कि कैसे पाकिस्तान एक तरफ तो अमेरिका से दोस्ती का दिखावा करता था, दूसरी ओर उसकी तालिबान से भी मिलिभगत थी और पर्दे के पीछे से वो तालिबान की मदद कर रहा था. इतना ही नहीं पाकिस्तान लंबे समय तक ओपनली अमेरिका के ड्रोन हमलों का विरोध करता रहा, लेकिन अंदरखाने उससे मिलियंस ऑफ डॉलर ऐंठता रहा. रोगिये के मुताबिक मुनीर का एक ही समय पर दोनों देशों को साधना, नजदीकियां बढ़ाना  उसी पुराने पैटर्न की याद दिलाती हैं, अमेरिका एक बार फिर उसी धोखे का शिकार हो रहा है, जिसे 'आस्तीन का सांप' पालना कहा जाता है.

पाकिस्तान में नागरिक शासन की ताकत खत्म!

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इतना ही नहीं पाकिस्तानी विश्लेषक रजा रूमी ने भी दलील दी है कि कैसे मुनीर का बढ़ता सैन्य कद और कूटनीतिक अमल-दखल यह साफ-साफ बता रहा है कि पाकिस्तान में नागरिक सरकार (शहबाज सरकार) की ताकत खत्म हो रही है और सेना पूरी तरह से हावी हो चुकी है.

आपको बता दें कि मुनीर हाल ही में ट्रंप का संदेश लेकर ईरान की अपनी तीन दिवसीय यात्रा पूर पहुंचे थे. यहां उनकी ईरानी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और संसद के अध्यक्ष के साथ-साथ ईरान के मिलिट्री सेंट्रल कमांड के प्रमुख से भी मुलाकात भी हुई थी.

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फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक मुनीर का ट्रंप के साथ रिश्ता मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संकट से जुड़ा है. इस टकराव को शांत करने में मुनीर ने अहम भूमिका निभाई थी, और उसके बाद पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया, एक ऐसा कदम जिसे पाकिस्तानी विश्लेषकों ने बड़े पैमाने पर मुनीर द्वारा प्रेरित किया गया माना.

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