PM मोदी की तर्ज पर महज ढाई महीने में तारिक रहमान का कमाल, BNP की जीत में ‘चाय पर चर्चा’ बना सबसे अहम फैक्टर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रचार शैली का प्रभाव अब विदेशों में भी दिख रहा है. बांग्लादेश में 17 साल बाद लौटे बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान ने तेज और संवाद-केंद्रित अभियान चलाकर आम चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की.

PM मोदी की तर्ज पर महज ढाई महीने में तारिक रहमान का कमाल, BNP की जीत में ‘चाय पर चर्चा’ बना सबसे अहम फैक्टर
Narendra Modi/ Tariq Rahman (File Photo)

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक प्रचार की शैली और लोगों से जुड़ने का अंदाज अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया के अन्य देशों में भी अपनाया जाने लगा है. ताजा मामला भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश से सामने आया है, जहां 17 साल बाद स्वदेश लौटे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख तारिक रहमान को आम चुनाव में बड़ी जीत मिली है.

महज दो से ढाई महीने के भीतर अपनी पार्टी के लिए तेज़ प्रचार अभियान चलाते हुए तारिक रहमान ने न केवल घरेलू मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की चुनावी रणनीति और जनसंपर्क शैली से प्रेरित तरीकों को भी अपनाया. इसका असर यह हुआ कि पूरे देश में बीएनपी के पक्ष में माहौल तैयार हो गया. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आक्रामक प्रचार, सीधे संवाद और भावनात्मक जुड़ाव की रणनीति ने इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाई. 

BNP ने भारत के सोशल मीडिया पर रखी नजर 

बीएनपी के चुनाव अभियान को भारतीय सोशल मीडिया और जमीनी गतिविधियों की कड़ी निगरानी के बाद आकार दिया गया था. पार्टी की रणनीति टीम ने डिजिटल प्रचार, बूथ स्तर की सक्रियता और जनसभाओं के प्रबंधन के तौर-तरीकों का विशेष अध्ययन किया. इसके बाद स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक इन्हें ढालकर ऐसा अभियान तैयार किया गया, जिसने कम समय में ही मतदाताओं के बीच व्यापक प्रभाव पैदा किया.

BNP ने किया 'चायेर अड्डा' का आयोजन 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2014 के चर्चित अभियान 'चाय पर चर्चा' से प्रेरणा लेते हुए बीएनपी ने बांग्लादेश में 'चायेर अड्डा' (चाय पर बातचीत) नाम से संवाद कार्यक्रम शुरू किया. इस पहल का सुझाव तारिक रहमान की बेटी जैमा रहमान ने दिया था. अभियान के तहत देशभर में खासकर युवाओं के साथ अनौपचारिक बैठकों का आयोजन किया गया, जहां सीधे बातचीत कर उनकी राय और सुझाव लिए गए. भारत में 'चाय पर चर्चा की शुरुआत उस समय हुई थी, जब कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की 'चायवाला' टिप्पणी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई थी और बाद में यह अभियान बेहद सफल साबित हुआ. इसी तर्ज पर बांग्लादेश में भी, जब विपक्ष ने तारिक रहमान को ‘बाहरी’ और ‘अनुभवहीन’ करार दिया, तब 'चायेर अड्डा' जैसे संवाद कार्यक्रमों ने उन्हें युवाओं और आम मतदाताओं से सीधे जुड़ने का प्रभावी मंच प्रदान किया.

मुझे सर नहीं सभी युवा भाई कहें: तारिक रहमान 

चुनावी रणनीति के तहत तारिक रहमान की छवि एक सरल, मिलनसार और जमीन से जुड़े नेता के रूप में गढ़ी गई, जो सत्ता के अहंकार से दूर दिखाई दें. इस सोच का असर यह हुआ कि पहली बार मतदान करने जा रहे 4 करोड़ से अधिक युवाओं तक पार्टी अपनी बात प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सफल रही. बीएनपी ने प्रचार के दौरान 'मुझे सर नहीं, भाई कहो' जैसा नारा आगे बढ़ाया, जिससे नेता और मतदाता के बीच की दूरी कम करने का संदेश दिया गया. यह तरीका भारत में राहुल गांधी द्वारा छात्रों के साथ संवाद के दौरान अपनाए गए अनौपचारिक अंदाज़ की याद दिलाता है. कुल मिलाकर, इस रणनीति का मकसद था मतदाताओं से सीधे, सहज और भावनात्मक स्तर पर जुड़ाव स्थापित करना.

कंटेंट क्रिएटर्स को BNP ने लुभाया 

युवाओं तक सीधी पहुंच बनाने के लिए बीएनपी ने डिजिटल मंच का आक्रामक इस्तेमाल किया. पार्टी ने रील बनाने की प्रतियोगिताएं आयोजित कीं, जिनमें बांग्लादेश के उभरते यूट्यूबर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को अपने विचार, सुझाव और अभियान से जुड़े संदेश रचनात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया. प्रतियोगिता में चुनी गई बेहतरीन रीलों को सम्मानित किया गया, साथ ही उन्हें बीएनपी के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से साझा कर व्यापक दर्शकों तक पहुंचाया गया. इस पहल ने युवाओं के बीच अभियान को ट्रेंडिंग बनाने में अहम भूमिका निभाई. बताते चलें कि इस चुनावी जीत के बाद भी तारिक रहमान के सामने चुनौतियां कम नहीं हुई हैं. जमात-ए-इस्लामी के 77 सीटों के मजबूत प्रदर्शन ने आने वाले समय में सियासी समीकरणों को जटिल बना दिया है. इतना ही नहीं, जमात ने चुनाव प्रक्रिया को ‘फिक्स्ड’ बताते हुए मतदान में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए हैं, जिससे राजनीतिक माहौल में तनाव बना हुआ है.

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बहरहाल, इन परिस्थितियों के बीच रहमान ने अपने पोस्टरों पर 'आई हैव अ प्लान' (मेरे पास एक योजना है) जैसी टैगलाइन के जरिए भविष्य की स्पष्ट रणनीति का संदेश देने की कोशिश की. यह नारा पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के चर्चित अभियान मंत्र 'यस, वी कैन' की झलक देता है. यह पूरा चुनाव अभियान इस बात का संकेत है कि आधुनिक राजनीतिक रणनीतियां अब सीमाओं से परे जाकर वैश्विक प्रभाव ग्रहण कर रही हैं.

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