'अगर ईरान में सत्ता बदले तो...', अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की खामेनेई को खुली चेतावनी, मिडिल ईस्ट में बढ़ी सैन्य मौजूदगी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के शासन पर तीखा हमला बोला है. ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है तो यह दुनिया के लिए सबसे अच्छा होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका दशकों से सिर्फ बातें ही सुनता आ रहा है.
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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है. हालात ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां बयानबाजी के साथ सैन्य तैयारियां भी तेज हो गई हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान की मौजूदा सत्ता को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है तो यह दुनिया के लिए सबसे अच्छा साबित हो सकता है. उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है.
दरअसल, नॉर्थ कैरोलाइना के फोर्ट ब्रैग में अमेरिकी सैनिकों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई (Ali Khamenei) के शासन पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पिछले 47 साल से ईरान की ओर से सिर्फ बातें होती रही हैं. इस दौरान क्षेत्र में हिंसा और संघर्ष ने हजारों जिंदगियां प्रभावित की हैं. ट्रंप ने कहा कि लोगों ने हाथ गंवाए, पैर गंवाए और अपने चेहरे तक खो दिए. यह सब बहुत लंबे समय से चल रहा है. हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मौजूदा शासन के बाद नेतृत्व किसके हाथ में जाएगा. जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वहां लोग मौजूद हैं. इस बयान को विशेषज्ञ ईरान के भीतर राजनीतिक बदलाव की खुली वकालत के तौर पर देख रहे हैं.
अमेरिका ने दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर किया तैनात
तनाव के इस माहौल में अमेरिका ने सैन्य दबाव भी बढ़ा दिया है. दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford अब मिडिल ईस्ट की ओर रवाना किया जा रहा है. यह पहले से तैनात USS Abraham Lincoln के साथ क्षेत्र में मौजूद रहेगा. दो बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती का मतलब है कि अमेरिका किसी भी संभावित टकराव के लिए तैयार रहना चाहता है. यह कदम सीधे तौर पर ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
ईरान पर कुछ तरह प्रेशर बना रहे ट्रंप
ट्रंप ने साफ कहा कि अगर परमाणु समझौते पर डील नहीं होती तो इस सैन्य मौजूदगी की जरूरत पड़ेगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगले महीने तक किसी समझौते की संभावना बन सकती है. लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो यह ईरान के लिए बुरा साबित होगा. जानकारी देते चलें कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर खींचतान लंबे समय से चल रही है. हाल ही में ओमान में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई थी. हालांकि वह बैठक बेनतीजा रही. इसके बाद फिर से बातचीत करने पर सहमति बनी, लेकिन अगली बैठक का स्थान अभी तय नहीं हुआ है. विशेषज्ञ मानते हैं कि सैन्य दबाव के बीच कूटनीतिक बातचीत का रास्ता आसान नहीं होता.
ट्रंप ने की थी नेतन्याहू से मुलाकात
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप की मुलाकात इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) से भी हुई. इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक नेतन्याहू चाहते हैं कि किसी भी संभावित समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय संगठनों को दिए जा रहे समर्थन पर सख्त रोक शामिल हो. ईरान इन शर्तों को पहले ही खारिज कर चुका है. यही कारण है कि समझौते की राह और जटिल हो गई है.
खाड़ी देशों की बढ़ी चिंता
खाड़ी देशों ने भी इस बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है. उनका मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव होता है तो जंग पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल सकती है. हाल ही में अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया था जो एयरक्राफ्ट कैरियर के करीब पहुंच गया था. इससे पहले ईरान ने भी एक अमेरिकी जहाज को रोकने की कोशिश की थी. हालांकि उस समय हालात काबू में आ गए और दोनों पक्ष बातचीत के लिए तैयार हुए.
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बहरहाल, अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा. क्या सैन्य दबाव ईरान को समझौते की मेज पर लाएगा या फिर हालात और बिगड़ेंगे. फिलहाल इतना तो तय है कि मिडिल ईस्ट की सियासत एक निर्णायक दौर से गुजर रही है. दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान पर टिकी हैं. आने वाले हफ्ते यह तय करेंगे कि यह टकराव डील में बदलेगा या फिर नए संकट को जन्म देगा.
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