आतंकवाद, रेप, 1200 हत्याएं… बांग्लादेश चुनावों में चमकी तीन अपराधियों की किस्मत, भारत के लिए क्या संदेश?

बांग्लादेश चुनावों में BNP के ही कई ऐसे नेता हैं जिन पर आंतकवादी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप हैं. इन्हें फांसी की सजा भी सुनाई गई थी, लेकिन अब चुनावों में इन्होंने बड़ी जीत दर्ज की है.

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14 Feb 2026
( Updated: 14 Feb 2026
07:16 PM )
आतंकवाद, रेप, 1200 हत्याएं… बांग्लादेश चुनावों में चमकी तीन अपराधियों की किस्मत, भारत के लिए क्या संदेश?

बांग्लादेश चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत दर्ज की है. देश में करीब 20 साल बाद BNP की सरकार बनने जा रही है. जीते गए उम्मीदवारों में से कई ऐसे हैं जिन पर आतंकवादी होने के भी आरोप लगे. ऐसे तीन नेता हैं जिन्हें शेख हसीना की सरकार में फांसी तक की सजा सुनाई गई थी. 

BNP और जमात ए इस्लामी दोनों पार्टियों के तीन ऐसे उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है. जिनके खिलाफ सीरियस क्रिमिनल केस हैं, लेकिन आम चुनाव के बाद इन अपराधियों की किस्मत चमक गई. जानते हैं कौन हैं ये तीन चेहरे 

BNP नेता लुफ्तोज्जमान बाबर

लुत्फोज्जमान बाबर ने इस बार 1.6 लाख वोटों से जीत दर्ज की है. वे 2001-2006 के बीच खालिदा जिया की सरकार में गृह राज्यमंत्री रह चुके हैं. उस समय BNP-जमात-ए-इस्लामी गठबंधन सत्ता में था. लुत्फोज्जमान बाबर खालिदा जिया  कैबिनेट के सबसे युवा सदस्यों में से एक थे. 

2004 के ढाका ग्रेनेड हमले (21 अगस्त 2004) में शामिल होने के आरोप में उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी. इस हमले में शेख हसीना की रैली पर ग्रेनेड फेंके गए थे, जिसमें 24 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए. 10 ट्रक हथियार तस्करी केस (Chittagong arms haul case) में भी उन्हें मौत की सजा हुई थी, जिसमें ULFA जैसे संगठनों को हथियार सप्लाई करने का आरोप था. इसके अलावा उन पर अवैध हथियार, भ्रष्टाचार जैसे संगीन आरोप भी लगे हैं. उन्हें 17 साल जेल की सजा भी काटी. शेख हसीना की सरकार गिरने और मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के बाद कई मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया. 

BNP के अब्दुल सलाम पिंटू 

अब्दुल सलाम पिंटू ने चुनाव में 2 लाख के वोटों से जीत दर्ज की. वे खालिदा जिया सरकार में उप शिक्षा मंत्री (Deputy Minister of Education) रहे बाद में उप उद्योग मंत्री भी बने. 2004 में ढाका में शेख हसीना पर हुए ग्रेनेड हमले (21 अगस्त ग्रेनेड अटैक) मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था और मौत की सजा सुनाई गई थी. उन पर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (HuJI) को फंडिंग और सपोर्ट देने का आरोप लगा, जो भारत में कई हमलों (जैसे 2006 वाराणसी, 2007 अजमेर दरगाह, 2011 दिल्ली ब्लास्ट) से जुड़ा रहा. कुछ रिपोर्ट्स में PoK (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) में आतंकियों को ट्रेनिंग/फंडिंग से जोड़ा गया.

यह भी पढ़ें- 4 साल की उम्र में जेल, 17 साल का वनवास… तारिक रहमान के बांग्लादेश की गद्दी तक पहुंचने की कहानी

वे करीब 17 साल जेल में रहे (2008 से), लेकिन 2024 में शेख हसीना सरकार के हटने के बाद अंतरिम सरकार (मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व) के दौरान हाई कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया और दिसंबर 2024 में रिहा किया गया. अब्दुल सलाम पिंटू वे BNP के चेयरमैन तारिक रहमान के करीबी माने जाते हैं और पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.  हालांकि, उनके कुछ आरोपों (खासकर भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े) की वजह से भारत में उनकी रिहाई और चुनाव जीत पर चिंता जताई गई है.

जमात-ए-इस्लामी नेता अजहरुल इस्लाम 

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एटीएम अजहरुल इस्लाम जमात-ए-इस्लामी के एक वरिष्ठ नेता हैं. वे पार्टी के पूर्व कार्यवाहक महासचिव रह चुके हैं और रंगपुर क्षेत्र से जुड़े हुए हैं. इन चुनावों में उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की है. अजहरुल इस्लाम पर 1971 की लड़ाई में 1200 से ज्यादा लोगों की हत्या करने का आरोप है. उन पर 13 रेप केस भी दर्ज हैं. साल 2014 में अजहरुल इस्लाम को फांसी की सजा सुनाई गई थी, लेकिन यूनुस सरकार में उनको भी माफी मिल गई और जेल से बाहर आकर चुनाव लड़ा. ऐसे में भारत को सावधान रहने की जरुरत है. साथ ही BNP अध्यक्ष तारिक रहमान के लिए भी पार्टी को इनकी आपराधिक छवि से बाहर निकालना पड़ेगा.

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