Advertisement
ट्रंप का दावा- गाजा से सेना हटाएगा इजरायल, फैसले पर घिर गए नेतन्याहू, अपने और विरोधी दोनों हो गए खिलाफ
गाजा में ट्रंप ने इजरायली सेना हटाने का ऐलान किया था. इसके बाद नेतन्याहू अपने ही देश में घिर गए. विरोध को देखते हुए ही नेतन्याहू अभी कुछ भी नहीं बोल रहे हैं.
Advertisement
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 30 जुलाई को एक दावा किया था. उन्होंने कहा था कि हमास हथियार छोड़ने के लिए तैयार है और इजरायल गाजा से अब अपनी सेना हटा लेगा. एक तरफ तीन साल से चल रही जंग पर विराम लगेगा, तो दूसरी ओर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह राजनीतिक विवाद बन गया.
हालांकि इजरायल की सेना गाजा से पीछे हटेगी, इसका ऐलान भी डोनाल्ड ट्रंप ने ही किया है. अभी तक नेतन्याहू ने कोई बयान नहीं दिया, लेकिन इजरायल के कई नेता इस डील को लेकर असहमति जता रहे हैं.
इजरायल में हो रहा विरोध
Advertisement
अल जजीरा की रिपोर्ट में इजरायल सरकार के एक अधिकारी के हवाले से लिखा, जब तक हमास के पूरी तरह हथियार छोड़ने की गारंटी और पक्का भरोसा नहीं मिलता तब तक गाजा से सेना हटाने का सवाल ही नहीं बनता.
Advertisement
रिपोर्ट में बताया गया है कि इजरायल के वित्त मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री भी गाजा से सेना हटाने के पक्ष में नहीं हैं. वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने कहा, गाजा से इजरायली सेना नहीं हटनी चाहिए. क्योंकि हमारी पहली शर्त हमास से उनके हथियार छीनना है. उन्होंने गाजा पर पूरी तरह नियंत्रण करने का दावा किया.
वहीं, सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्विर ने ट्रंप के प्लान को खारिज करते हुए बुरा करार दिया. बेन ग्विर ने कहा,
Advertisement
‘अगर हमास के लड़ाकों को निशाना बनाना बंद कर दिया गया तो उन्हें अगला हमला करने का मौका मिल जाएगा. गाजा में सैन्य कार्रवाई जारी रहनी चाहिए और वहां से लोगों के पलायन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.’
नेतन्याहू के विरोधी भी असहमत
इतना ही नहीं नेतन्याहू के धुर विरोधी भी गाजा से सेना हटाने पर सहमत नहीं है. इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट भी ट्रंप के इस मसौदे के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा, अगर हमास की सैन्य और राजनीतिक ताकत पूरी तरह खत्म नहीं होती और सेना पीछे हट जाती है तो यह इजरायल की बड़ी नाकामी होगी. उन्होंने हमास के पहले से ज्यादा मजबूत होने का दावा किया. बताया जा रहा है गादी आइजनकोट अक्टूबर में इजरायल में होने वाले आम चुनावों में नेतन्याहू के विरोधी के तौर पर दावेदारी पेश करेंगे.
Advertisement
अमेरिका का गाजा पर एक दावा प्रधानमंत्री नेतन्याहू को भारी पड़ गया. कहा जा रहा है विरोध को देखते हुए ही नेतन्याहू अभी कुछ भी नहीं बोल रहे हैं. क्योंकि इजरायल में राजनेता से लेकर सुरक्षा अधिकारी तक गाजा में सेना हटाने के खिलाफ हैं.
UAE ने प्रस्ताव का किया स्वागत
गाजा में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के हथियार छोड़ने को लेकर बनी सहमति का संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने स्वागत किया है. UAE इसे संघर्ष खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस की बैठक के बाद इसकी घोषणा की थी.
Advertisement
सरकारी समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम ने UAE के विदेश मंत्रालय का बयान जारी किया गया. इसमें कहा कि यह समझौता ‘संघर्ष को समाप्त करने, सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है. जो फिर से राजनीतिक और कूटनितिक प्रक्रिया शुरू करने का मौका है.
बयान में यह भी कहा गया कि इससे आम नागरिकों की पीड़ा कम करने, हिंसा खत्म करने और गाजा के पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक माहौल तैयार करने में भी मदद मिलेगी.
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा था?
Advertisement
गाजा में स्थिति फिर से सामान्य करने की ओर बड़ा कदम बढ़ाते हुए ट्रंप ने दावा किया था कि इजरायली सेना वहां से पीछे हटेगी. जबकि हमास हथियार सरेंडर कर देगा.
ट्रंप के मुताबिक, सभी पक्षों की औपचारिक मंजूरी मिलने के 14 दिनों के भीतर इस समझौते को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. हमास ने भी इस समझौते पर सहमति जताई है, हालांकि उसने इसके लिए इजरायल से कुछ शर्तें पूरी करने की बात कही है.’
यह भी पढ़ें- जिन बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन को लेफ्ट-ममता राज में राज्य निकाला दे दिया, उनकी शंख बजाकर हुई बंगाल वापसी
Advertisement
यह भी पढ़ें
ट्रंप के अनुसार, फिलिस्तीनी इलाके में स्थायी शांति और सुरक्षा की दिशा के लिए जरूरी था. यह घोषणा अमेरिका की मध्यस्थता में हमास और इजरायल के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते के कई महीनों बाद की गई है. गौरतलब है कि इजरायल और हमास के बीच जंग अक्टूबर 2023 से जारी है.