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भारत-चीन पर 100% टैरिफ का खतरा! ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए साइन, जानें क्या होगा असर
ट्रंप ने रूस और ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए नए प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है, जिसमें भारत भी शामिल है.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने की मुहिम थमती नजर नहीं आ रही है. इसी कड़ी में उन्होंने अमेरिकी हाउस से पारित 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट बिल' पर शुक्रवार को हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया. इस कानून के तहत अब ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले पांच बड़े देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है. सबसे बड़ी बात यह है कि इन देशों की सूची में भारत का नाम भी शामिल है.
दरअसल, अमेरिका का मानना है कि रूस तेल और गैस बेचकर होने वाली कमाई का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में कर रहा है, जो करीब चार साल से चल रहा है. अमेरिकी तर्क के मुताबिक, रूस से तेल खरीदने वाले देश अप्रत्यक्ष रूप से उसकी युद्ध गतिविधियों को आर्थिक मदद पहुंचा रहे हैं. रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों में भारत भी शामिल है. यही वजह है कि अमेरिका लगातार भारत पर रूस से तेल खरीदना बंद करने के लिए टैरिफ समेत कई तरह के दबाव बनाता रहा है. लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए मित्र देश रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा. ऐसे में ट्रंप की ओर से नए सिरे से प्रतिबंधों और टैरिफ का रास्ता अपनाना इस दबाव को और बढ़ाता हुआ नजर आ रहा है.
अमेरिकी हाउस में दो दिन पहले पास हुआ था बिल
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जानकारी देते चलें कि अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को इस कानून को अपनी मंजूरी दे दी थी. नए कानून के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार हासिल हो गया है. इस दायरे में भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा खरीदार भी शामिल हैं. हालांकि, किस देश पर कितना शुल्क लगाया जाएगा, इसका अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रंप ही करेंगे. इस कानून के पीछे मुख्य उद्देश्य रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली आय पर दबाव बनाना और उसके साथ बड़े पैमाने पर ऊर्जा कारोबार करने वाले देशों पर भारी शुल्क के जरिए दबाव बढ़ाना है.
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भारत पर पड़ेगा कैसा असर?
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अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला लेते हैं, तो इसका सीधा असर अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर पड़ सकता है. शुल्क बढ़ने से वहां भारतीय सामान महंगा हो सकता है, जिससे निर्यातकों पर अतिरिक्त दबाव बनने की आशंका है. इस कानून का नाम दक्षिण कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है. बताया जाता है कि ग्राहम ने इस प्रस्ताव को तैयार करने में एक साल से अधिक समय लगाया था. कानून के प्रावधानों के तहत रूस के अधिकारियों और बैंकों के अलावा उन ‘शैडो फ्लीट’ टैंकरों को भी निशाना बनाया गया है, जिनका इस्तेमाल रूसी ऊर्जा की आपूर्ति के लिए किया जाता है.
अमेरिका में भी बढ़ सकती है महंगाई
अमेरिका में इन दिनों आम जनता महंगाई का सामना कर रही है. ऐसे में अगर भविष्य में 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर सिर्फ भारतीय निर्यातकों तक सीमित नहीं रहेगा. अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमत बढ़ सकती है. कपड़ा, दवाइयां और कई अन्य सामान अमेरिकी खरीदारों के लिए महंगे हो सकते हैं.
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बताते चलें कि ट्रंप प्रशासन के इस कदम से रूस पर दबाव बढ़ाने के साथ भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों पर भी असर पड़ने की संभावना है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रंप भारत पर वास्तव में कितना टैरिफ लगाते हैं और इसका भारतीय निर्यातकों के साथ-साथ अमेरिकी उपभोक्ताओं पर कितना असर पड़ता है.