मिडिल ईस्ट तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला, लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी जारी
मिडिल ईस्ट में हालिया तनाव के बीच वैश्विक व्यापार के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. लेबनान में युद्धविराम लागू होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को वाणिज्यिक जहाजों के लिए “पूरी तरह खुला” घोषित कर दिया गया है.
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मिडिल ईस्ट में युद्धविराम के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को वाणिज्यिक जहाजों के लिए “पूरी तरह खुला” घोषित किया गया है. हालांकि, अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह ईरान पर लक्षित नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखेगा, जिससे इस राहत के सीमित और सशर्त होने का संकेत मिलता है.
होर्मुज स्ट्रेट खुला
ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अरागची ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम के बाद सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए यह अहम जलमार्ग पूरी तरह खोल दिया गया है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि युद्धविराम की अवधि के दौरान तय मार्गों पर जहाजों की आवाजाही की अनुमति होगी.
इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के खुलने के बाद वैश्विक बाजारों में तुरंत असर देखने को मिला. तेल की कीमतों में गिरावट आई और शेयर बाजारों में तेजी दर्ज की गई.
ईरान पर अमेरिकी नाकेबंदी जारी
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अधिक सतर्क रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान पर सैन्य दबाव जारी रहेगा. उन्होंने कहा, “हॉर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुला है, लेकिन ईरान से जुड़े मामलों में हमारी नौसैनिक नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक हमारे सभी समझौते पूरी तरह पूरे नहीं हो जाते.”
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इस नाकेबंदी अभियान में 10,000 से अधिक सैनिक, एक दर्जन से ज्यादा जहाज और कई विमान शामिल हैं, जो इसकी व्यापकता को दर्शाता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि जलडमरूमध्य का खुलना सीमित दायरे में हो सकता है, क्योंकि जहाजों की आवाजाही “समन्वित मार्गों” के जरिए और ईरान के तट के करीब रखी जा रही है, जिससे नियंत्रण बना रहता है.
ईरान के साथ जल्द हो सकती बातचीत
यह पूरा घटनाक्रम इजरायल-लेबनान युद्धविराम के बीच सामने आया है, जो फिलहाल लागू है, लेकिन इसकी स्थिरता को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं.
इस बीच कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ जल्द बातचीत हो सकती है और अंतिम समझौते की स्थिति में वह पाकिस्तान की यात्रा भी कर सकते हैं.
गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर सीधा असर डालता है.
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वर्तमान संकट ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े व्यापक तनाव के कारण शुरू हुआ था, जिससे जहाजों पर हमले और तेल परिवहन में कमी देखी गई. फिलहाल युद्धविराम और आंशिक खुलने से राहत जरूर मिली है, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है.
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