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सिंधु समझौते पर गीदड़भभकी देने वाले पाकिस्तान की निकली हेकड़ी, सूखा गला, ईद पर भी पानी के लिए तरसा!

भारत की सांसें रोकने से पहले ही पाकिस्तान का गला सूख गया. सिंधु समझौता रद्द होने की तगड़ी मार पड़ रही है. कराची से लेकर लाहौर तक में ईद पर पानी को लेकर भीषण तबाही मची.

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30 May 2026
( Updated: 30 May 2026
07:04 PM )
सिंधु समझौते पर गीदड़भभकी देने वाले पाकिस्तान की निकली हेकड़ी, सूखा गला, ईद पर भी पानी के लिए तरसा!
Image Source: IANS
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भारत द्वारा सिंधु जल समझौते (IWT) को स्थगित करने का असर पाकिस्तान पर साफ दिखने लगा है. पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में पानी की भारी किल्लत से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है. भीषण गर्मी के इस मौसम में ईद मना रहे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. इस समस्या को सिंधु जल समझौते से जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस वाटर ट्रीटी को निलंबित कर दिया था. इसके बाद पाकिस्तान की पानी सुरक्षा, कृषि और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है, वहीं कराची जैसे शहरों में रोजमर्रा का पानी भी लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है.

भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद जिस सिंधु जल समझौते को सस्पेंड करने का फैसला लिया था, उसका असर अब पाकिस्तान पर पड़ने लगा है. अब तक ठंड, बारिश, नमी और वॉटर स्टॉक की वजह से पानी की समस्या को टालने वाला पाकिस्तान अब बूंद-बूद को तरसने लगा है. खबर के मुताबिक पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर और कारोबारी हब कराची में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है. लोग पानी की किल्लत से बेहाल होते जा रहे हैं. बीती ईद पर भी लोगों का बुरा हाल था. कहा जा रहा है कि पाकिस्तान में पानी को लेकर हाहाकार मचने वाली है और ये सब सिंधु जल समझौते के रद्द होने की वजह से हो रहा है. इसके बाद से ही पाकिस्तान में पीने का पानी, कृषि और अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बढ़ गया है. पंजाब से लेकर कराची तक, पानी आम लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है.

कराची के 70 फीसदी हिस्से में पानी की सप्लाई ठप 

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पाकिस्तानी मीडिया 'एआरवाई न्यूज' की खबर के मुताबिक कराची में जल संकट इतनी भयानक है कि टैंकर माफिया एक्टिव हो गए हैं. इतना ही नहीं कराची का 70% हिस्से में पानी की आपूर्ति ठप पड़ गई है. वहीं चिलचिलाती गर्मी और बढ़ते तापमान ने चुनौती को और बढ़ा दिया है. कराची के कई इलाके मसलन लियारी, ओरंगी, कोरंगी, मलीर, गुलशन-ए-इकबाल, DHA, क्लिफ्टन आदि में नल सूख गए हैं. ईद की कुर्बानी, पानी, सफाई आदि जरूरतों के लिए लोगों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ा, जिसके लिए कई हफ्ते की वेटिंग और दोगुनी कीमत देनी पड़ रही है.

ARY के मुताबिक गुलिस्तान-ए-जौहर, गुलशन-ए-इकबाल, अजीजाबाद, लियाकतबाद, नॉर्थ नाजिमाबाद, नाजिमाबाद और नॉर्थ कराची जैसे इलाकों में हालात तो और भी बद से बदतर हैं. इन जगहों पर पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से पानी की सप्लाई ठप पड़ी हुई है. भारत की ओर से सिंधु समझौते को रद्द करने और अपनी ओर के पानी को पाकिस्तान की ओर जाने देने से रोकने के कारण पाकिस्तान पर पानी सप्लाई और कंजर्वेशन को लेकर चौतरफा दबाव है. अब इस तपती गर्मी ने तो पाकिस्तान में जल संकट को और भी गहरा दिया है.

कराची में जल संकट भयावह

आपको बता दें कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले शहर कराची (आबादी लगभग 2.5 से 3 करोड़ के बीच) में पानी की किल्लत एक गंभीर रूप ले चुकी है. यह महानगर लंबे समय से पानी की भारी कमी का सामना कर रहा है. वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, शहर को हर दिन करीब 1200 मिलियन गैलन (MGD) पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन इसके मुकाबले आपूर्ति केवल 650 MGD ही हो पाती है, जो कि जरूरत का लगभग आधा है.

पाकिस्तान में टैंकर माफिया एक्टिव

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आपूर्ति की इस कमी के कारण कई कॉलोनियों में कई-कई दिनों तक नल सूखे रहते हैं. हाल ही में, मई 2026 के दौरान बिजली कटौती और जर्जर पाइपलाइनों के फटने से यह समस्या और भी विकराल हो गई. ओरंगी टाउन जैसी गरीब बस्तियों की हालत तो और भी खराब है, जहां हफ्तों तक पानी की एक बूंद नहीं पहुंचती. ऐसे में लोगों को मजबूरी में ऊंचे दामों पर पानी के टैंकर खरीदने पड़ते हैं. दूषित जल के सेवन से बच्चों और बुजुर्गों में डायरिया, हैजा और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियां तेजी से पनप रही हैं. इस पूरी समस्या के पीछे टैंकर माफिया, पुरानी और रिसने वाली पाइपलाइनें, अवैध कनेक्शन और बिना सोचे-समझे हो रहा शहरीकरण मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं. गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के साथ ही यह जल संकट पूरी तरह से बेकाबू हो जाता है.

सिंधु जल समझौता रद्द होने से मची पाकिस्तान में तबाही

इतना ही नहीं ऐतिहासिक सिंधु जल समझौते के अंतर्गत पाकिस्तान को सिंधु, चेनाब और झेलम नदियों के पानी पर प्रमुख अधिकार प्राप्त था. ये नदियां ही पाकिस्तान की 80 प्रतिशत से अधिक कृषि सिंचाई और पनबिजली उत्पादन की जीवन रेखा हैं.

इस संधि के निलंबित होने का सीधा असर सिंध और पंजाब प्रांतों में बोई जाने वाली खरीफ की फसलों पर पड़ा है. स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में पानी की लगभग 13 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है. इसके अलावा, भारत द्वारा बगलिहार और किशनगंगा बांधों से जल प्रवाह को अस्थायी रूप से नियंत्रित किए जाने से पाकिस्तान के अंदर घबराहट और अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया.

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अगर भविष्य में भारत पानी को रोकने के लिए नए बांध और जल भंडारण परियोजनाएं शुरू करता है, तो पाकिस्तान को दीर्घकालिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. पाकिस्तानी हुकूमत का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम से देश की 24 करोड़ की आबादी के सामने पेयजल, खाद्य सुरक्षा और बिजली उत्पादन का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है.

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