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बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान! सिर्फ सिंधु ही नहीं पानी के एक और बड़े संकट से घिरा, 75 फीसदी ग्लेशियर सूखने से मचा हड़कंप

भारत के साथ सिंधु जल संधि समझौता रद्द होने के बाद पहले से ही जल संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को एक और बड़ा झटका लगा है. एक स्टडी में दावा किया गया है कि हिंदू कुश पर्वत का ग्लेशियर 75 फीसदी तक पिघलने से काबुल नदी के प्रवाह पर असर पड़ेगा, जिसकी वजह से पाकिस्तान को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ सकता है.

बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान! सिर्फ सिंधु ही नहीं पानी के एक और बड़े संकट से घिरा, 75 फीसदी ग्लेशियर सूखने से मचा हड़कंप
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भारत के साथ सिंधु जल संधि समझौता रद्द होने और पहले से ही जल संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान के ऊपर एक और संकट मंडराने लगा है. एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वैश्विक तापमान में अगर 2 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है, तो हिंदू कुश हिमालय ग्लेशियर की बर्फ सदी के अंत तक 75 फीसदी तक सूख सकते हैं. बता दें कि यह कुश पर्वत नदियों का सबसे ऊंचा स्थल है. यहीं से ग्लेशियर से पानी आता है. इन नदियों के जल से करीब दो अरब लोगों की आजीविका चलती है. ऐसे में इस डराने वाली रिपोर्ट से तय है कि अगर ऐसा हुआ, तो हेलमंद नदियां सूख जाएंगी. इसकी वजह से पाकिस्तान और अफगानिस्तान को सबसे बड़ा झटका लगेगा. 

पाकिस्तान पर एक और जल संकट मंडराया

भारत के साथ पहले से ही सिंधु जल संधि समझौते के रद्द होने के बाद जल संकट से जूझ रहा पाकिस्तान को एक और बड़ा झटका लगा है. हिंदू कुश पर्वत के ग्लेशियर पिघलने से काबुल नदी के प्रवाह पर असर पड़ेगा, जिसकी वजह से पाकिस्तान को सीधे तौर पर बड़ा नुकसान होगा. जानकारी के लिए बता दें कि काबुल नदी हिंदू कुश के संगलाख नदी से निकलती है और यह पाकिस्तान के एटक नदी से होते हुए सिंधु नदी में जाकर मिलती है. 

स्टडी में क्या कहा गया है? 

बता दें कि विज्ञान पत्रिका 'साइंस' में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि यदि देश तापमान वृद्धि को पूर्व औद्योगिक स्तर से डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रख सके, तो हिमालय हिमालय और काॅकेशस पर्वत में ग्लेशियर 40 से 45 प्रतिशत तक बर्फ संरक्षित कर पाएगा. वहीं इसके विपरीत अगर इस नदी के अंत तक दुनिया 2.7 डिग्री सेल्सियस तक गर्म होती है, तो वैश्विक स्तर पर ग्लेशियर की बर्फ का एक चौथाई हिस्सा ही बचेगा. 

अमेरिका, कनाडा की पर्वत श्रृंखलाएं बुरी तरह से प्रभावित होंगे 

इस अध्ययन में यह भी दावा किया गया है कि मानव समुदायों के लिए सबसे महत्वपूर्ण ग्लेशियर क्षेत्र यूरोपियन, पश्चिमी अमेरिका और कनाडा की पर्वत श्रृंखलाएं तथा आइसलैंड बुरी तरीके से प्रभावित होंगी. यह सभी 2 डिग्री सेल्सियस पर बर्फ खो सकते हैं. वहीं स्कैंडिनेविया पर्वत का भविष्य और भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है. क्योंकि यहां पर बर्फ ही नहीं बचेगी. 

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ग्लेशियर के मुद्दे पर विश्व के नेताओं की बैठक 

ग्लेशियर के इस गंभीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के लिए विश्व भर के नेता तजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में इक्कठे हो रहे हैं. इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के नेता भाग लेंगे. इनमें 30 देशों के मंत्री स्तरीय या उच्च स्तर अधिकारी शामिल होंगे.

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