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'मेरी राय अलग थी, फिर भी...', अमेरिका-ईरान समझौते पर सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने दिया चौंकाने वाला बयान

अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते पर ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने कहा कि उन्हें इस MoU को लेकर कुछ संदेह थे, लेकिन राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और सुरक्षा अधिकारियों के भरोसे के बाद उन्होंने इसे मंजूरी दे दी.

'मेरी राय अलग थी, फिर भी...', अमेरिका-ईरान समझौते पर सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने दिया चौंकाने वाला बयान
Image Source: X@WhiteHouse/ Xinhua via IANS
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अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति को समाप्त करने और तनाव घटाने के उद्देश्य से हुए समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हस्ताक्षर कर दिए हैं. हालांकि इस समझौते के बाद अब ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का बयान चर्चा का विषय बन गया है.

 समझौते को लेकर थे संदेह, फिर भी दी मंजूरी

समझौते पर पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए मोजतबा खामेनेई ने स्वीकार किया कि अमेरिका के साथ हुए इस एमओयू को लेकर उनके मन में कई आपत्तियां और संदेह थे. उन्होंने कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय इस समझौते के पक्ष में पूरी तरह नहीं थी. इसके बावजूद उन्होंने इसे मंजूरी दी, क्योंकि राष्ट्रपति पेजेश्कियान और देश के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने भरोसा दिलाया था कि ईरान के राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

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अधिकारियों के आश्वासन पर लिया फैसला

मोजतबा खामेनेई ने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया था कि समझौते के दौरान ईरान के अधिकारों, रणनीतिक हितों और उसके सहयोगी देशों के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी. इसी भरोसे के आधार पर उन्होंने इस महत्वपूर्ण निर्णय को स्वीकृति दी.

ट्रंप पर लगाया दबाव बनाने का आरोप

अपने बयान में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी निशाना साधा. खामेनेई का कहना था कि ट्रंप ने इस समझौते को अस्तित्व में लाने के लिए काफी दबाव और प्रभाव का इस्तेमाल किया. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान ने अपने हितों को ध्यान में रखते हुए ही इस प्रक्रिया में भाग लिया.

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आलोचकों को दिया साफ संदेश

सुप्रीम लीडर ने देश के भीतर समझौते की आलोचना करने वाले वर्ग को भी संदेश दिया. उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि अमेरिका के साथ आमने-सामने की बातचीत होती है, तो इसका अर्थ यह नहीं होगा कि ईरान अमेरिकी दृष्टिकोण को स्वीकार कर रहा है. ईरान अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों के आधार पर ही आगे बढ़ेगा.

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बताते चलें कि मोजतबा ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य की बातचीत में वॉशिंगटन अत्यधिक या अस्वीकार्य मांगें रखता है, तो तेहरान उन्हें स्वीकार नहीं करेगा. उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब दोनों देश 60 दिनों की महत्वपूर्ण वार्ता अवधि में प्रवेश कर चुके हैं. ऐसे में दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह समझौता क्षेत्रीय शांति की दिशा में कितना सफल साबित होता है.

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