×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

भारत को जो चाहिए वो देंगे...होर्मुज संकट के बीच रूस का बड़ा ऐलान, रक्षा से लेकर तेल तक, झंझट खत्म

भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और रूस, भारत की वैश्विक भूमिका का पूरा समर्थन करता है.

भारत को जो चाहिए वो देंगे...होर्मुज संकट के बीच रूस का बड़ा ऐलान, रक्षा से लेकर तेल तक, झंझट खत्म
Image Source: IANS- Denis Alipov (File Photo)
Advertisement

भारत और रूस के बीच रिश्ते एक बार फिर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं. भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने हाल ही में दोनों देशों के संबंधों को लेकर खुलकर बात की और साफ किया कि यह साझेदारी सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा, ऊर्जा और वैश्विक राजनीति तक गहराई से फैली हुई है. उन्होंने कहा कि रूस, भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को न सिर्फ स्वीकार करता है, बल्कि उसका पूरा समर्थन भी करता है.

राष्ट्राध्यक्षों के दौरे से बढ़ेगा भरोसा

उच्च स्तरीय संपर्क दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत माने जाते हैं. WION को दिए एक इंटरव्यू में राजदूत अलीपोव ने संकेत दिया कि आने वाले समय में भारत और रूस के बीच बड़े स्तर पर दौरे देखने को मिल सकते हैं. सितंबर 2026 में भारत की अध्यक्षता में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर खास उत्साह है. उम्मीद जताई जा रही है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इसमें शामिल होने के लिए भारत का दौरा कर सकते हैं. पिछले साल पुतिन के भारत दौरे के बाद अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूस दौरे की तैयारियां भी चल रही हैं. यह लगातार बढ़ते संवाद इस बात का संकेत हैं कि दोनों देश अपने रिश्तों को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.

रक्षा क्षेत्र में भरोसे की मिसाल

Advertisement

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग हमेशा से मजबूत रहा है और अब इसमें नई तकनीकों की भी एंट्री हो रही है. अलीपोव ने बताया कि S-400 वायु रक्षा प्रणाली की बची हुई खेप जल्द ही भारत को मिल जाएगी. यह सिस्टम भारत की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है. इसके अलावा ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल और ‘AK-203’ असॉल्ट राइफल जैसे प्रोजेक्ट दोनों देशों के सफल सहयोग के उदाहरण हैं. ये सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि तकनीकी साझेदारी का प्रतीक हैं. खास बात यह भी सामने आई कि भारत ने रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान SU-57 में दिलचस्पी दिखाई है. हालांकि, कुछ रक्षा सौदों की जानकारी सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं की जा रही है.

ऊर्जा सुरक्षा में रूस बना भरोसेमंद साथी

आज के समय में ऊर्जा सुरक्षा किसी भी देश के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुकी है. इस मामले में रूस भारत के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरा है. अलीपोव ने स्पष्ट कहा कि वैश्विक तनाव या पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर रूस-भारत ऊर्जा आपूर्ति पर नहीं पड़ेगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि रूस भारत को उसकी जरूरत के अनुसार कच्चा तेल और LPG सप्लाई करता रहेगा. उनके अनुसार, रूस हमेशा से एक स्थिर और भरोसेमंद पार्टनर रहा है, जबकि अमेरिका और यूरोपीय देशों पर उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए. उनका मानना है कि प्रतिबंधों और टैरिफ के जरिए पश्चिमी देश भारत-रूस संबंधों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं.

पश्चिम एशिया तनाव पर रूस का सख्त रुख

Advertisement

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर रूस ने अपना रुख साफ रखा है. अलीपोव ने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि ईरान को अपने अस्तित्व और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का अधिकार है. उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ युद्धविराम से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि एक दीर्घकालिक कूटनीतिक हल जरूरी है. मध्य पूर्व में अस्थिरता का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार और आर्थिक संतुलन पर भी पड़ता है.

100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य

भारत और रूस अब आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ा लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं. दोनों देशों ने 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य तय किया है, जिसे अलीपोव ने पूरी तरह संभव बताया. फिलहाल तेल आयात के कारण व्यापार संतुलन भारत के खिलाफ है, लेकिन इसे सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं. रूस चाहता है कि भारत से कृषि उत्पाद, मशीनरी और हाई-टेक सामानों का निर्यात बढ़े. खास बात यह है कि दोनों देशों के बीच अब करीब 95 प्रतिशत व्यापार राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम हो रही है.

Advertisement

यह भी पढ़ें

बताते चलें कि भारत और रूस के रिश्ते सिर्फ परंपरागत दोस्ती तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अब यह एक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं. रक्षा, ऊर्जा और व्यापार जैसे अहम क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग यह दिखाता है कि दोनों देश बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच एक-दूसरे के मजबूत सहायक बनकर उभर रहे हैं. आने वाले समय में यह साझेदारी और गहराई ले सकती है, जिसका असर वैश्विक राजनीति पर भी साफ नजर आएगा.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें