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'ये एहसान कभी नहीं भूलेंगे...', चीन ने पहली बार सार्वजनिक मंच से भारतीय सेना को बोला- धन्यवाद, जानें क्या है इसकी बड़ी वजह

चीन ने पहली बार भारतीय सेना की सार्वजनिक रूप से सराहना की. केरल तट पर 12 चीनी नागरिकों की जान बचाने पर PLA समारोह में भारत का धन्यवाद किया.

'ये एहसान कभी नहीं भूलेंगे...', चीन ने पहली बार सार्वजनिक मंच से भारतीय सेना को बोला- धन्यवाद, जानें क्या है इसकी बड़ी वजह
Image Source: X/ @China_Amb_India
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भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद और सैन्य तनाव की वजह से लगातार चर्चा में रहे हैं. हालांकि अब दोनों देशों के बीच रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के सकारात्मक संकेत दिखाई देने लगे हैं. इसी कड़ी में चीन की ओर से आया एक बयान काफी अहम माना जा रहा है. चीन ने पहली बार सार्वजनिक मंच से भारतीय सेना की सराहना करते हुए उसका धन्यवाद किया है. यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने और आपसी विश्वास बहाल करने की कोशिशें लगातार जारी हैं. यह बयान भविष्य के लिए काफी अहम माना जा रहा है. 

चीन ने क्यों जताया भारतीय सेना का आभार?

भारत में चीन के डिफेंस अताशे रियर एडमिरल यू जियान ने पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की 99वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में भारतीय सेना का विशेष रूप से आभार जताया. उन्होंने कहा कि जून 2025 में केरल तट के पास आग और धमाके का शिकार हुए एक कार्गो जहाज से 12 चीनी क्रू मेंबरों को सुरक्षित बचाने में भारतीय सेना और बचाव एजेंसियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उन्होंने कहा कि चीन इस मदद को कभी नहीं भूलेगा और यह दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है. स्थापना दिवस के मौके पर सामने आया यह बयान बताता है कि भारतीय सेना की मुस्तैदी का लोहा चीन ने भी माना है. 

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भारत-चीन संबंधों में सुधार के दिए संकेत

यू जियान ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और चीन केवल पड़ोसी देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की दो बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी हैं. उन्होंने कहा कि दोनों देश विकास के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं और दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में द्विपक्षीय संबंध एक बार फिर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. उनके मुताबिक, मतभेदों के बावजूद साझा हित कहीं अधिक बड़े हैं और इन्हीं पर आगे बढ़ने की जरूरत है. और आने वाले दिनों में यही होगा भी. 

संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों का किया जिक्र

चीनी डिफेंस अताशे ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारतीय और चीनी सेनाओं ने कई अंतरराष्ट्रीय मिशनों में साथ काम किया है और वैश्विक शांति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उनका मानना है कि भविष्य में भी दोनों देशों की सेनाएं बेहतर तालमेल और संवाद के जरिए क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत कर सकती हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चीन भारत के साथ सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत को और मजबूत करना चाहता है. उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच नियमित संवाद, आपसी विश्वास और सहयोग बढ़ाना समय की जरूरत है. इससे न केवल दोनों देशों के संबंध बेहतर होंगे, बल्कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी.

मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकातों के बाद बदला माहौल

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इन सबके बीच सबसे बड़ी ध्यान देने वाली बात यह है कि यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल के महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकातों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है. दोनों पक्ष कई मुद्दों पर बातचीत जारी रखे हुए हैं और संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहे हैं.

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बहरहाल, भारतीय सेना के प्रति चीन का सार्वजनिक आभार सिर्फ एक औपचारिक धन्यवाद नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने और रिश्तों को नई दिशा देने वाले अहम संकेत के रूप में देखा जा रहा है. आने वाले समय में यह सकारात्मक माहौल भारत और चीन के संबंधों को कितना आगे ले जाता है, ऐसे में पूरी दुनिया की निगाहें इसी पर टिकी होंगी. 

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