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US की 'टैरिफ चाल' के बीच भारत के लिए बड़ी खुशखबरी... न्यूजीलैंड में भारतीय सामानों पर खत्म होगी ड्यूटी, FTA को संसद की मंजूरी
न्यूजीलैंड की संसद ने भारत के साथ FTA लागू करने वाले बिल को 93-29 से मंजूरी दे दी. समझौते के बाद भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड में जीरो-ड्यूटी बाजार मिलेगा, जिससे निर्यात और MSME सेक्टर को फायदा होने की उम्मीद है.
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वैश्विक व्यापार को लेकर अमेरिका की चाल से बढ़ती हलचल के बीच भारत के लिए न्यूजीलैंड से एक बड़ी आर्थिक खबर सामने आई है. न्यूजीलैंड की संसद ने भारत के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लागू करने से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है. बुधवार को यह बिल 93-29 के बहुमत से पास हुआ. खास बात यह रही कि सरकार के साथ विपक्षी लेबर पार्टी ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया. अब जरूरी कानूनी और औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद समझौते के लागू होने का रास्ता साफ हो गया है.
भारतीय उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार
इस FTA की सबसे अहम बात भारतीय निर्यातकों को मिलने वाली शुल्क संबंधी राहत है. समझौता प्रभावी होने के बाद न्यूजीलैंड भारतीय निर्यात की सभी टैरिफ लाइनों पर ड्यूटी खत्म करेगा. यानी भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले सामानों को वहां जीरो-ड्यूटी बाजार पहुंच मिलेगी. इसका सीधा फायदा कपड़ा, परिधान, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग सामान, दवाओं, प्रोसेस्ड फूड और दूसरे क्षेत्रों में काम करने वाले कारोबारियों को मिल सकता है. भारत के छोटे कारोबार (MSME) सेक्टर के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है. शुल्क कम होने से भारतीय उत्पाद न्यूजीलैंड के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमत पर पहुंच सकेंगे. खासकर श्रम आधारित उद्योगों में निर्यात बढ़ने से रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना जताई गई है.
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न्यूजीलैंड के सामानों पर भी घटेगा शुल्क
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FTA का लाभ केवल भारत को मिलने वाली बाजार पहुंच तक सीमित नहीं है. भारत ने न्यूजीलैंड के करीब 95 प्रतिशत द्विपक्षीय व्यापार को कवर करने वाले उत्पादों के लिए बाजार पहुंच देने पर सहमति जताई है. हालांकि भारत ने डेयरी और कई संवेदनशील कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों को बाहर रखा है, ताकि घरेलू किसानों और संबंधित उद्योगों के हित सुरक्षित रहें. इसके साथ ही भारत-न्यूजीलैंड FTA में व्यापार के साथ निवेश पर भी जोर दिया गया है. न्यूजीलैंड की ओर से अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई है. यह निवेश कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, बुनियादी ढांचे, स्टार्टअप, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है.
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पीएम मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा से रिश्तों को मिली नई दिशा
जानकारी देते चलें कि भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में FTA के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा ने भी नई गति दी. जुलाई में न्यूजीलैंड पहुंचे पीएम मोदी ने वहां के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ महत्वपूर्ण मुलाकात की. इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई और कई समझौतों पर सहमति बनी. बैठक में आने वाले चार वर्षों के दौरान भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों को और व्यापक बनाने पर जोर दिया गया. इसके साथ ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने और दोनों देशों की सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर भी सहमति बनी. भारतीय नौसेना और न्यूजीलैंड डिफेंस फोर्स के बीच सहयोग को विस्तार देने का फैसला भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया. दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है. इसके तहत व्यापार को करीब 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने की दिशा में काम करने पर सहमति बनी है. ऐसे में भारत-न्यूजीलैंड FTA और दोनों नेताओं की बातचीत को आर्थिक साझेदारी के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है.
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भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता?
भारत और न्यूजीलैंड के बीच FTA पर 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षर हुए थे. अब न्यूजीलैंड की संसद की मंजूरी के बाद यह समझौता लागू होने की दिशा में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ा है. ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में टैरिफ और व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, भारत के लिए न्यूजीलैंड जैसे बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच निर्यात के लिहाज से अहम अवसर पैदा कर सकती है.
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बताते चलें कि इस समझौते से केवल बड़े निर्यातकों को ही नहीं, बल्कि छोटे कारोबारियों, कारीगरों, किसानों से जुड़े उद्यमों और रोजगार आधारित उद्योगों को भी नए बाजार मिलने की उम्मीद है. आने वाले समय में FTA के लागू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देशों के बीच व्यापार वास्तव में किस गति से बढ़ता है.