पटना हिंसा के पीछे कौन? पुलिस खंगाल रही हर एंगल, अब तक 500 पर FIR, हिरासत में लिए गए 40 प्रदर्शनकारी
पटना में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने 500 अज्ञात पर FIR दर्ज की है, जबकि करीब 40 लोगों को हिरासत में लेकर वीडियो और CCTV के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है.
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देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ कई दिनों से जारी कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के बाद अलग-अलग शहरों में भी छात्रों का आक्रोश देखने को मिल रहा है. इसी कड़ी में बिहार की राजधानी पटना में भी बुधवार को उग्र प्रदर्शन हुआ. अब इस मामले में पटना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 500 अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. वहीं पुलिस ने अभी तक क़रीब 40 लोगों को हिरासत में लिया है. ये सभी कार्रवाई कोतवाली, गांधी मैदान और सचिवालय थाना की पुलिस ने किया है.
दरअसल, एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे तमाम वीडियो और सीसीटीवी फुटेज के आधार प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़प करने वालों की पहचान की जारी है. जानकारी देते चलें कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया. जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं. इसके साथ ही पुलिस की गाड़ियों को भी क्षतिग्रस्त किया गया. इसमें कई आम लोग को भी चोटिल हुए.
CM सम्राट के घर के बाहर भी हुआ था बवाल
प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सरकारी आवास के नजदीक तक पहुंच गए, जहां भी हंगामे की स्थिति बनी. इसके बाद पुलिस ने कदमकुआं, गांधी मैदान, बोरिंग रोड समेत कई इलाकों में लगातार छापेमारी अभियान चलाया. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतने बड़े प्रदर्शन की तैयारी कैसे हुई, हालात अचानक हिंसक क्यों बने और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका रही. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान क्या थी और हिंसा भड़काने में किसका हाथ था. पुलिस सोशल मीडिया गतिविधियों और कुछ यूट्यूबर व इंटरनेट कंटेंट क्रिएटर्स की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है. शुरुआती आशंका है कि छात्र आंदोलन की आड़ में बड़ी संख्या में असामाजिक तत्व शामिल हो गए थे, जिन्होंने माहौल को हिंसक बनाने में अहम भूमिका निभाई. फिलहाल पुलिस हर पहलू से मामले की गहन जांच कर रही है.
कई बिंदुओं से हो रही जांच
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक शुरुआती पड़ताल में संकेत मिले हैं कि प्रदर्शन को बड़े स्तर पर सोशल मीडिया पर दिखाने के लिए बड़ी संख्या में कंटेंट क्रिएटर्स को सक्रिय किया गया था. इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि अलग-अलग कोचिंग संस्थानों के छात्रों को समझाकर या प्रभावित कर प्रदर्शन में शामिल कराया गया. इन पहलुओं की पुष्टि के लिए पुलिस साक्ष्य जुटा रही है.
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गौरतलब है कि नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बुधवार को पटना में गांधी मैदान से राजभवन तक छात्रों ने मार्च निकाला था. इस दौरान प्रदर्शन हिंसक हो गया और कई जगहों पर हंगामे की घटनाएं सामने आईं. इसके बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई तेज करते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है.