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'गांधी जी नहीं, नेताजी की भाषा में जवाब मिलेगा', CM सुवेंदु की टुकड़े-टुकड़े गैंग को चेतावनी, कहा- बंगाल भगवा की धरती

बंगाल सीएम सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल राज्य में देश की अखंडता को चुनौती देने वाली ताकतों को सीधी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर कश्मीर मांगे आजादी जैसे नारे लगाए जाते हैं तो इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे.

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10 Sep 2026
( Updated: 10 Sep 2026
05:44 PM )
'गांधी जी नहीं, नेताजी की भाषा में जवाब मिलेगा', CM सुवेंदु की टुकड़े-टुकड़े गैंग को चेतावनी, कहा- बंगाल भगवा की धरती
Suvendu Adhikari/ Videograb (IANS)
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बंगाल सीएम सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल राज्य में देश की अखंडता को चुनौती देने वाली ताकतों को सीधी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर कश्मीर मांगे आजादी जैसे नारे लगाए जाते हैं तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

आजदी के नारे लगाएंगे तो गांधी नहीं नेताजी की भाषा में मिलेगा जवाब!

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल को गेरुआ यानी कि भगवा की धरती करार दिया है. उन्होंने बंगाल की यूनिवर्सिटी विशेषकर जादवपुर आदि में देश विरोधी नारों-कश्मीर की आजादी को लेकर स्लोगन पर तगड़ी चेतावनी दी. उन्होंने दो टूक कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी में राष्ट्र-विरोधी ताकतों" के समर्थकों को सख्त इलाज की ज़रूरत है.  उन्होंने गुरुवार को कहा कि अगर कैंपस में 'कश्मीर मांगे आज़ादी' जैसे नारे लगाए जाते हैं, तो सरकार महात्मा गांधी की नहीं, बल्कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भाषा में बात करेगी.

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बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के मांस से जुड़े बयान पर हुए हालिया विवाद के बारे में अधिकारी ने कहा कि वह कोलकाता पुलिस कमिश्नर को निर्देश दे रहे हें कि वे उन लोगों को गिरफ्तार करें जिन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हालिया विरोध प्रदर्शन के दौरान धर्मगुरु की तस्वीरें जलाई थीं. उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल गेरुआ यानी भगवा की धरती है और गेरुआ का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि बंगाल भगवा की धरती है.

'अगर दुर्गा पूजो नहीं लिखा तो कम्युनिस्टों को स्टॉल लगाने नहीं देंगे'

इसके अलावा उन्होंने दुर्गा पूजा के संदर्भ में कम्युनिस्ट संगठनों के स्टॉल को लेकर भी सख्त बयान दिया. उन्होंने कहा कि अगर कम्युनिस्ट अपने स्टॉल पर 'दुर्गा पूजा' नहीं लिखते हैं, तो उन्हें किसी भी कीमत पर स्टॉल लगाने न दें.

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वहीं टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ के यूनिवर्सिटी के बीच ट्रांसफर की सुविधा देने वाले संशोधन बिल को पेश करते समय विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून के ज़रिए "तथाकथित पंडितों" को नए बने संस्थानों में भेजा जाएगा, जिससे उन संस्थानों को फायदा होगा.

उन्होंने कहा, "यह बिल संस्थानों की स्वायत्तता और सरकार के प्रति जवाबदेही के बीच संतुलन बनाएगा. इसका PhD सुपरविज़न और प्रोजेक्ट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा. जो लोग बिल के प्रावधानों से खुश नहीं हैं, वे अपनी नौकरी छोड़ सकते हैं."

मुख्यमंत्री ने कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी को 1,300 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलेगी, लेकिन भारत को तोड़ने की बात करने वालों ("भारत तेरे टुकड़े होंगे") को टुकड़ों में तोड़ दिया जाएगा.

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सुवेंदु अधिकारी की टुकड़े-टुकड़े गैंग को चेतावनी!

इसके अलावा सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि आलिया यूनिवर्सिटी को भी एक जगह लाया गया है. शिक्षा बिल का भी उन्होंने पूरा समर्थन किया और कहा कि लोग जानते हैं कि यह बिल क्यों लाया गया है, समझदारों के लिए इशारा ही काफी है.

जादवपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर गोपाल सेन की 1970 में हुई हत्या का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ज़रूरत पड़ने पर सरकार इस घटना की जांच के लिए एक पैनल बनाएगी.

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उन्होंने कहा कि विपक्ष पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इसलिए हारा क्योंकि उन्होंने भगवा रंग का "अपमान" किया था, साथ ही उन्होंने दावा किया कि आने वाले उपचुनावों में भी उनकी हार तय है.

'बंगाल में एक राज्य, एक शिक्षा नीति'

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आपको बताएं कि बंगाल सरकार पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय प्रशासन एवं विनियमन (संशोधन) विधेयक 2026 का उद्देश्य राज्य में "एक राज्य, एक शिक्षा" नीति को लागू करना चाह रही है. इसके जरिए राज्य की यूनिवर्सिटियों में टीचर्स और स्टाफ का ट्रांसफर हो पाएगा. इतना ही नहीं केवल शहरी क्षेत्रों में मठाधीश की तरह बैठे लोगों के खिलाफ भी एक्शन लिया जा सकेगा और ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में बने विश्वविद्यालयों में भी अच्छे टीचर्स की सेवा मिल पाएगी.

राज्य मंत्रिमंडल ने विधेयक को मंजूरी दे दी, विधानसभा में भी इस पर चर्चा हुई है. राज्यपाल आर. एन रवि के कार्यालय में सहमति के बाद यह अधिनियम बन जाएगा.

विधेयक में शामिल प्रमुख प्रस्तावों की व्याख्या करते हुए राज्य के उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि इसमें विभिन्न राज्य संचालित विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और गैर शिक्षण कर्मचारियों के तबादलों से संबंधित दिशानिर्देश निर्दिष्ट किए जाएंगे.

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एक ही विश्वविद्यालयों में लंबे समय से पढ़ा रहे शिक्षकों का हो सकेगा ट्रांसफर

राज्य के उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया, "विधेयक में कोलकाता या अन्य बड़े शहरों के पुराने सरकारी विश्वविद्यालयों में लंबे समय से पढ़ा रहे शिक्षकों को नए विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है. यह नीति विभिन्न सरकारी विश्वविद्यालयों से जुड़े शैक्षणिक कर्मचारियों पर भी लागू होती है."

राज्य के शिक्षाविदों का मानना है कि इस प्रस्ताव से राज्य के शैक्षणिक जगत में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है. राज्य द्वारा संचालित विश्वविद्यालय मूलतः स्वायत्त निकाय हैं, इसलिए राज्य द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों के शिक्षक, अधिकारी या शिक्षाकर्मी सीधे तौर पर राज्य सरकार के कर्मचारी नहीं होते हैं.

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अतः स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या यह तबादला आपसी सहमति से होगा या शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों का तबादला सरकार की इच्छा पर होगा. हालांकि इन सभी बातों का स्पष्टीकरण विधेयक के विधानसभा में पेश होने और पारित होने के बाद ही मिलेगा. अधिकारी ने बताया कि विधेयक में एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव आलिया विश्वविद्यालय को पश्चिम बंगाल उच्च शिक्षा विभाग के अधीन लाना है.

सरकार के अधीन आएगा आलिया विश्वविद्यालय

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अब तक आलिया विश्वविद्यालय पश्चिम बंगाल अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र में था. आलिया विश्वविद्यालय अधिनियम पश्चिम बंगाल विधानसभा में दिवंगत बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल में 2007 में पारित किया गया था. यह 5 अप्रैल 2008 से प्रभावी हुआ. प्रशासन ने दावा किया है कि इस विधेयक का उद्देश्य मानव संसाधनों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है और इसी कारण से यह कदम उठाया गया है.

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि राज्य के पुराने और पारंपरिक विश्वविद्यालयों में लंबे समय के अनुभव वाले शिक्षक और प्रशासनिक कर्मचारी हैं जिनका उपयोग किया जाना चाहिए.

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मुख्यमंत्री ने कहा, "नए विश्वविद्यालयों में उस अनुभव का उपयोग करना आवश्यक है. यदि कुशल प्रोफेसर और कर्मचारी नए संस्थानों में जाते हैं, तो वहां शिक्षण, अनुसंधान और प्रशासनिक ढांचे की गुणवत्ता में तेजी से सुधार होगा. उच्च शिक्षा के समग्र संतुलन को बनाए रखने के लिए यह पहल की जा रही है."

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