जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

MLC चुनाव में ब्राह्मणों ने RJD को जिता दिया, फिर क्यों टेंशन में आए तेजस्वी यादव, किस बात का सता रहा डर

बिहार में हाल में ही हुए MLC चुनाव में दरभंगा स्नातक सीट से RJD उम्मीदवार की जीत हुई, वहीं बीजेपी अपने ही गढ़ में हार गई. राजनीति के जानकारों की मानें तो इस जीत ने तेजस्वी को खुशी से ज्यादा टेंशन दे दी है. आखिर उन्हें किस बात का डर सता रहा है.

Author
30 Oct 2026
( Updated: 30 Oct 2026
12:49 PM )
MLC चुनाव में ब्राह्मणों ने RJD को जिता दिया, फिर क्यों टेंशन में आए तेजस्वी यादव, किस बात का सता रहा डर
Image Source-IANS
Advertisement

Darbhanga MLC Election Result: बिहार विधान परिषद (MLC) की आठ सीटों के चुनाव परिणामों ने एक ओर जहां जन सुराज और RJD को संजीवनी देने का काम किया है, वहीं सत्ताधारी NDA के लिए भी आत्म-मंथन की जरूरत आन पड़ी है. यहां पटना से लेकर दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र तक में बड़ा उलटफेर देखने को मिला. एक ओर जहां आरजेडी ने बीजेपी के गढ़ पटना में सेंध लगा दी, तो वहीं दरभंगा में भी भाजपा के निवर्तमान विधान पार्षद और उम्मीदवार सर्वेश कुमार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार अनिल कुमार झा ने पटखनी दे दी.

बिहार MLC चुनाव में जीत के बाद भी टेंशन में क्यों तेजस्वी यादव?

कहा जा रहा है कि तेजस्वी के लिए यह जीत खुशी से ज्यादा चिंता की भी बात है. ऐसा इसलिए क्योंकि अनिल झा जाति से ब्राह्मण हैं और यहां उनकी जीत से RJD के पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण के खिसकने का डर पैदा हो गया है.

इतिहास उठाकर देखें तो मिथिला में RJD-BJP की तगड़ी लड़ाई रही है. यहां एक ओर जहां सवर्ण, बीजेपी के कैडर वोटर रहे हैं, तो वहीं मुस्लिम-यादवों ने हमेशा से लालू का खुलकर साथ दिया है. हालांकि, यह परंपरा इस एमएलसी चुनाव में बदलती नज़र आई और आरजेडी ने बीजेपी के कोर वोट बैंक और समर्थक वर्ग में सेंध लगा दी. इतना ही नहीं, जिन ब्राह्मणों ने हमेशा आरजेडी का खुलकर विरोध किया और बीजेपी का साथ दिया, उन्होंने इस बार दूसरी पार्टी का रुख किया और अनिल झा की जीत सुनिश्चित कर दी.

RJD की ओर सामने से चल कर आए ब्राह्मण वोट?

Advertisement

कहा जा रहा है कि RJD के पक्ष में यूजीसी और दूसरे मुद्दे काफी प्रभावी रहे. अनिल झा के समर्थकों ने इसे खूब हवा दी, मुद्दे को गरमा कर रखा और इसका भरपूर फायदा उठाया. मतगणना के दौरान शुरुआत में बढ़त बनाए रखने वाले सर्वेश कुमार को अंततः हार का सामना करना पड़ा. जीत के बाद अनिल झा ने इसे आम जनता की जीत बताया.

बीजेपी को उसी के घर में पटखनी देने वाले अनिल झा, ब्राह्मणों और सवर्णों के समर्थन के बावजूद लगातार संघर्ष करते रहे. इसकी बड़ी वजह यह रही कि अनिल को ब्राह्मणों ने तो खूब समर्थन दिया, लेकिन राजद के कोर मुस्लिम-यादव वोट छिटक गए. इसलिए वे प्रथम वरीयता के मतों में सर्वेश से हर राउंड की गिनती में पीछे ही रहे.

ब्राह्मणों के आने से RJD से छिटक गए MY वोट?

Advertisement

RJD और खासकर तेजस्वी के लिए अनिल झा की जीत की खुशी से ज्यादा चिंता मुस्लिम वोटों के छिटकने को लेकर है. ऐसा लग रहा है जैसे बिहार में जन सुराज मुसलमानों की स्वाभाविक पसंद बनती जा रही है. यहां भी मुस्लिमों ने RJD के बजाय जन सुराज को तवज्जो दी. जन सुराज ने दरभंगा स्नातक सीट से एक मुस्लिम उम्मीदवार मोहम्मद इम्तियाज को मैदान में उतारा, जिन्हें खुलकर मुसलमानों के वोट मिले. यानी कि मुस्लिम उम्मीदवार होने के कारण, मुस्लिमों ने पार्टी की बजाय उम्मीदवार को प्राथमिकता दी. यही बात आरजेडी को अंदर ही अंदर खाए जा रही है.

यादव और मुसलमान RJD-BJP नहीं तो किसकी ओर गए?

आपको बता दें कि इम्तियाज को इस चुनाव में 10 हजार से अधिक प्रथम वरीयता वाले मत प्राप्त हुए. हालांकि, मुसलमानों ने द्वितीय वरीयता में आरजेडी के अनिल झा को प्राथमिकता दी, जिसके कारण बैलेट पर द्वितीय वरीयता वाले मतों से अंतिम राउंड में राजद प्रत्याशी की जीत तय हुई.

Advertisement

मालूम हो कि एमएलसी चुनाव राज्य विधानमंडल के लिहाज से काफी अहम चुनाव होता है. यहां जिस तरीके से चुनाव होता है, उससे पता चलता है कि नैरेटिव (विमर्श) किस ओर जा रहा है. इन चुनावों में पार्टी का चुनाव चिह्न नहीं होता है, ऐसे में पार्टी के लिए अपने उम्मीदवारों को जिताना काफी मुश्किल होता है. एमएलसी चुनाव में चुनाव चिह्न गौण होने के कारण पार्टी के कोर वोटर्स ने पार्टी की बजाय अपनी जाति के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी. इतना ही नहीं, जिस तेजी से और खुलकर ब्राह्मणों ने आरजेडी के पक्ष में वोट किया, उसका विपरीत असर भी देखने को मिला. सवर्णों के आरजेडी के पक्ष में मतदान करने के कारण MY समाज के वोटर्स ने इसके विरोध में वोट किया. इसकी वजह साफ तौर पर ध्रुवीकरण है.

ये भी पढ़ें: राजनीतिक विचारधारा नहीं बनेगी सरकारी नौकरी में बाधा...यूपी में नियुक्ति विभाग ने अभ्यर्थियों के सत्यापन पर स्पष्ट किया रुख

यादवों ने क्यों छोड़ा RJD का साथ?

Advertisement

यादव समाज से आने वाले छात्र नेता दिलीप कुमार को 6000 के करीब प्रथम वरीयता वाले मत प्राप्त हुए. यानी कि यादव समाज ने अनिल झा को प्रथम वरीयता नहीं दी, बल्कि अपनी जाति के उम्मीदवार को तवज्जो दी. इसी कारण पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार अनिल झा प्रथम वरीयता वाले वोट के मामले में लगातार पिछड़ते रहे. हालांकि, कांग्रेस ने भी तेजस्वी की चिंता बढ़ाई, जिसने इस सीट पर एक ब्राह्मण उम्मीदवार को ही मैदान में उतारा था, जिन्हें 4000 के करीब प्रथम वरीयता के मत प्राप्त हुए.

क्या ब्राह्मणों के वोट को नकारेंगे तेजस्वी यादव?

ऐसे में सवाल उठता है कि तेजस्वी इस जीत को किस तरह देखेंगे. क्या वे सामने से चलकर आ रहे ब्राह्मण वोट को 'ना' कहेंगे? यह वही ब्राह्मण वोट बैंक है, जिसे साधने के लिए यूपी में मायावती लगातार जोर लगा रही हैं और सपा भी ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित कर रही है.

यह भी पढ़ें

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 24 अक्टूबर को मतदान हुआ था, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को शुरू हुई थी. सभी आठ सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं. इनमें भाजपा और राजद ने दो-दो सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि जनता दल (यूनाइटेड) और जन सुराज को एक-एक सीट मिली है. वहीं, दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए हैं.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें