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लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक गिरा, दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई सरकार

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पर सरकार को बड़ा झटका लगा है. सदन में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका और विचार स्तर पर ही गिर गया.

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17 Apr 2026
( Updated: 17 Apr 2026
08:24 PM )
लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक गिरा, दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई सरकार
Image Credits: X/@sansad_tv
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लोकसभा में सरकार को दो-तिहाई बहुमत न मिलने पर महिला आरक्षण बिल गिर गया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि इस बिल पर विचार करने पर मत विभाजन के दौरान पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े. उन्होंने कहा कि अब इस बिल पर आगे की कार्यवाही पर फैसला संभव नहीं है, क्योंकि यह बिल विचार करने के लिए पेश किए जाने के लेवल पर ही गिर गया है. वहीं, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अन्य दो बिल भी आगे न बढ़ाने की बात कही.  

लोकसभा में गिरा संविधान संशोधन बिल

विपक्ष के विरोध के बाद लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पर मतदान किया गया. संविधान संशोधन विधेयक पर ध्वनि मत से नहीं, बल्कि मत विभाजन के जरिए मतदान होता है, यानी यह स्पष्ट करना होता है कि कितने वोट समर्थन या विरोध में पड़े हैं.

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मत विभाजन के जरिए हुआ फैसला

संविधान के अनुच्छेद 368 के उपबंधों के अनुसार, सभा की कुल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा और सभा के उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो तिहाई बहुमत द्वारा विधेयक पारित नहीं हुआ.

आगे की कार्यवाही पर रोक

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इससे पहले केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि मैं इस देश की मातृशक्ति से कहना चाहता हूं कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति में कांग्रेस पार्टी ने जो प्रस्ताव रखा है, वह एक सुनियोजित जाल है, ताकि महिला आरक्षण को 2029 से पहले लागू न होने दिया जाए. इसलिए ये जो कहते हैं कि हमारे राज्यों को समान भार होना चाहिए, मैं सहमत हूं. महिला आरक्षण 2029 से पहले होना चाहिए. 2029 के बाद ले जाने के लिए इनके षड्यंत्र को हम सफल नहीं होने देंगे. मैं समझता हूं कि अगर ये वोट नहीं देंगे तो महिला आरक्षण बिल गिर जाएगा, लेकिन देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है.

अमित शाह का विपक्ष पर हमला

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उन्होंने कहा कि मैं यहां संविधान की नीतियों को स्पष्ट करना चाहता हूं. भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता है. इंडिया महागठबंधन वाले तुष्टिकरण की राजनीति के कारण मुस्लिम आरक्षण की मांग खड़ी करना चाहते हैं और ये संविधान की बात करते हैं. कोई मुझे बता दे कि संविधान के किस अनुच्छेद में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान है. भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को मान्यता नहीं देता है. इसके बावजूद, तुष्टीकरण की राजनीति से प्रेरित होकर, इंडिया महागठबंधन मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग कर रहा है, जबकि वे अपने इस रुख के समर्थन में संविधान का हवाला भी दे रहे हैं.

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