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कौन है वीरेंद्र सिंह बसोया? दुबई से भारत लाए गए ड्रग माफिया पर अमित शाह ने दी बड़ी जानकारी, बोले- कानून से कोई नहीं बच सकता

सरकार की ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई के तहत NCB ने कथित ड्रग तस्करी सरगना और भगोड़े वीरेंद्र सिंह बसोया को UAE से भारत लाया है. गृह मंत्री अमित शाह ने इसे ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की बड़ी कामयाबी बताया.

Image Source: Screengrab
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भारत सरकार ने विदेशों में छिपे ड्रग्स तस्करों के खिलाफ अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है. इसी कड़ी में ड्रग्स सिंडिकेट के सरगना वीरेंद्र सिंह बसोया को दुबई से भारत लाया गया है. बसोया को भारत लाना जांच एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है. उसके खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था.

अमित शाह ने क्या कहा?

बसोया के भारत पहुंचने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर सरकार की ड्रग्स के खिलाफ नीति को लेकर पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पता लगा रही है और उनके पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई कर रही है. गृह मंत्री ने इसे नशीले पदार्थों के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम बताया है.

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दुबई से भारत कैसे लाया गया बसोया?

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जानकारी के मुताबिक, वीरेंद्र सिंह बसोया को दुबई में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद भारत सरकार की पहल पर उसे डिपोर्ट किया गया. उसे एयर इंडिया की फ्लाइट से भारत लाया गया. बसोया पर ड्रग्स तस्करी से जुड़े कई गंभीर आरोप हैं और वह पुणे के करीब 6000 करोड़ रुपये के चर्चित ड्रग्स मामले में आरोपी बताया गया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, बसोया का नाम ड्रग्स के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा है. दिल्ली पुलिस के करीब 13000 करोड़ रुपये के ड्रग्स मामले में मुख्य आरोपी बताए गए संदीप धुनिय से भी उसके करीबी संबंध होने का दावा किया गया है. संदीप धुनिय के दुबई से पाकिस्तान जाने की बात सामने आई है. ऐसे में बसोया की गिरफ्तारी और भारत वापसी को एजेंसियों के लिए अहम सफलता माना जा रहा है. उम्मीद है आने वाले दिनों में इस सिंडिकेट से जुड़े लोगों को भी पकड़ा जाएगा. 

970 किलो मेफेड्रोन की बरामदगी से खुला नेटवर्क

NCB के दस्तावेजों के अनुसार, जांच में आरोप सामने आया कि वीरेंद्र सिंह बसोया एक बड़े ड्रग्स नेटवर्क का हिस्सा था और मेफेड्रोन की बड़ी खेप लंदन भेजने की साजिश में उसकी भूमिका थी. इस मामले में पुणे पुलिस ने 21 फरवरी 2024 को दिल्ली में कार्रवाई की थी. इस दौरान दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया को गिरफ्तार किया गया था. दोनों के कब्जे से करीब 970 किलो मेफेड्रोन बरामद होने की बात सामने आई थी. जांच के अनुसार, इस खेप को लंदन भेजने की तैयारी की जा रही थी.

लॉजिस्टिक्स कंपनी के जरिए विदेश भेजने की तैयारी

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जांच एजेंसियों के मुताबिक, मेफेड्रोन की खेप को डेल्टा लॉजिस्टिक्स के जरिए कंसाइनमेंट के रूप में लंदन भेजने की योजना थी. आरोप है कि दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया, वीरेंद्र सिंह बसोया के निर्देश पर काम कर रहे थे. इस मामले में डेल्टा लॉजिस्टिक्स के मालिक संदीप हनुमानसिंह यादव और कंपनी के मैनेजर देवेंद्र रामफुल यादव को भी 21 फरवरी 2024 को गिरफ्तार किया गया था. इससे जांच एजेंसियों को ड्रग्स की सप्लाई और विदेश भेजने के कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में मदद मिली.

बेटे के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस

बताते चलें कि जांच का दायरा सिर्फ वीरेंद्र बसोया तक सीमित नहीं है. एजेंसियों के मुताबिक, उसके बेटे ऋषभ के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी है और वह फिलहाल विदेश में बताया जा रहा है. ऐसे में अब जांच एजेंसियों की नजर इस पूरे नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों पर भी है. वीरेंद्र बसोया को भारत लाए जाने के बाद एजेंसियां उससे पूछताछ के जरिए ड्रग्स सिंडिकेट की अंतरराष्ट्रीय कड़ियों और कथित नेटवर्क के बारे में और जानकारी जुटा सकती हैं. सरकार का साफ संदेश है कि ड्रग्स तस्करी से जुड़े आरोपी दुनिया के किसी भी हिस्से में छिपें, भारतीय एजेंसियां उन तक पहुंचने की कोशिश जारी रखेंगी.

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