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उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को मिलने वाले बीज की होगी डिजिटल ट्रैकिंग

उत्तर प्रदेश सरकार गन्ना किसानों को डिजिटल माध्यमों से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है. प्रदेश में गन्ना उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग एक नया मोबाइल ऐप तैयार कर रहा है, जिसके माध्यम से गन्ने के बीजों की ट्रैकिंग की जाएगी.

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17 Apr 2026
( Updated: 17 Apr 2026
07:45 PM )
उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को मिलने वाले बीज की होगी डिजिटल ट्रैकिंग
Image Credits: AI Generator
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उत्तर प्रदेश सरकार गन्ना किसानों को डिजिटल माध्यमों से राहत प्रदान करने का बड़ा कदम उठा रही है. इसी क्रम में गन्ना किसानों को बेहतर पैदावार के लिए नए बीज ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि उत्पादन और आय को बढ़ाया जा सके. प्रदेश सरकार की मंशा के मुताबिक गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग एक नया मोबाइल ऐप तैयार करा रहा है, जिसके जरिए गन्ना शोध केंद्रों से निकलने वाले बीजों की किसानों के खेत में पहुंचने तक ट्रैकिंग होगी.  एडिशनल केन कमिश्नर, यूपी, वीके शुक्ला का कहना है कि किसान प्रदेश सरकार की प्राथमिकता हैं. गन्ने की खेती में यूपी का योगदान बेहद अहम रहा है. ऐसे में विभाग गन्ना किसानों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है. नया मोबाइल ऐप गन्ने के बीज वितरण की ट्रैकिंग से किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होगा. इससे गन्ना उत्पादन में बढ़ोतरी होगी. ऐप लॉचिंग को लेकर तैयारी तेजी से चल रही है.


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने बीजों की कालाबाजारी पर पूरी तरह नियंत्रण का प्लान बनाया है. प्लान के तहत गन्ना किसानों को उच्च गुणवत्ता वाला बीज उपलब्ध कराया जाएगा. साथ ही इन बीजों की सीड (बीज) ट्रेस एंड ट्रैक मोबाइल ऐप के जरिए ट्रैकिंग की जाएगी. इससे बीज की ट्रैकिंग से उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को काफी लाभ होगा. किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज मिलने के साथ उत्पादन भी बढ़ने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि अच्छे बीज से बढ़िया पैदावार होने पर किसानों की आय में भी वृद्धि होगी.


यूपी-गुजरात की मदद से तैयार हो रहा मोबाइल ऐप

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गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग लखनऊ मुख्यालय के जिला गन्ना अधिकारी विजय बहादुर सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार की मंशा के मुताबिक विभाग कई विभागों की मदद से नया मोबाइल ऐप तैयार कर रहा है. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन सेंटर, गुजरात के भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लिकेशन एंड जियो-इंफॉर्मेटिक्स (बीआईएसएजी-एन) इंस्टिट्यूट मिलकर गन्ना किसानों के लिए सीड (बीज) ट्रेस एंड ट्रैक मोबाइल ऐप तैयार कर रहे हैं.

विजय बहादुर सिंह ने बताया कि सबसे अच्छी बात है कि नए डिटिजल ऐप को तैयार करने में एक रूपये भी विभाग का खर्च नहीं हो रहा है. ये सारा काम पीएम गति शक्ति योजना के तहत किया जा रहा है. बीजों की ट्रैकिंग वाली ये मोबाइल ऐप एक से दो महीने में लॉन्च हो जाएगी. फिलहाल इसकी टेस्टिंग चल रही है. ऐप का जमीनी स्तर पर भी परिक्षण किया जाएगा.


सीड (बीज) ट्रेस एंड टेस्टिंग ऐप के फायदे

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1. गन्ने का बीज तीन से चार चरणों के बाद किसानों तक पहुंचता है. सबसे पहले गन्ने का कोई भी बीज शोध केंद्रों से निकलता है. इसके बाद गन्ना विकास परिषद (आधार बीज उत्पाद केंद्र) तक 
     पहुंचता है. फिर प्राथमिक बीज उत्पादन नर्सरी तक जाता है. यहां से किसानों को वितरित होना शुरू होता है. इतने सारे चरणों में बीज की ट्रैकिंग संभंव नहीं हो पाती थी, लेकिन नए मोबाइल ऐप के 
     जरिए यह संभंव हो पाएगा.
2. किसान को मोबाइल ऐप पर ही बीज की उपलब्धता पता चलेगा. यहां से वह विभाग को बीज की मांग (डिमांड) भेज सकता है. फिर गन्ना विकास परिषद में तैनात गन्ना पर्यवेक्षक हर जिले में आने 
     वाली डिमांड की उपलब्धता के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा.
3. मोबाइल ऐप पर गन्ना बीज पाने वाले किसानों का भी डाटा उपलब्ध रहेगा. इससे अगले चरण में उत्पादन की ट्रैकिंग भी आसान हो जाएगी.
4.  ट्रैकिंग शुरू होने से गन्ने की वैराइटी को पैदावार के हिसाब से आगामी वर्षों में बदलना आसान हो पाएगा.

फैक्ट फाइल

यूपी में गन्ना किसान – 46.50 लाख (चीनी मीलों को सप्लाई करने वाले)

कुल गन्ना उत्पादन – 83.25 टन प्रति हेक्टेयर

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कुल गन्ना बोआई (पिछले वर्ष) – 28.61 लाख हेक्टेयर

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