‘निडर बनेंगे तभी लीडर बनेंगे’ परीक्षा पे चर्चा में पीएम मोदी का छात्रों से संवाद

कार्यक्रम के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि परीक्षा पर चर्चा सिर्फ बोर्ड परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर पहलू से जुड़ी बातों पर खुलकर चर्चा का मंच है. छात्रों के सवाल उनके मन को भी छूते हैं और यह बताता है कि आज का युवा जीवन को लेकर कितना जागरूक और संवेदनशील है.

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09 Feb 2026
( Updated: 09 Feb 2026
07:50 AM )
‘निडर बनेंगे तभी लीडर बनेंगे’ परीक्षा पे चर्चा में पीएम मोदी का छात्रों से संवाद

'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम के 9वें संस्करण के दूसरे एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में छात्रों से खुलकर संवाद किया. इस दौरान पीएम ने कहा कि अगर जीवन में सफलता की ऊँचाइयों को छूना है या एक लीडर बनना है तो पहले निडर बनने की जरूरत है, तभी आप किसी मुकाम पर पहुंच सकते हैं. 

 रायपुर में पीएम मोदी का छात्रों से संवाद

पीएम मोदी ने कहा कि परीक्षा पर चर्चा का असली मतलब ही है साथ बैठकर बात करना, एक-दूसरे को समझना और एक-दूसरे से सीखना. उन्होंने बताया कि यह सिलसिला कुछ हफ्ते पहले कोयंबतूर से शुरू हुआ था और अब रायपुर तक पहुंचा है. बातचीत के साथ-साथ यहां उन्हें स्थानीय स्वाद चखने का मौका भी मिला.

कार्यक्रम की शुरुआत में पीएम मोदी ने 'जय जोहार' कहकर सभी का अभिवादन किया. बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ जवाब दिया. इस दौरान स्थानीय बच्चों ने उन्हें खुरमी खिलाई, जिसे पीएम मोदी ने खाया और खुद अपने हाथ से सबको बांटा भी.

घूमने की शुरुआत अपने आसपास से करें

संवाद के दौरान छात्रों ने बेझिझक अपने सवाल रखे. एक छात्र ने पीएम मोदी से पूछा कि परीक्षा के बाद घूमने का मन बहुत करता है, तो भारत में ऐसी कौन-सी जगहें हैं, जहां छात्र जा सकते हैं. इस पर पीएम मोदी ने कहा कि घूमने की शुरुआत बहुत दूर से नहीं, बल्कि अपने आसपास से करनी चाहिए. उन्होंने सलाह दी कि पहले अपनी तहसील, फिर जिले और फिर राज्य की ऐसी जगहों की सूची बनाओ, जिन्हें अभी तक नहीं देखा है. उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में साधारण तरीके से यात्रा करनी चाहिए, जैसे ट्रेन के डिब्बे में सफर करना, घर से खाना लेकर जाना और आम लोगों के बीच रहकर अनुभव लेना. यही असली पर्यटन है, जिससे जीवन में बहुत कुछ सीखने को मिलता है. भारत इतना विविधताओं से भरा देश है कि उसे देखने के लिए एक जिंदगी भी कम पड़ जाती है.

परीक्षा के तनाव से घबराएं नहीं

एक छात्रा ने परीक्षा के दौरान तनाव को लेकर सवाल किया. उसने कहा कि कभी-कभी सवाल नहीं बनते, जिससे मन अशांत हो जाता है. इस पर पीएम मोदी ने बच्चों को समझाया कि परीक्षा से पहले खुद पर भरोसा रखना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि जो भी आपने पढ़ा और सुना है, वह बेकार नहीं गया है, वह कहीं न कहीं आपके भीतर जमा है. परीक्षा के दौरान घबराने की बजाय शांत मन से प्रश्नपत्र को देखना चाहिए. उन्होंने पढ़ाई को खेल से जोड़ते हुए कहा कि जैसे एक खिलाड़ी निरंतर अभ्यास, हार-जीत और प्रतिस्पर्धा से मजबूत बनता है, वैसे ही विद्यार्थी भी निरंतरता और अभ्यास से मजबूत होता है. उन्होंने एक खास तरीका भी बताया और कहा कि अगर किसी विषय में कमजोर महसूस हो तो अपने क्लास के ऐसे छात्र को दोस्त बनाओ, जिसे वह विषय कम आता हो और उसे पढ़ाना शुरू करो. पढ़ाते-पढ़ाते खुद की पकड़ मजबूत हो जाएगी.

पढ़ाई और खेल दोनों जरूरी

खेल और पढ़ाई के संतुलन पर पूछे गए सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा और खेल दोनों ही जीवन के लिए जरूरी हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि यह सोच कभी नहीं रखनी चाहिए कि खेल में अच्छे हैं तो पढ़ाई की जरूरत नहीं, या पढ़ाई काफी है तो खेल की जरूरत नहीं. उनका कहना था कि पढ़ाई में भी मजबूत बनो और खेल में भी, ताकि कोई यह न कहे कि पढ़ाई नहीं आती इसलिए मैदान में रहता है. जीवन में खेल होना भी जरूरी है, क्योंकि खेल हमें अनुशासन और संतुलन सिखाता है.

छोटे प्रयास से बड़ा पर्यावरण संरक्षण

पर्यावरण संरक्षण को लेकर पूछे गए सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि प्रकृति की रक्षा हमारे स्वभाव में आनी चाहिए. उन्होंने छोटे-छोटे उदाहरण देकर समझाया कि जैसे ब्रश करते वक्त पानी बंद करना, या घर का बचा हुआ पानी पौधों में डालना. उन्होंने एक स्कूल का उदाहरण दिया, जहां एक शिक्षक ने बच्चों को रोज एक बोतल में वेस्ट पानी लाकर पौधों में डालने के लिए प्रेरित किया और पूरा स्कूल हराभरा बन गया. पीएम मोदी ने कहा कि छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं.

लीडरशिप का मंत्र: ‘कोई करे या न करे, मैं करूंगा’

नेतृत्व पर सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा कि अगर लीडर बनना है तो सबसे पहले निडर बनना होगा. उन्होंने कहा कि यह सोच विकसित करनी होगी कि "कोई करे या न करे, मैं करूंगा." जब इंसान अपने से शुरुआत करता है, तो अपने आप नेतृत्व विकसित होने लगता है. उन्होंने समझाया कि लीडरशिप का मतलब चुनाव लड़ना या भाषण देना नहीं, बल्कि लोगों को समझाना और साथ लेकर चलना है.

छात्रों के सवालों ने पीएम मोदी को छुआ

कार्यक्रम के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि परीक्षा पर चर्चा सिर्फ बोर्ड परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर पहलू से जुड़ी बातों पर खुलकर चर्चा का मंच है. छात्रों के सवाल उनके मन को भी छूते हैं और यह बताता है कि आज का युवा जीवन को लेकर कितना जागरूक और संवेदनशील है.

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वहीं, पीएम मोदी से संवाद के बाद छात्रों ने खुशी जाहिर की. बच्चों का कहना था कि पीएम मोदी से मिलना और इस तरीके उनसे बातचीत कर सीखने का मौका मिल उनके लिए सपने जैसा है.

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