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“बड़ी विरासत को नष्ट करने के लिए अपने ही काफी हैं”, राजद की पारिवारिक कलह पर रोहिणी आचार्य का बड़ा बयान

रोहिणी ने पोस्ट में आगे लिखा, "जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, अहंकार सिर पर चढ़ जाता है. तब 'विनाशक' ही आंख-नाक और कान बन बुद्धि-विवेक हर लेता है."

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10 Jan 2026
( Updated: 10 Jan 2026
10:57 AM )
“बड़ी विरासत को नष्ट करने के लिए अपने ही काफी हैं”, राजद की पारिवारिक कलह पर रोहिणी आचार्य का बड़ा बयान

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने शनिवार को पार्टी और परिवार के भीतर चल रही कथित सियासी उठापटक पर टिप्पणी की. रोहिणी आचार्य ने कहा कि किसी बड़ी विरासत को नष्ट करने के लिए बाहरी लोगों की जरूरत नहीं होती, बल्कि अपने ही लोग और कुछ षड्यंत्रकारी काफी होते हैं. उन्होंने इशारों में कहा कि जिस विरासत को बड़ी मेहनत और शिद्दत से खड़ा किया गया, उसे नुकसान पहुंचाने में अक्सर अपने ही लोग आगे आ जाते हैं.

राजद में पारिवारिक कलह पर रोहिणी आचार्य का बड़ा बयान

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "बड़ी शिद्दत से बनायी और खड़ी की गई 'बड़ी विरासत' को तहस-नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, 'अपने' और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी 'नए बने अपने' ही काफी होते हैं. हैरानी तो तब होती है , जब जिसकी वजह से पहचान होती है, जिसकी वजह से वजूद होता है, उस पहचान, उस वजूद के निशान को बहकावे में आ कर मिटाने और हटाने पर 'अपने' ही आमादा हो जाते हैं."

रोहिणी ने पोस्ट में आगे लिखा, "जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, अहंकार सिर पर चढ़ जाता है. तब 'विनाशक' ही आंख-नाक और कान बन बुद्धि-विवेक हर लेता है."

पहले भी लगाए थे गंभीर आरोप

इससे पहले बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की करारी हार के बाद भी रोहिणी आचार्य ने भाई तेजस्वी यादव और उनके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए परिवार त्यागने और राजनीति छोड़ने की घोषणा की थी. रोहिणी ने खुद को अपमानित बताते हुए बताया कि उनके ऊपर चप्पल तक फेंककर मारी गई.

इशारों-इशारों में अपनों पर साधा निशाना

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रोहिणी ने इस संबंध में एक्स पोस्ट में लिखा था कि, "एक बेटी, एक बहन, एक शादीशुदा महिला और एक मां को जलील किया गया, गंदी गालियां दी गईं, और मारने के लिए चप्पल उठाया गया. मैंने अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया, सच का समर्पण नहीं किया, सिर्फ और सिर्फ इस वजह से मुझे बेइज्जती झेलनी पड़ी. एक बेटी मजबूरी में अपने रोते हुए मां-बाप और बहनों को छोड़ आई, मुझसे मेरा मायका छुड़वाया गया. मुझे अनाथ बना दिया गया. आप सब मेरे रास्ते कभी ना चलें, किसी घर में रोहिणी जैसी बेटी-बहन पैदा ना हो."

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