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कानपुर गैंगरेप: कोर्ट ने लगाई पुलिस को फटकार, 48 घंटे बाद भी नहीं दर्ज हुआ पीड़िता का बयान, आरोपी दारोगा अब भी फरार

कानपुर किशोरी दुष्कर्म मामले में आरोपी यूट्यूबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, जबकि फरार दारोगा अमित मौर्य की तलाश जारी है. मेडिकल रिपोर्ट में यौन शोषण के संकेत मिलने के बाद केस में गैंगरेप की धारा जोड़ी गई.

कानपुर गैंगरेप: कोर्ट ने लगाई पुलिस को फटकार, 48 घंटे बाद भी नहीं दर्ज हुआ पीड़िता का बयान, आरोपी दारोगा अब भी फरार
Accused Amit Maurya
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उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आए किशोरी से दुष्कर्म के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है. पुलिस जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे वैसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं. इस मामले में आरोपी यूट्यूबर को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि घटना में शामिल बताए जा रहे दारोगा अमित मौर्य की गिरफ्तारी अब भी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है.

मेडिकल रिपोर्ट ने बढ़ाई केस की गंभीरता

पीड़िता की मेडिकल जांच में डॉक्टरों ने यौन शोषण की संभावना से इनकार नहीं किया है. रिपोर्ट में मिले संकेतों के आधार पर पुलिस ने केस में सामूहिक दुष्कर्म यानी गैंगरेप की धारा जोड़ दी है. फोरेंसिक जांच के लिए सैंपल भेजे जा चुके हैं. वहीं, पीड़िता की वास्तविक उम्र की पुष्टि के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखा गया है. इन तथ्यों के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है.

एफआईआर में लापरवाही पर कार्रवाई

जांच के दौरान यह बात सामने आई कि शुरुआती एफआईआर में गंभीर लापरवाही बरती गई. उस समय सचेंडी थाना प्रभारी रहे इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने महज छह लाइनों में एफआईआर दर्ज की थी. इसमें घटना के कई अहम पहलुओं को शामिल ही नहीं किया गया. इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया है. अब पूरे मामले की जांच एडीसीपी कपिल देव सिंह को सौंपी गई है. पुलिस के अनुसार, सचेंडी क्षेत्र के एक गांव की 14 वर्षीय किशोरी को आरोपी यूट्यूबर शिवबरन यादव ने काली स्कॉर्पियो में जबरन बैठाया. इसके बाद उसे झांसी रेलवे लाइन के पास ले जाकर दुष्कर्म किया गया. शुरुआत में मामला एक आरोपी तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर सामूहिक दुष्कर्म की आशंका मजबूत होती गई.

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कोर्ट में नहीं हो सके बयान दर्ज

गुरुवार सुबह पीड़िता कोर्ट पहुंची थी ताकि उसके बयान दर्ज किए जा सकें. हालांकि, जांच अधिकारी समय पर कोर्ट नहीं पहुंचे. करीब तीन घंटे तक इंतजार के बाद यह बात सामने आई कि नाबालिग होने के बावजूद पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज ही नहीं किया गया था. इस चूक पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई. कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए साफ कहा कि पहले पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की जाए. उसके बाद ही पीड़िता के बयान कराए जाएं. कोर्ट की नाराजगी के चलते उस दिन पीड़िता के बयान दर्ज नहीं हो सके. यह स्थिति पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

फरार दारोगा की तलाश में कई टीमें

फरार दारोगा अमित मौर्य की लोकेशन प्रयागराज में मिलने के बाद पुलिस की दो टीमें वहां रवाना की गई हैं. इसके अलावा एक टीम वाराणसी भी भेजी गई है. इससे पहले क्राइम ब्रांच की टीमों ने लखनऊ में भी कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी थी. जांच में यह भी सामने आया है कि अमित मौर्य ने करीब दो महीने पहले ही स्कॉर्पियो खरीदी थी. उस पर पहले से तेल चोरी करने वाले गिरोह और अवैध जुएं से जुड़े लोगों से संपर्क के आरोप लग चुके हैं. अब इन सभी कड़ियों को जोड़कर जांच की जा रही है.

परिवार ने लगाया आरोपी को बचाने का आरोप 

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पीड़िता के भाई का आरोप है कि आरोपी पुलिस विभाग से जुड़ा होने के कारण केस को कमजोर करने की कोशिश की गई. परिवार का कहना है कि उन पर दबाव बनाया जा रहा है और लगातार धमकियां मिल रही हैं. इस मामले ने कानून व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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