अमेरिकी नेतृत्व वाले ‘पैक्स सिलिका’ में भारत की एंट्री, जानें क्या है यह पहल, जो भारत को बनाएगी टेक-सुपरपावर
अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘पैक्स सिलिका’ में अब भारत की एंट्री हो चुकी है. इस पहल को वैश्विक चिप और AI सप्लाई चेन में चीन के एकाधिकार को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
Follow Us:
भारत शुक्रवार को आधिकारिक रूप से 'पैक्स सिलिका" में शामिल हो गया है. यह सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन को मजबूत करने की एक अमेरिकी पहल है. इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भारत के इस पहल में शामिल होने को अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक बहुत रणनीतिक और जरूरी कदम बताते हुए कहा कि 'पैक्स सिलिका" का युग 21वीं सदी में आर्थिक और तकनीकी ऑर्डर को तय करेगा.
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने क्या कहा?
भारत की अपार प्रतिभा और वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती देने की क्षमता पर जोर देते हुए, अमेरिकी राजदूत ने कहा कि नई दिल्ली महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण की क्षमताओं को आगे बढ़ा रही है और अमेरिका इस क्षेत्र में भारत के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है. गोर ने आगे कहा कि वाशिंगटन भारत के साथ विश्वसनीय प्रौद्योगिकियां साझा करने के लिए तैयार है और भारत को दुनिया के इस हिस्से की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं की अच्छी समझ है.
‘पैक्स सिलिका’ का क्या है उद्देश्य?
यह गठबंधन महत्वपूर्ण खनिजों से लेकर सेमीकंडक्टर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर तक पूरी सप्लाई चेन में गहन आर्थिक और तकनीकी सहयोग पर केंद्रित है. इसका उद्देश्य पारस्परिक समृद्धि, सुरक्षा और एआई आधारित विकास सुनिश्चित करना है.
India joins Pax Silica 🇮🇳🤝🇺🇸
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 20, 2026
Securing silicon supply chain, advancing semiconductor manufacturing. pic.twitter.com/5I117ZPfHs
'पैक्स सिलिका’ में शामिल होने से भारत को क्या होगा फायदा?
- वैश्विक सप्लाई चेन पर नियंत्रण- मौजूदा समय में चिप्स और सेमीकंडक्टर जैसी चीजों के लिए चीन पर निर्भर रहना पड़ता है क्योंकि चीन और ताइवान पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा सप्लाई करते हैं. भारत के इस क्षेत्र में आने से वैश्विक निर्भरता कम होगी और भारत एक ‘विश्वसनीय भागीदार’ के रुप में उभरेगा.
- रोजगार के नए अवसर- सेमीकंडक्टर उद्योग खरबों डॉलर का है. भारत में चिप निर्माण से भारी मात्रा में विदेशी निवेश आएगा. घरेलू इलेक्ट्रॉनिक सामान सस्ते होंगे. लाखों हाई टेक नौकरियां पैदा होंगी.
- राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति- वर्तमान में सारी मशीनरी चाहे वह डिफेंस सिस्टम से जुड़ा ही क्यों न हो, यहां तक कि सैटेलाइट भी चिप पर चलते हैं. ऐसे में खुद की चिप तकनीक होने से भारत की सुरक्षा कवच में कोई सेंध नहीं लगा पाएगा. इसके साथ ही दूसरे देश रक्षा की जरूरतों के लिए भारत की ओर देखेंगे.
- तकनीकी संप्रभुता- गठबंधन में शामिल होने के बाद भारत अब सिर्फ सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर नहीं, बल्कि मैन्युफ़ैक्चरर भी बनेगा. इसके साथ ही ‘मेड इन इंडिया’ की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई देगी.
वाशिंगटन में हुई थी पहल
यह भी पढ़ें
दरअसल, पैक्स सिलिका की पहल दिसंबर 2025 में वाशिंगटन में की गई थी. इसकी शुरुआती बैठक अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी के नेतृत्व में आयोजित की गई, जिसमें भारत की ओर से केंद्रीय कैबिनेट मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रतिनिधित्व किया था. इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए, हाल ही में विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा एक और उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई. इस बैठक में भारत की तरफ़ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हिस्सा लिया, जो सेमीकंडक्टर और वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में दोनों देशों के बढ़ते तालमेल को दर्शाता है.
टिप्पणियाँ 0
कृपया Google से लॉग इन करें टिप्पणी पोस्ट करने के लिए
Google से लॉग इन करें