50 हजार लोगों को छोड़ना होगा ठिकाना... बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन से हटाया जाएगा अवैध कब्जा, SC का बड़ा आदेश

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन से अवैध कब्जा हटाया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि रेलवे की जमीन केवल रेलवे की ही है.

Author
24 Feb 2026
( Updated: 24 Feb 2026
06:20 PM )
50 हजार लोगों को छोड़ना होगा ठिकाना... बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन से हटाया जाएगा अवैध कब्जा, SC का बड़ा आदेश

Haldwani Banbhoolpura Railway Land Encroachment case: उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में रेलवे की जमीन पर कथित अवैध कब्जों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बहुत बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ किया कि संबंधित भूमि रेलवे की है और उसके इस्तेमाल का अधिकार केवल रेलवे को है. कोर्ट ने रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है. 

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता यह मांग नहीं कर सकते कि उन्हें उसी स्थान पर बसाए रखा जाए. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. CJI ने साफ कहा कि रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाना होगा, क्योंकि यह सरकारी संपत्ति है और रेलवे को इसका उपयोग तय करने का पूरा अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण करने वालों को यह हक नहीं है कि वे उसी जगह पर रहने की मांग करें या रेलवे को जमीन के इस्तेमाल का फैसला बताएं.

रेलवे की 30 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जा 

कोर्ट में यह मामला लंबे समय से चल रहा है. रेलवे की लगभग 30 हेक्टेयर जमीन पर बनभूलपुरा, गफूर बस्ती और अन्य इलाकों में हजारों अवैध निर्माण बने हुए हैं, जहां अनुमानित 5,000 से ज्यादा परिवारों के करीब 50,000 लोग रहते हैं.  

रेलवे का कहना है कि ट्रैक विस्तार और अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए इस जमीन की सख्त जरूरत है, खासकर नदी के कारण मौजूदा ट्रैक में दिक्कत आ रही है. यह इलाका रेलवे विस्तार के लिए उत्तराखंड में आखिरी संभावित जगह है, उसके बाद पहाड़ी क्षेत्र शुरू हो जाता है. 

प्रशांत भूषण ने याचिकाकर्ताओं की ओर से दी दलील

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि यहां 50,000 लोग दशकों से रह रहे हैं, कई पट्टे वाली जमीन पर बसे हैं और रेलवे ने पहले कभी मांग नहीं की. उन्होंने एक मैप पेश किया, जिसमें पास की खाली जमीन का इस्तेमाल सुझाया गया. भूषण ने कहा कि एक साथ इतने परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत घर देना संभव नहीं, और दिल्ली की झुग्गी पॉलिसी में भी कट-ऑफ डेट होती है. 

प्रशांत भूषण की दलील पर CJI सूर्यकांत ने नाराजगी जताई. उन्होंने कहा, कब्जा करने वाले थोड़े ही तय करेंगे कि आखिरी रेलवे को किस जमीन का इस्तेमाल करना है. 

प्रभावितों को 6 महीने तक मिलेगा भत्ता 

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि पात्र परिवारों को विस्थापन के बाद 6 महीने तक प्रति माह 2,000 रुपए का भत्ता दिया जाएगा. रेलवे और राज्य सरकार ने सामूहिक रूप से प्रभावित परिवारों की पहचान करने और पुनर्वास की व्यवस्था का आश्वासन दिया. 

प्रभावितों के आवास की व्यवस्था के निर्देश

कोर्ट ने निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की जाए, खासकर ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के लोगों को पीएमएवाई के तहत आवास के लिए अप्लाई करने में मदद मिले. 
कोर्ट ने आदेश दिया कि नैनीताल जिले की रेवेन्यू अथॉरिटी, केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक सप्ताह का कैंप लगाएं, जहां पीएमएवाई के फॉर्म भरे जा सकें. कोर्ट ने 19 मार्च से कैंप शुरू करने के निर्देश दिए. साथ में यह भी कहा कि बनभूलपुरा में पुनर्वास केंद्र बनाया जाए, जहां हर परिवार का मुखिया जाकर फॉर्म भर सके. नैनीताल के जिलाधिकारी और एसडीएम हल्द्वानी को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट देने के निर्देश दिए गए. सामाजिक कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को पीएमएवाई के बारे में जागरूक करें. कोर्ट ने सुनिश्चित करने को कहा कि सभी पात्र परिवारों को पीएमएवाई के तहत आवास मिल सके. 

यह भी पढ़ें- दिल्ली-NCR से हटेंगे कोयला आधारित कारखाने! सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से शिफ्ट करने पर मांगा जवाब

यह भी पढ़ें

CJI सूर्यकांत ने कहा कि झुग्गियों में रहने वालों के प्रति पूरी हमदर्दी है, लेकिन बेहतर और सुरक्षित जगह पर रहने का अधिकार सबका है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवैध कब्जा हटाना जरूरी है, और यह उत्तराखंड के अन्य अतिक्रमण मामलों पर लागू नहीं होगा. मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2026 को होगी. तब तक रेलवे जमीन से अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई नहीं होगी. केंद्र ने बताया कि 13 जमीनों पर फ्रीहोल्ड है, और हर्जाना राज्य और रेलवे दोनों देंगे. 

Tags

Advertisement

टिप्पणियाँ 0

LIVE
Advertisement
Podcast video
देश और धर्म पर बात आई तो शरीर की 206 हड्डियों के साथ संविधान की सारी धाराएं तोड़ दूंगी! Megha
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें