दिल्ली-NCR से हटेंगे कोयला आधारित कारखाने! सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से शिफ्ट करने पर मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई है. बेंच ने सभी कोयला आधारित कारखानों दिल्ली से बाहर करने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है.
23 Feb 2026
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Updated:
23 Feb 2026
06:28 PM
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दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. कोर्ट ने केंद्र से पूछा, क्या कोयले से चलने वाले उद्योगों को NCR से बाहर शिफ्ट किया जा सकता है.
दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों को कई अहम निर्देश दिए हैं. साथ ही साथ इससे जुड़े अलग-अलग मामलों में जवाब तलब भी किया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने मामले की सुनवाई की. जिसमें दिल्ली से 300 किलोमीटर के अंदर नए कोयला आधारित पावर प्लांट खोलने पर रोक लगाने के प्रस्ताव पर सरकार से जवाब भी मांगा है.
क्या है 300 किलोमीटर वाला प्रस्ताव
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस सुझाव पर भी केंद्र से जवाब मांगा है, जिसमें दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में कोई नया कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्र स्थापित न किया जाने की बात कही गई थी.
कोर्ट ने पर्यावरण, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और ऊर्जा मंत्रालय से कहा कि वे मिलकर एक ऐसा प्रस्ताव तैयार करें, जिसमें NCR के कोयला आधारित उद्योगों को धीरे-धीरे बंद करने की योजना हो.
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण और तोड़-फोड़ (डिमोलिशन) के काम से उड़ने वाली धूल को कैसे रोका जाए, इस पर भी सभी पक्षों से राय मांगी है. इसके लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने कुछ उपाय सुझाए हैं. बेंच ने सभी पक्षों को 12 मार्च से पहले अपनी-अपनी रिपोर्ट और प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में जमा करने के निर्देश दिए हैं.
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की सरकारें NCR में चल रहे कोयला आधारित उद्योगों और अन्य संबंधित लोगों से सुझाव-आपत्तियां लेने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करें. इन नोटिसों को कोर्ट से भेजा गया नोटिस माना जाएगा और राज्यों को मिले फीडबैक की डिटेल देते हुए एक ‘एक्शन टेकन प्लान’ जमा करने को कहा गया है.
टाइमिंग के साथ मांगा जवाब
कोर्ट ने निर्देश दिए कि इस प्लान में यह भी बताया जाए कि कौन-कौन से उद्योग प्रभावित होंगे, उन्हें कौन सा वैकल्पिक ईंधन दिया जा सकता है, और यह बदलाव किस तरह से और कितने समय में होगा. कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली सरकार से भी जवाब मांगते हुए कहा है कि वह CAQM की लंबे समय वाली सिफारिशों को लागू करने के लिए अपनी डिटेल योजना पेश करे.
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