PAK से दोस्ती ने डुबोई एर्दोगन की लुटिया! भारत का एक फैसला और तुर्की के ₹4,300 करोड़ स्वाहा, अब हो रहा पछतावा
पाकिस्तान से दोस्ती तुर्किये को भारी पड़ रही है. ऑपरेशन सिंदूर में PAK का साथ देने वाले एर्दोगन को व्यक्तिगत तौर पर बड़ा झटका लगा है. भारत के एक फैसले के बाद उनकी बेटी की शेयर वाली कंपनी के एक दिन में ₹4,300 करोड़ डूब गए.
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ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान को सपोर्ट करने वाले तुर्की को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है. बीते साल भारत सरकार के लिए एक फैसले से उसकी सबसे बड़ी सिविल एविएशन कंपनी सेलेबी के अरबो रुपए डूब गए. अब इसको लेकर कंपनी का बड़ा बयान सामने आया है. कंपनी की चेयरपर्सन ने स्वीकार किया है कि कैसे कंपनी को हजारों करोड़ रुपए के साथ-साथ व्यक्तिगत रूप से नुकसान उठाना पड़ा.
भारत के एक फैसले से डूबी तुर्की की लुटिया
पहलगाम अटैक और उसके बाद भारत की सैन्य कार्रवाई का विरोध करने वाले तुर्की की कंपनी के खिलाफ सरकार ने कड़ा कदम उठाया था और भारत में हवाई अड्डों पर ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं प्रदान करने वाली तुर्की की कंपनी सेलेबी एनएएस एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया लिमिटेड की सुरक्षा मंजूरी को रद्द कर दिया था. इतना ही नहीं इसके बाद अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने भी सेलेबी से ग्राउंड हैंडलिंग रियायत समझौता खत्म कर दिया था. इसका असर ये हुआ था कि कंपनी के शेयर एक ही दिन में 10% तक लुढ़क गए थे.
भारत के एक फैसले से डूबे तुर्की के ₹4,300 करोड़
अब सेलेबी ने भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े एविशन बाजार से बाहर कर दिए जाने के एक साल बाद कंपनी ने पहली चुप्पी तोड़ी है और लगे आर्थिक के साथ-साथ कंपनी के शेयर को हुए नुकसान पर खुलकर बात की है. कंपनी ने दावा किया है कि भारत के उस एक्शन से उसे एक ही दिन में अरबों रुपए का झटका लगा था.
पाकिस्तान का साथ देने की कीमत चुका रहा तुर्की
आपको बता दें कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान तुर्की ने खुलकर पड़ोसी देश का साथ दिया था, जिसके बाद पूरे देश में तुर्की की कंपनियों के बायकॉट की मांग उठी थी. इसके बाद नागर विमानन मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सिक्योरिटी क्लियरेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया था. सरकार ने दो टूक कहा था कि राष्ट्र की सुरक्षा और हितों को सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसके बाद कंपनी के खिलाफ भारत के विभिन्न राज्यों, एयरपोर्ट्स और कंपनियों के साथ द्विपक्षीय करार और कारोबारी रिश्ते समाप्त कर दिए गए थे.
सबसे पहले नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) के निर्देशानुसार, दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डीआईएएल) ने इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (आईजीआईए) पर ग्राउंड हैंडलिंग और कार्गो ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार सेलेबी के साथ कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया था. इसके बाद अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने मुंबई और अहमदाबाद एयरपोर्ट पर तुर्की की कंपनी सेलेबी के साथ ग्राउंड हैंडलिंग समझौते को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया. वहीं बेंगलुरू के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी सेलेबी एविएशन का ग्राउंड हैंडलिंग ऑपरेशन निलंबित कर दिया था.
क्या है सेलेबी एविशन और तुर्की के राष्ट्रपति की बेटी के बीच रिश्ता?
मालूम हो कि 2008 में अपनी शुरुआत के बाद से सेलेबी ने भारत के विमानन क्षेत्र में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया था. रिपोर्टों के अनुसार, फर्म का आंशिक स्वामित्व तैयप एर्दोगन की बेटी सुमेये एर्दोगन के पास है. सुमेये एर्दोगन की शादी सेल्कुक बेराकटार से हुई है, जिनकी कंपनी बेराकटार सैन्य ड्रोन का निर्माण करती है जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ किया था.
कंपनी ने मानी नुकसान की बात, कैसे भारत से बाहर हो गई सेलेबी!
इस संबंध में खुलकर बात करते हुए कंपनी की चेयरपर्सन कैनन सेलेबिओग्लू ने दावा किया कि भारत सरकार के महज एक फैसले से उनकी कंपनी की 500 मिलियन डॉलर (4,300 करोड़) की वैल्यू खत्म हो गई. उन्होंने कहा कि कंपनी ने 2000 के दशक में बड़ी मेहनत से भारत से कठिन, बड़े और जटिल बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज की थी, जो कि एक झटके में खत्म हो गई. कंपनी की चेयरपर्सन ने स्वीकार किया कि भारत से बाहर कर दिया जाना उनके लिए सिर्फ कारोबारी नहीं बल्कि कंपनी के लिए व्यक्तिगत नुकसान था, जहां पर कि कंपनी के लिए स्पेस ही खत्म हो गई, एक दिन में कंपनी के 10 हजार कर्मचारियों को दूसरी जगह भेज दिया गया. उन्होंने कहा कि जिस कंपनी के कारोबार की भारत में शुरुआत हमने एक दशक की मेहनत से, एक-एक समस्या को खत्म करके, नीतिगत बदलाव करके की थी, वो एक दिन में खत्म हो गई.
भारत में सबसे बड़ी ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी थी सेलेबी!
कंपीन पर भारत सरकार की कार्रवाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कंपनी सिक्योरिटी लाइसेंस रद्द होने से पहले सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया देश की सबसे बड़ी ग्राउंड हैंडलिंग कंपनियों में से एक थी. इसका दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु समेत 9 बड़े एयरपोर्ट लॉजिस्टिक्स हब पर काम कर रही थी. आपको बताएं कि ये कंपनी हर साल करीब 58 हजार उड़ानों और 5.40 लाख टन कार्गो की हैंडलिंग करती थी. इसके पास एयरपोर्ट ऑपरेशंस में उसकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी. उसके पास एयरपोर्ट ग्राउंड हैंडलिंग, कार्गो सर्विस, कार्गो सिक्योरिटी चेक, पैसेंजर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और लॉजिस्टिक्स कोऑर्डिनेशन जैसी अहम जिम्मेदारियां थीं.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किये ने कैसे की थी पाकिस्तान की हथियारों से मदद?
आपको बता दें कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान तुर्की ने खुलकर पड़ोसी देश का साथ दिया था, जिसके बाद पूरे देश में तुर्की की कंपनियों के बायकॉट की मांग उठी थी. तुर्की ने पाकिस्तान को 350 से ज्यादा बायरकटर TB2 और असिसगार्ड सोंगर ड्रोन उपलब्ध कराए गए. इतना ही नहीं, तुर्की वायुसेना का C-130 विमान और एक युद्धपोत भी पाकिस्तान पहुंचा था. रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के साथ तुर्किये की संलिप्तता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसके दो सैन्य ऑपरेटिव भी मारे गए थे.
भारत के एक फैसले की कीमत अब तक चुका रहा तुर्किये!
इसके बाद नागर विमानन मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सिक्योरिटी क्लियरेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया था. सरकार ने दो टूक कहा था कि राष्ट्र की सुरक्षा और हितों को सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसके बाद कंपनी के खिलाफ भारत के विभिन्न राज्यों, एयरपोर्ट्स और कंपनियों के साथ द्विपक्षीय करार और कारोबारी रिश्ते समाप्त कर दिए गए थे.
सबसे पहले नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) के निर्देशानुसार, दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डीआईएएल) ने इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (आईजीआईए) पर ग्राउंड हैंडलिंग और कार्गो ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार सेलेबी के साथ कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया था. इसके बाद अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने मुंबई और अहमदाबाद एयरपोर्ट पर तुर्की की कंपनी सेलेबी के साथ ग्राउंड हैंडलिंग समझौते को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया. वहीं बेंगलुरू के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी सेलेबी एविएशन का ग्राउंड हैंडलिंग ऑपरेशन निलंबित कर दिया था.
विश्वविद्यालयों ने भी रद्द किए थे अपने MoUs!
सिर्फ एयरपोर्ट्स ही नहीं देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए तुर्की के संस्थानों के साथ अपने शैक्षणिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) को निलंबित कर दिया था. इस दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया ने एक बयान जारी कर तुर्की गणराज्य की सरकार से संबद्ध किसी भी संस्थान के साथ सभी समझौता ज्ञापनों को तत्काल निलंबित करने की घोषणा की थी.
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इस बारे में जामिया मिलिया इस्लामिया ने मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि विश्वविद्यालय राष्ट्र के साथ मजबूती से खड़ा है. वहीं इससे पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने भी तुर्की के इनोनू विश्वविद्यालय के साथ अपने स्वयं के समझौता ज्ञापन को निलंबित कर दिया था.