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ममता बनर्जी की नई पहचान 'फुटबॉल', EC ने बनाया पार्टी का सिंबल, नाम भी बदला, जानें ऋतब्रत गुट को क्या मिला
ममता बनर्जी का फुटबॉल से खास कनेक्शन रहा है. साल 2021 के चुनावों में ममता बनर्जी घायल होने के बाद फुटबॉल खेलते हुए नजर आईं थीं.
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बंगाल चुनाव के बाद दो धड़ों में बंटी तृणमूल कांग्रेस पर चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है. आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी, दोनों गुटों के नाम और चुनाव चिन्ह तय कर दिए हैं.
चुनाव आयोग की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुट के नए नामों की घोषणा कर दी गई है. चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी की पार्टी को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' जबकि ऋतब्रत बनर्जी के गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम दिया गया है.
ममता बनर्जी को मिला फुटबॉल चिन्ह
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चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी की पार्टी 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' को 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न दिया है. जबकि ममता बनर्जी की पार्टी को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा राज्यों में राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता दी है. वहीं, ऋतब्रत बनर्जी की पार्टी 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' को 'लिफाफा' चुनाव चिह्न दिया गया है. उनकी पार्टी को भी पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा राज्यों में राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता दी गई है. ममता बनर्जी का फुटबॉल से खास कनेक्शन रहा है. चुनावों के दौरान ममता बनर्जी घायल होने के बाद फुटबॉल खेलते हुए नजर आईं थीं. बंगाल में फुटबॉल का खास क्रेज भी देखने को मिलता है.
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साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जब ममता बनर्जी जब नंदीग्राम से नॉमिनेशन करने पहुंची तब पैर में चोट लग गई थी. चेकअप में पैर में फ्रैक्चर पाया गया. इस घटना के बाद ममता बनर्जी पैरों में प्लास्टर लगाकर कोलकाता की एक रैली में पहुंची थी. यहां उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे ही मंच से समर्थकों की तरफ एक फुटबॉल पर किक मारी थी. इसके साथ ही तब ममता बनर्जी ने ‘खेला होबे’ का नारा भी दोहराया था. इस नारे की तरह ही साल 2021 के चुनाव में ममता दीदी ने BJP के साथ खेला किया था और BJP 77 सीटों पर रह गई. जबकि TMC को 215 सीटों के साथ बड़ी जीत हासिल हुई.
इससे पहले दोनों गुटों ने चुनाव आयोग को अपने-अपने नए पार्टी नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प सौंप दिए थे. एक गुट पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाला 'मूल लेकिन अल्पमत' वाला गुट है जबकि दूसरा पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला 'बागी लेकिन बहुमत' वाला गुट है.
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ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने गुरुवार आधी रात के बाद नाम और चिह्न के लिए तीन-तीन विकल्प आयोग को भेजे. वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने शुक्रवार सुबह अपने विकल्प भेजे थे.
उपचुनाव से पहले बड़ा फैसला
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चुनाव आयोग ने नए नाम और चिह्न जमा करने की अंतिम समय सीमा शुक्रवार सुबह 11 बजे तक तय की थी. अब आयोग दोनों गुटों के लिए नए नाम और चिह्न फाइनल कर दिया है, जिसका इस्तेमाल दोनों गुट 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में करेंगे. इन उपचुनावों के नतीजे 9 अक्टूबर को आएंगे. यह दोनों सीटें पूर्वी मेदिनीपुर और मुर्शिदाबाद जिले में हैं. गुरुवार रात चुनाव आयोग ने 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'घास-फूल' वाले चुनाव चिह्न को फ्रीज करने का ऐलान किया था.
बंगाल में हार के बाद टूटी थी TMC
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पश्चिम बंगाल के नतीजों में BJP की बड़ी जीत के बाद TMC में टूट होने लगी थी. विधानसभा के साथ-साथ लोकसभा में भी ममता बनर्जी के साथियों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया. TMC के पास 28 लोकसभा सांसद थे, इनमें से अब केवल 8 बचे हैं. जबकि राज्यसभा की बात करें तो यहां भी 13 में से दो सांसदों ने इस्तीफा दे दिया था. वहीं, विधानसभा में TMC ने 80 सीटें जीतीं थीं, इनमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं, ममता की TMC के पास केवल 22 विधायक बचे रह गए.