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‘कमी रह गई…’ UGC और NCERT बवाल पर धर्मेंद्र प्रधान ने तोड़ी चुप्पी, माना- टाले जा सकते थे विवाद

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ‘इन मुद्दों को जिस तरह से समाज के सामने पेश किया गया, उसमें कमी रह गई. सरकार की मंशा किसी को भी प्रताड़ित करने की नहीं है.’

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30 Mar 2026
( Updated: 30 Mar 2026
12:23 PM )
‘कमी रह गई…’ UGC और NCERT बवाल पर धर्मेंद्र प्रधान ने तोड़ी चुप्पी, माना- टाले जा सकते थे विवाद
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UGC के नए नियमों और NCERT के पाठ्यक्रम में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ से जुड़े चैप्टर जोड़े जाने पर मचे विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने माना है कि UGC के नए नियमों और NCERT की किताबों में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' जैसे विषयों को शामिल करने से जो विवाद पैदा हुए, उन्हें टाला जा सकता था. 

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में Times Now Summit 2026 में शिरकत की थी. जिसमें उन्होंने NCERT के नए पाठ्यक्रम पर उठे सवाल और UGC के नए नियमों पर अपनी बात रखी. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, 

‘UGC के नए नियमों और NCERT की किताबों में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ जैसे विषयों को शामिल करने से हुए विवाद को टाला जा सकता था. इन मुद्दों को जिस तरह से समाज के सामने पेश किया गया, उसमें कमी रह गई. सरकार की मंशा किसी को भी प्रताड़ित करने की नहीं है.’

धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि UGC के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सुधार किया जा रहा है. मामला कोर्ट के संज्ञान में है. उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा किसी को भी प्रताड़ित करने की नहीं है. हमारा संवैधानिक कर्तव्य है कि समाज के किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव न हो, चाहे वह अनुसूचित जाति (SC), जनजाति (ST) हो या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), हम समानता के पक्षधर हैं. 

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क्या है NCERT से जुड़ा विवाद? 

दरअसल, NCERT ने कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' और जजों की कमी जैसे मुद्दों के बारे में चैप्टर जोड़े गए थे. इस मुद्दे पर जिस तरह किताबों में लिखा गया था, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी. हालांकि सवाल उठने के बाद NCERT ने माफी मांगते हुए उस किताब को वापस ले लिया था. इस विवाद पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि अब चीजें अदालती दिशा-निर्देशों के तहत आगे बढ़ रही हैं. 

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उन्होंने कहा, न्यायपालिका से संबंधित विवादित विषय की जगह नया विषय जोड़ा जाएगा और वह सुप्रीम कोर्ट की देख-रेख में ही होगा. इसके लिए विशेष समिति का गठन किया गया है. जो सुप्रीम कोर्ट के मार्गदर्शन में काम करेगी. सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज इंदू मल्होत्रा इस कमिटी की अध्यक्ष हैं. इस कमिटी में शिक्षाविद समेत तीन सदस्य हैं. 

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