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मानहानि मामला: अरविंद केजरीवाल और आतिशी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई, जानिए अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट में आज अरविंद केजरीवाल और आतिशी से जुड़े मानहानी मामले की सुनवाई होनी है. जानिए अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ.

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27 Jan 2026
( Updated: 27 Jan 2026
05:54 AM )
मानहानि मामला: अरविंद केजरीवाल और आतिशी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई, जानिए अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी की याचिका पर सुनवाई करेगा. इस याचिका में उन्होंने वोटर्स लिस्ट से कथित तौर पर वोटर्स के नाम हटाने के मामले में अपनी टिप्पणियों को लेकर मानहानि के मामले में जारी समन को रद्द करने की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर पब्लिश कॉजलिस्ट के अनुसार, यह मामला जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की बेंच के सामने लिस्टेड है.

केजरीवाल और आतिशी को सुप्रीम कोर्ट ने दी थी राहत

इससे पहले, केजरीवाल और आतिशी को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा नेता राजीव बब्बर द्वारा उनके खिलाफ दायर मानहानि मामले में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी. जस्टिस हृषिकेश रॉय (अब रिटायर्ड) की अध्यक्षता वाली तत्कालीन बेंच ने अपने अंतरिम आदेश में इस बात पर जोर दिया था कि क्या किसी राजनीतिक पार्टी को मानहानि का मुकदमा दायर करने के लिए पीड़ित व्यक्ति माना जा सकता है, इस सवाल पर गहरी जांच की जरूरत होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चार हफ्ते में जवाब देने के लिए नोटिस जारी करें. इस बीच आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी. 

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी याचिका

सितंबर 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने आप नेताओं को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 499/500 के तहत अपराधों के लिए ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया था. याचिका खारिज करते हुए, कोर्ट ने कहा था, "याचिकाकर्ताओं द्वारा लिया गया बचाव कि आरोप नेक इरादे से और जनहित में लगाए गए थे, इसे ट्रायल के दौरान साबित और स्थापित करने की जरूरत है”.

जस्टिस अनूप कुमार मेंदिरत्ता की सिंगल-जज बेंच ने क्या कहा था? 

जस्टिस अनूप कुमार मेंदिरत्ता की सिंगल-जज बेंच ने कहा, "मौजूदा मामले में लगाए गए आरोप पहली नजर में मानहानिकारक हैं, जिनका मकसद भाजपा को बदनाम करना और कुछ खास समुदायों के करीब 30 लाख वोटरों के नाम हटाने के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराकर गलत राजनीतिक फायदा उठाना है”. जस्टिस मेंदिरत्ता ने आगे कहा कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने में किसी राजनीतिक पार्टी की शायद ही कोई भूमिका होती है, क्योंकि यह काम चुनाव आयोग को कानून के मुताबिक करने के लिए सौंपा गया है. मार्च 2019 में ट्रायल कोर्ट ने भाजपा दिल्ली यूनिट के अधिकृत प्रतिनिधि बब्बर की शिकायत पर केजरीवाल, आतिशी और सुशील कुमार गुप्ता के साथ मनोज कुमार को समन भेजा था. 

30 लाख वोटरों के नाम हटाए जाने के लगाए थे आरोप

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भाजपा नेता बब्बर ने अपनी शिकायत में दावा किया था कि आप नेता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि भाजपा के निर्देश पर बनिया, पूर्वांचली और मुस्लिम समुदायों के 30 लाख वोटरों के नाम चुनाव आयोग ने हटा दिए हैं. दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन में दखल देने से इनकार करने से नाराज होकर, केजरीवाल और आतिशी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और पूरी कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी. 

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