जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के बीच अन्ना हजारे का बड़ा ऐलान, छात्र आंदोलन में होंगे शामिल; PM मोदी को भी लिखी चिट्ठी
राजधानी दिल्ली में जारी सीजेपी के प्रदर्शन के बीच छात्रों के समर्थन में अब अन्ना हजारे जल्द अहिल्यानगर जाएंगे. उन्होंने पीएम मोदी से हिंसा की बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की.
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देश की राजधानी दिल्ली में में शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर चल रहे सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के बीच अब गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे भी छात्रों के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं. अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में चल रहे छात्र आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया है. उनके करीबी सहयोगियों का कहना है कि वह जल्द ही अहिल्यानगर पहुंचकर छात्रों से मुलाकात करेंगे और उनकी मांगों पर विस्तार से चर्चा करेंगे. ऐसे समय में उनका यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब दिल्ली समेत कई शहरों में छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
आजतक न्यूज चैनल से खास बातचीत में अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देश के एक बड़े और सम्मानित नेता हैं और उन्हें यह समझना चाहिए कि किसी भी आंदोलन का समाधान हिंसा से नहीं निकाला जा सकता. अन्ना ने बताया कि इसी सोच के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है, जिसमें लोकतांत्रिक तरीके से समाधान निकालने की बात कही गई है. बीटा दें कि छात्रों के समर्थन में लगातार नामचीन हस्ती सामने आ रहे हैं. जिससे अब कहीं न कहीं सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
अहिंसा से निकलता है समाधान
अन्ना हजारे ने संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि हिंसा किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती. अपने लंबे सामाजिक जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक 22 बड़े आंदोलन किए हैं, लेकिन उनमें कभी हिंसा नहीं हुई. उनके मुताबिक, किसी भी जन आंदोलन की ताकत उसकी अहिंसा और अनुशासन में होती है. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर जो घटनाएं हुईं, वे दुर्भाग्यपूर्ण हैं और ऐसी परिस्थितियों से हर हाल में बचना चाहिए.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या बोले अन्ना?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे ऊपर होती है. उनके अनुसार सरकार और उसके सभी मंत्री जनता के सेवक हैं. यदि किसी मामले में जवाबदेही बनती है तो उसे स्वीकार करने में संकोच नहीं होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को जनता की भावनाओं को समझते हुए संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए.
PM मोदी को लिखे पत्र में क्या कहा?
अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि लोकतंत्र में टकराव की जगह संवाद को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. उनका मानना है कि किसी घोटाले या गड़बड़ी के लिए केवल निचले स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है. यदि सरकार किसी उपलब्धि का श्रेय लेती है, तो शीर्ष स्तर पर जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि किसी मंत्री का इस्तीफा लिया जाता है तो इससे सरकार कमजोर नहीं होगी, बल्कि जवाबदेही की संस्कृति और मजबूत होगी.
छात्रों के भविष्य पर जताई चिंता
अन्ना ने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों का सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ता है. उन्होंने दावा किया कि लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के कारण लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और कई परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कई दिनों से छात्र और अभिभावक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं, इसलिए केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से इस आंदोलन को देखना उचित नहीं होगा. यह बहुत गंभीर मुद्दा है .
सोनम वांगचुक के मुद्दे पर भी रखी राय
अन्ना हजारे ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाए जाने पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन में बातचीत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उनके मुताबिक, सरकार को प्रदर्शनकारियों की बात गंभीरता से सुननी चाहिए और भरोसेमंद संवाद के जरिए समाधान तलाशना चाहिए. अन्ना ने अपील की कि छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय उनकी चिंताओं को समझा जाए और गांधीवादी मूल्यों के अनुरूप शांतिपूर्ण तरीके से इस पूरे विवाद का समाधान निकाला जाए.
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बहरहाल, अन्ना हजारे के इस कदम से छात्र आंदोलन को नई चर्चा और नैतिक समर्थन मिल सकता है. अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार उनकी अपील पर क्या रुख अपनाती है और छात्रों की मांगों को लेकर आगे क्या फैसला लिया जाता है.