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रोजाना 2 लाख श्रद्धालु, हर क्षेत्र में विकास... राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या की अर्थव्यवस्था में बंपर उछाल, IIM लखनऊ की रिपोर्ट

अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद शहर की तस्वीर बदलती दिख रही है. भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ की रिपोर्ट ‘इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या’ के अनुसार, मंदिर निर्माण के बाद धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी वृद्धि दर्ज की गई है.

रोजाना 2 लाख श्रद्धालु, हर क्षेत्र में विकास... राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या की अर्थव्यवस्था में बंपर उछाल, IIM लखनऊ की रिपोर्ट
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अयोध्या में वर्ष 2020 में राम मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी गई थी. इसके बाद 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई. उस समय केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार ने इस ऐतिहासिक आयोजन का बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार किया था. वहीं देश की कई विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि मंदिर के स्थान पर अस्पताल और कॉलेज बनाए जा सकते थे, जिससे आम लोगों को अधिक लाभ मिलता. हालांकि अब सामने आई एक ताज़ा रिपोर्ट ने इन आरोपों को नया जवाब दिया है. प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में न केवल धार्मिक आस्था का सैलाब उमड़ा है, बल्कि शहर की आर्थिक स्थिति में भी व्यापक बदलाव देखने को मिला है.

भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ द्वारा जारी रिपोर्ट ‘इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या’ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. अध्ययन के अनुसार, अयोध्या अब केवल एक धार्मिक केंद्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि मंदिर उद्घाटन के बाद शहर में पर्यटन गतिविधियों में तेज़ी आई है. देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. इसके साथ ही होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन और स्थानीय व्यापार से जुड़े क्षेत्रों में भी बड़ा विस्तार हुआ है.

लोगों की आय में वृद्धि 

अध्ययन के मुताबिक, विदेशी निवेश और निजी क्षेत्र की भागीदारी में भी बढ़ोतरी देखी गई है. नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी तथा हवाई सेवाओं के विस्तार ने अयोध्या को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं. जानकारों का मानना है कि धार्मिक पर्यटन के बढ़ते दायरे ने छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों की आय में वृद्धि की है. शहर की अर्थव्यवस्था में आई यह तेजी उत्तर प्रदेश के समग्र विकास में भी योगदान दे रही है. रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि कुछ वर्ष पहले तक जिस आर्थिक उछाल की कल्पना करना कठिन था, वह अब वास्तविकता में बदलता दिखाई दे रहा है. अयोध्या की पहचान अब केवल आस्था के केंद्र के रूप में ही नहीं, बल्कि आर्थिक पुनर्जागरण के प्रतीक के रूप में भी स्थापित हो रही है.

रिकॉर्ड संख्या में अयोध्या पहुंच रहे श्रद्धालु 

आईआईएम (IIM) लखनऊ की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर निर्माण से पहले अयोध्या का परिदृश्य पूरी तरह अलग था. उस समय यहां साल भर में लगभग 1.7 लाख श्रद्धालु ही पहुंचते थे और शहर का बुनियादी ढांचा भी सीमित संसाधनों पर टिका हुआ था. लेकिन जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद हालात तेजी से बदले. रिपोर्ट में बताया गया है कि समारोह के बाद महज पहले छह महीनों के भीतर ही 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे. यह आंकड़ा अपने आप में एक बड़ा बदलाव बताता है. आगे के वर्षों को लेकर भी अनुमान जताया गया है कि अब हर साल करीब पांच से छह करोड़ श्रद्धालु नियमित रूप से अयोध्या का रुख करेंगे. श्रद्धालुओं और पर्यटकों की इस बढ़ती संख्या का सीधा असर राज्य की आय पर भी पड़ने की संभावना है. अध्ययन में आकलन किया गया है कि इससे उत्तर प्रदेश सरकार के कर राजस्व में 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है.

कई क्षेत्रों में हुआ विस्तार 

हर दिन औसतन दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने से अयोध्या में आतिथ्य और सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय तेजी आई है. बढ़ती भीड़ ने होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबार को नई ऊर्जा दी है. रिपोर्ट के अनुसार, शहर में 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे संचालन में आ चुके हैं, जिससे ठहरने की सुविधाओं का दायरा काफी विस्तृत हुआ है. अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमुख होटल समूह भी अयोध्या में निवेश के लिए आगे आए हैं और उन्होंने अपनी परियोजनाओं पर काम शुरू कर दिया है. इसके अलावा, करीब 6,000 नए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम स्थापित किए गए हैं, जिससे स्थानीय व्यापार को मजबूती मिली है. अध्ययन में यह भी अनुमान जताया गया है कि अगले चार से पांच वर्षों में लगभग 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं. इससे खासतौर पर स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर लाभ मिलने की उम्मीद है.

दुकान समेत अन्य सम्पत्तियों के बढ़े दाम 

इस बदलाव का सबसे अधिक फायदा अयोध्या के छोटे कारोबारियों और स्थानीय दुकानदारों को मिला है. रिपोर्ट के अनुसार, जिन व्यापारियों की दैनिक आय पहले करीब 400 से 500 रुपये तक सीमित थी, उनकी कमाई अब बढ़कर औसतन 2,500 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई है. बढ़ती श्रद्धालु संख्या ने उनके कारोबार को नई रफ्तार दी है. मंदिर क्षेत्र के आसपास रियल एस्टेट बाजार में भी जबरदस्त उछाल देखा गया है. अध्ययन में उल्लेख है कि संपत्तियों के दाम पांच से दस गुना तक बढ़ चुके हैं. बेहतर सड़क और रेल संपर्क के साथ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की शुरुआत ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया है, जिससे नए प्रोजेक्ट्स को गति मिली है. आईआईएम (IIM) की यह रिपोर्ट संकेत देती है कि अयोध्या का विकास मॉडल अब देश के अन्य प्रमुख धार्मिक शहरों के लिए आर्थिक खाके के रूप में सामने आ सकता है.

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बताते चलें कि रिपोर्ट यह संकेत देती है कि अयोध्या में हुआ यह परिवर्तन केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने शहर की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है. आस्था और विकास के इस संगम ने अयोध्या को एक ऐसे मॉडल के रूप में स्थापित किया है, जिसे आने वाले समय में देश के अन्य धार्मिक और पर्यटन शहर भी अपनाने की कोशिश कर सकते हैं.

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