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बढ़ते फोन की लत बच्चों के विकास को रोक सकती है, जानिए कैसे करता है फोन दिमाग पर असर

क्या आपका बच्चा बिना फोन के बेचैन हो जाता है? यह बढ़ती स्क्रीन टाइम लत का संकेत हो सकता है. जानिए विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल का बच्चों के दिमाग पर क्या प्रभाव पड़ता है और माता-पिता को किन बातों का ध्यान रखें.

बढ़ते फोन की लत बच्चों के विकास को रोक सकती है, जानिए कैसे करता है फोन दिमाग पर असर
Images Credits: Canva/AI
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आज के समय में छोटे बच्चों में बढ़ता स्क्रीन टाइम चिंता का विषय बनता जा रहा है, इतना ही नहीं छोटे बच्चे बिना फोन के न खाना खाते है और न ही खेलते हैं. बिना फोन के बच्चा बेचैन होने लगता है इतना ही नहीं फोन की लत से बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर असर पड़ता है. इतना ही नहीं एकाग्रता (Concentration), याददाश्त, नींद और सामाजिक व्यवहार (Social behavior) में भी परेशानी पैदा होने लगती है.

क्या है फोन की लत बच्चों में?

छोटे बच्चों में मोबाइल फोन की लत (Screen Addiction) एक बड़ी चिंता बन चुकी है. जब बच्चा बार-बार मोबाइल मांगने लगे, फोन न मिलने पर गुस्सा करें, रोने लगे या उसका ध्यान केवल स्क्रीन पर ही रहे, तो यह स्क्रीन एडिक्शन का संकेत (Signal) हो सकता है.

कैसे फोन बच्चों के दिमाग पर असर डालता है?

मोबाइल फोन की लत छोटे बच्चों पर कई तरह से असर डालती है जैसे: ध्यान और एकाग्रता कम होना, पढ़ाई में मन कम लगना, लंबे समय तक किसी एक काम पर फोकस करने में मुश्किल होना, बोलने के विकास पर असर होना, अगर बच्चा ज्यादातर समय स्क्रीन देखता है, तो बोलने और शब्द सीखने में देरी हो सकती है, याददाश्त और सीखने की कैपेसिटी कम होना.

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भावनात्मक विकास: फोन छीनने पर गुस्सा, चिड़चिड़ापन और रोना बच्चों में देखने को मिलता है. नींद पर असर होना और सोने से पहले मोबाइल देखने से नींद लाने वाला हार्मोन (मेलाटोनिन) इफेक्ट करता है, देर से नींद आना, नींद पूरी न होने से अगले दिन थकान और ध्यान की कमी महसूस होती है. 

सामाजिक विकास: परिवार और दोस्तों से बातचीत कम होने लगती है ज्यादा समय फोन के साथ बिताने लगते हैं, खेलकूद और आउटडोर एक्टिविटी कम हो जाती हैं और सामाजिक कौशल (Social Skills) कमजोर होने लगता हैं.

मानसिक स्वास्थ्य: ज्यादा स्क्रीन टाइम की वजह से बच्चों के अंदर मानसिक विकास कम पर नेगेटिव प्रभाव पड़ सकता है,  लंबे समय तक स्क्रीन पर रहने वाले कुछ बच्चों में चिंता (Anxiety), तनाव और मूड में बदलाव (Mood swings) देखने को मिलते हैं और हालांकि हर बच्चे में ऐसा होना जरूरी नहीं है.

शारीरिक नुकसान:बच्चों के अंदर कई शारीरिक नुकसान होते है जैसे आंखों में जलन होना, सूखापन और आंखों से पानी आना, सिरदर्द होना, गर्दन और पीठ दर्द होना और फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है.


क्या है स्क्रीन एडिक्शन के संकेत?

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स्क्रीन एडिक्शन आमतौर पर हर समय फोन चलाने से होता है, लेकिन इसके अलावा भी कई तरह से स्क्रीन एडिक्शन हो सकता है. जिसके कई संकेत हो सकते है, जैसे फोन न मिलने पर गुस्सा करना, पढ़ाई करने में मन न लगना, दोस्तों के साथ खेलना कम कर देना, देर रात तक मोबाइल चलाना, खाना भी फोन देखते हुए खाना,  सो कर उठते ही फोन चलाना ऐसे ही कई तरह स्क्रीन एडिक्शन के संकेत देखने को मिल सकते है.

पेरेंट्स को क्या करना चाहिए? 

माता-पिता को 2 साल से कम उम्र के बच्चों को जहां तक संभव हो स्क्रीन से दूर रखें (वीडियो कॉल जैसी सीमित जरूरतों को छोड़कर), बड़े बच्चों के लिए रोजाना स्क्रीन टाइम लिमिट करें, खाने और सोने के समय फोन न दें, बच्चों के साथ आउटडोर गेम खेलें और फिजिकल एक्टिविटी जरूर करें, किताब पढ़ने और रचनात्मक गतिविधियों (Creative activities) की आदत डालें, माता-पिता भी बच्चों के सामने मोबाइल का कम इस्तेमाल करें.

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कब लें डॉक्टर से सलाह?

जब बच्चा फोन के बिना अजीब बर्ताव करने लगे, ज्यादा फोन चलाने से पढ़ाई और दैनिक जीवन पर असर पड़ रहा हो, नींद या व्यवहार में गंभीर बदलाव आ गए हों और विकास (बोलना, सीखना, सामाजिक व्यवहार) में देरी दिख रही हो, तो बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) या बाल मनोवैज्ञानिक (child psychologist) से सलाह लेना जरूरी हो सकता है. 

फोन से कैसे बनाए दूरी 

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मोबाइल फोन का कम और सही उपयोग करें जब जरूरत हो तब ही उपयोग करें, ज्यादा समय फोन के साथ नहीं बल्कि परिवार के साथ बिताये, फोन का कम उपयोग करने से Creativity और शिक्षा के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकता है, समस्या फोन नहीं, बल्कि उसका बहुत और बेहद ज्यादा उपयोग है, बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए स्क्रीन, पढ़ाई, खेल, नींद और परिवार के साथ समय के बीच बैलेंस सबसे जरूरी होता है.

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