लगातार बैठकर काम करने से अकड़ गई है कमर? रोज़ाना इस आसन को करने से मिलेगा आराम
वक्रासन का नियमित और सही तरीके से अभ्यास करने पर रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ाने में मदद मिल सकती है। कमर और कंधों में होने वाले खिंचाव और दर्द से राहत पाने में भी यह उपयोगी माना जाता है। खासकर लंबे समय तक बैठने वाले लोगों के लिए यह आसन शरीर को स्ट्रेच करने का अच्छा तरीका हो सकता है।
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आजकल जैसी हमारी लाइफस्टाइल हो गई है उसकी वजह से शरीर में कई प्रकार की परेशानियों ने घर बना लिया है। डिजिटली काम करना, घंटों एक ही जगह बैठे रहना, गलत पोस्चर में बैठकर कंप्यूटर या फोन का इस्तेमाल करना और न बराबर Physical Activity से कम उम्र में ही लोग कमर दर्द, पीठ में जकड़न और गर्दन के तनाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में योग के कुछ आसन शरीर को एक्टिव रखने में मदद कर सकते हैं। योगशास्त्र में रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ और लचीला बनाए रखने के लिए सबसे उपयोगी और एक सरल आसन है 'वक्रासन'।
इस आसन को कैसे करें
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, वक्रासन करने के लिए सबसे पहले जमीन पर पैर सामने की ओर सीधे फैलाकर दंडासन में बैठें। दोनों पैरों को आपस में मिलाकर रखें और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। अब गहरी सांस लें।
इसके बाद बाएं पैर को मोड़ें और उसके पंजे को दाएं घुटने के पास जमीन पर रखें। अब सांस छोड़ते हुए दायां हाथ बाएं घुटने के पास ले जाएं और पैर के तलवे को पकड़ें। अगर ऐसा करना मुश्किल लगे तो हथेली को बाएं पैर के पास जमीन पर भी रखा जा सकता है।
अब बायां हाथ पीछे की तरफ जमीन पर रखें। उंगलियां शरीर से विपरीत दिशा में रहें। इस स्थिति में सांस लेते हुए अपनी रीढ़ को सीधा रखें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए गर्दन और पीठ को धीरे-धीरे बाईं तरफ मोड़ें। जितना आराम से शरीर घूम सके, उतना ही मोड़ें। जबरदस्ती शरीर को खींचने की कोशिश न करें। कुछ समय इसी स्थिति में रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में वापस आ जाएं।
वक्रासन से होने वाले फायदे
वक्रासन का नियमित और सही तरीके से अभ्यास करने पर रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ाने में मदद मिल सकती है। कमर और कंधों में होने वाले खिंचाव और दर्द से राहत पाने में भी यह उपयोगी माना जाता है। खासकर लंबे समय तक बैठने वाले लोगों के लिए यह आसन शरीर को स्ट्रेच करने का अच्छा तरीका हो सकता है।
यह आसन पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। इसके अभ्यास से कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी आम पाचन संबंधी परेशानियों में राहत मिल सकती है। शरीर के अंदरूनी अंगों पर पड़ने वाले हल्के दबाव और ट्विस्टिंग मूवमेंट की वजह से पाचन क्रिया को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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