‘शहर को बंधक नहीं बना सकते…’, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाए जाने पर कोर्ट को आपत्ति, दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब
एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल उठाया और कहा, आखिर दिल्ली के बीचों बीच किसी जगह को प्रदर्शन के लिए कैसे तय किया जा सकता है?
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मुद्दा कोई भी हो, दिल्ली का जंतर-मंतर हर प्रदर्शन का सेंटर पॉइंट रहता है. ये वो जगह है जहां आंदोलन क्रांति बने और जन की आवाज सरकार के मन तक पहुंची, लेकिन जंतर-मंतर को प्रदर्शन की जगह बनाए जाने पर कोर्ट ने आपत्ति जताई है.
एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल उठाया और कहा, आखिर दिल्ली के बीचों बीच किसी जगह को प्रदर्शन के लिए कैसे तय किया जा सकता है? जस्टिस अमित महाजन ने ये टिप्पणी ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए की.
बंधक बन जाता है पूरा शहर- कोर्ट
दरअसल, दलित क्रिश्चियन राइट्स कमेटी ने हाई कोर्ट में अर्जी दायर की थी. जिसमें कमेटी ने 10 अगस्त को जंतर-मंतर पर तीन घंटे प्रदर्शन के लिए इजाजत मांगी थी.
कमेटी की ओर से अदालत में पेश हुए वकील ने कहा था, करीब एक महीने पहले ही पुलिस से प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला. इस याचिका पर जस्टिस अमित महाजन ने कहा,
'मैं निजी तौर पर कह रहा हूं कि आखिर शहर के अंदर ही प्रदर्शन क्यों होने चाहिए. मेरे विचार से ऐसी चीजें शहर में नहीं होनी चाहिए, लेकिन यह फैसला तो सरकार को करना है. आखिर बेवजह शहर को बंधक क्यों बनने देना चाहिए?’
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को क्या आदेश दिए?
दिल्ली हाई कोर्ट के जज अमित महाजन ने दलित क्रिश्चियन कमेटी की मांग पर कोई आदेश नहीं दिया, लेकिन दिल्ली पुलिस को कड़े निर्देश दिए कि वह मांग पर फैसला करें. कोर्ट ने कहा,
‘हम कोई आदेश पारित नहीं कर रहे, लेकिन अथॉरिटीज को कम से कम यह जानकारी को याचिकाकर्ता को देनी ही चाहिए कि उनकी ओर से प्रदर्शन की अनुमति मांगे जाने पर क्या फैसला हुआ है. उन्हें प्रदर्शन करने की परमिशन रहेगी या फिर नहीं.’
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून और व्यवस्था संभालना तो पुलिस का मसला है. फिर भी हम दिल्ली पुलिस से कहते हैं कि वह शनिवार तक संगठन की ओर से प्रदर्शन की मांग पर फैसला करे.
जंतर-मंतर के विकल्पों पर विचार
इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने दलील दी कि स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर कुछ एहतियात बरती जा रही हैं. कुछ पाबंदियां भी लगाई गई हैं. सुप्रीम कोर्ट में भी इस बात को लेकर विचार किया जा रहा है कि क्या जंतर-मंतर के अलावा भी प्रदर्शन की कोई जगह हो सकती है.
इससे पहले 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में दायर एक अर्जी में कहा गया था कि जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल न रहने दिया जाए. याचिका में कहा गया था, दिल्ली के बीचों बीच प्रदर्शन होने से व्यवस्था खराब होती है. इसका सीधा असर जरूरी सेवाओं पर भी पड़ता है.
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दलित क्रिश्चियन कमेटी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उनके प्रदर्शन में सिर्फ 75 लोग ही रहेंगे. कमेटी ने दिल्ली पुलिस से वैकल्पिक जगह के सुझाव भी मांगे थे. दरअसल, दलित क्रिश्चियन कमेटी की मांग है कि दलित ईसाइयों को भी अनुसूचित जाति का दर्जा मिलना चाहिए. इसी को लेकर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए परमिशन मांगी गई थी. जिस पर अब कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को तुरंत मामले में जवाब देने को कहा है. गौरतलब है कि हाल ही में NEET पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों ने 36 दिन तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था.